tag:blogger.com,1999:blog-224206872008-07-23T20:51:42.510+05:30निनाद गाथाअभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comBlogger113125tag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-77170152028482426872008-07-23T05:11:00.006+05:302008-07-23T05:19:33.381+05:30गुरु सरकार बच गई<a href="http://bp2.blogger.com/_L9XARY0Hqns/SIZwREEiIRI/AAAAAAAAAhs/XeOrBGD7Gu4/s1600-h/nuclear_deal.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:right;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp2.blogger.com/_L9XARY0Hqns/SIZwREEiIRI/AAAAAAAAAhs/XeOrBGD7Gu4/s320/nuclear_deal.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5225987856062882066" /></a><br /><br /><br />जो कुछ भी हुआ हो गुरु सरकार बच गई,<br />लगता था डूब जायगी मंझधार, बच गई,<br /><br />मुद्दे को डीप फ्राई कर न पाई भाजपा, <br />हो तेल बचा या न बचा धार बच गई,<br /><br />व्यापार में भी प्यार का आभास छिपा है,<br />गलियों में बहा हरा हरा प्यार बच गई,<br /><br />सरदारजी कुछ और भले लगने लगे हैं,<br />कर ही दिया था पूरा आर पार बच गई.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-61135325137815334822008-07-22T10:31:00.001+05:302008-07-22T11:05:24.943+05:30लव कुश द्वारा प्रस्तुत रामायण<object width="425" height="344"><param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/S7YxTYtlKKo&hl=en&fs=1"></param><param name="allowFullScreen" value="true"></param><embed src="http://www.youtube.com/v/S7YxTYtlKKo&hl=en&fs=1" type="application/x-shockwave-flash" allowfullscreen="true" width="425" height="344"></embed></object><br /><br />हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की, <br />हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की, <br />ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की,<br /><br />जम्बुद्वीपे, भरत खंडे. आर्यावर्ते, भारतवर्षे,<br />इक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की,<br />यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की,<br />हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की,<br />ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की, <br />ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की,<br /><br />रघुकुल के राजा धर्मात्मा, चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा,<br />संतति हेतु यज्ञ करवाया, धर्म यज्ञ का शुभ फल पाया,<br />नृप घर जन्मे चार कुमारा, रघुकुल दीप जगत आधारा,<br />चारों भ्रातों के शुभ नामा, भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण रामा,<br /><br />गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके, अल्प काल विद्या सब पाके,<br />पूरण हुयी शिक्षा, रघुवर पूरण काम की,<br />हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की,<br />ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की,<br /><br />मृदु स्वर, कोमल भावना, रोचक प्रस्तुति ढंग,<br />इक इक कर वर्णन करें, लव कुश राम प्रसंग,<br />विश्वामित्र महामुनि राई, तिनके संग चले दोउ भाई,<br />कैसे राम ताड़का मारी, कैसे नाथ अहिल्या तारी,<br /><br />मुनिवर विश्वामित्र तब, संग ले लक्ष्मण राम,<br />सिया स्वयंवर देखने, पहुंचे मिथिला धाम,<br /><br />जनकपुर उत्सव है भारी,<br />जनकपुर उत्सव है भारी,<br />अपने वर का चयन करेगी सीता सुकुमारी,<br />जनकपुर उत्सव है भारी,<br /><br />जनक राज का कठिन प्रण, सुनो सुनो सब कोई,<br />जो तोडे शिव धनुष को, सो सीता पति होई,<br /><br />को तोरी शिव धनुष कठोर, सबकी दृष्टि राम की ओर,<br />राम विनय गुण के अवतार, गुरुवार की आज्ञा शिरधार,<br />सहज भाव से शिव धनु तोड़ा, जनकसुता संग नाता जोड़ा,<br />रघुवर जैसा और न कोई, सीता की समता नही होई,<br />दोउ करें पराजित कांति कोटि रति काम की,<br />हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की, <br />ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की,<br /><br />सब पर शब्द मोहिनी डारी, मन्त्र मुग्ध भये सब नर नारी,<br />यूँ दिन रैन जात हैं बीते, लव कुश नें सबके मन जीते,<br /><br />वन गमन, सीता हरण, हनुमत मिलन, लंका दहन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन.<br /><br />सविस्तार सब कथा सुनाई, राजा राम भये रघुराई,<br />राम राज आयो सुख दाई, सुख समृद्धि श्री घर घर आई,<br /><br /><br /><object width="425" height="344"><param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/mlT4HAH9nOk&hl=en&fs=1"></param><param name="allowFullScreen" value="true"></param><embed src="http://www.youtube.com/v/mlT4HAH9nOk&hl=en&fs=1" type="application/x-shockwave-flash" allowfullscreen="true" width="425" height="344"></embed></object><br /><br /><br />काल चक्र नें घटना क्रम में ऐसा चक्र चलाया,<br />राम सिया के जीवन में फिर घोर अँधेरा छाया,<br /><br />अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया,<br />निष्कलंक सीता पे प्रजा नें मिथ्या दोष लगाया,<br />अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया,<br /><br />चल दी सिया जब तोड़ कर सब नेह नाते मोह के,<br />पाषण हृदयों में न अंगारे जगे विद्रोह के,<br /><br />ममतामयी माँओं के आँचल भी सिमट कर रह गए,<br />गुरुदेव ज्ञान और नीति के सागर भी घट कर रह गए,<br /><br />न रघुकुल न रघुकुलनायक, कोई न सिय का हुआ सहायक,<br /><br />मानवता को खो बैठे जब, सभ्य नगर के वासी,<br />तब सीता को हुआ सहायक, वन का इक सन्यासी,<br /><br />उन ऋषि परम उदार का वाल्मीकि शुभ नाम,<br />सीता को आश्रय दिया ले आए निज धाम,<br /><br />रघुकुल में कुलदीप जलाए, राम के दो सुत सिय नें जाए,<br /><br />श्रोतागण, जो एक राजा की पुत्री है, एक राजा की पुत्रवधू है, और एक चक्रवर्ती राजा की पत्नी है, वही महारानी सीता वनवास के दुखों में अपने दिन कैसे काटती है. अपने कुल के गौरव और स्वाभिमान के रक्षा करते हुए, किसी से सहायता मांगे बिना कैसे अपना काम वो स्वयं करती है, स्वयं वन से लकड़ी काटती है, स्वयं अपना धान कूटती है, स्वयं अपनी चक्की पीसती है, और अपनी संतान को स्वावलंबी बनने की शिक्षा कैसे देती है अब उसकी एक करुण झांकी देखिये;<br /><br />जनक दुलारी कुलवधू दशरथजी की,<br />राजरानी होके दिन वन में बिताती है,<br />रहते थे घेरे जिसे दास दासी आठों याम,<br />दासी बनी अपनी उदासी को छिपती है,<br />धरम प्रवीना सती, परम कुलीना,<br />सब विधि दोष हीना जीना दुःख में सिखाती है,<br />जगमाता हरिप्रिया लक्ष्मी स्वरूपा सिया,<br />कूटती है धान, भोज स्वयं बनती है,<br />कठिन कुल्हाडी लेके लकडियाँ काटती है,<br />करम लिखे को पर काट नही पाती है,<br />फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था,<br />दुःख भरे जीवन का बोझ वो उठाती है,<br />अर्धांगिनी रघुवीर की वो धर धीर,<br />भरती है नीर, नीर नैन में न लाती है,<br />जिसकी प्रजा के अपवादों के कुचक्र में वो,<br />पीसती है चाकी स्वाभिमान को बचाती है,<br />पालती है बच्चों को वो कर्म योगिनी की भाँती,<br />स्वाभिमानी, स्वावलंबी, सबल बनाती है,<br />ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुःख देते,<br />निठुर नियति को दया भी नही आती है,<br /><br />उस दुखिया के राज दुलारे, हम ही सुत श्री राम तिहारे,<br />सीता मां की आँख के तारे, लव कुश हैं पितु नाम हमारे,<br />हे पितु, भाग्य हमारे जागे, राम कथा कही राम के आगे.<br /><br />------------------------------------------------------------------------------------पुनि पुनि कितनी हो कही सुनाई, हिय की प्यास बुझत न बुझाई,<br />सीता राम चरित अतिपावन, मधुर सरस अरु अति मनभावन.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-19063179131657366802008-05-31T04:47:00.005+05:302008-05-31T04:55:42.434+05:30कवि सम्मेलन सूचना - ३१ मई सायं ७:३० बजे - मिलीपिटास, कैलिफोर्निया (फ्रीमोंट के निकट)<b><a href=http://www.rana.org/>अधिक जानकारी हेतु यहाँ क्लिक करें.</a> या 510-366-8540 पर कॉल करें.</b><br /><br><br /><a href="http://cities.sulekha.com/eventlistings/images/233301_f.jpg"><img style="float:center; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px;" src="http://cities.sulekha.com/eventlistings/images/233301_f.jpg" border="0" alt="" /></a>अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-10999580731076367872008-05-15T11:52:00.001+05:302008-05-15T12:44:05.132+05:30जयपुरअभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-44575795106526814662008-05-08T05:20:00.001+05:302008-05-08T05:20:00.682+05:30मेरे नगर में आज कल पानी बरसता है बहुत<a href="http://imagecache2.allposters.com/images/pic/PTGPOD/452574~Rain-Squall-and-Acacia-Tree-Kenya-Posters.jpg"><img style="float:center; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px;" src="http://imagecache2.allposters.com/images/pic/PTGPOD/452574~Rain-Squall-and-Acacia-Tree-Kenya-Posters.jpg" border="0" alt="" /></a><br /><br />मेरे नगर में आज कल पानी बरसता है बहुत,<br />सदियों पुराना पेड़ पर प्यासा तरसता है बहुत,<br /><br />रोने की आवाजें मेरे कानों में फिर आने लगीं,<br />नेपाल नंदीग्राम में कोई तो हँसता है बहुत,<br /><br />बहने दे थोडी साँस भी महंगाई के ओ देवता,<br />तू तो गले में डाल कर फंदे को कसता है बहुत,<br /><br />नफरत के सिर पर बैठने का राजशाही पैंतरा,<br />कर तो रहा है काम पर ये नाग डसता है बहुत.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-29841067313957365062008-04-17T03:04:00.003+05:302008-04-17T03:15:48.235+05:30'सावन का महीना' - "होरी खेलें राधा संग नटवर नन्द किशोर"<a href="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/SAZyknw6v_I/AAAAAAAAAgc/-YE69rtADUg/s1600-h/Radha_y_Krishna_1.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/SAZyknw6v_I/AAAAAAAAAgc/-YE69rtADUg/s320/Radha_y_Krishna_1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5189961594066092018" /></a><br /><br />इधर हमको भगवान् श्री कृष्ण की नगरी वृन्दावन जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, बांके बिहारी जी के मन्दिर के बाहर कुछ भजन पुस्तिकाएं प्राप्त हुयीं. उनमें मेरे प्रिय गीत 'सावन का महीना' की तर्ज पर एक भजन भी मिला. वैसे तो फिल्मी गीतों की तर्ज़ पर भजनों में भक्ति भाव का आभाव और प्रदर्शन का आधिक्य होता है, पर ये अच्छा लगा.<br /><br /><br />मूल गीत आप <a href=http://pages.cs.wisc.edu/~navin/india/songs/isongs/0/83_gif.html target="_blank">यहाँ पढ़ सकते हैं.</a><br /> <br /><br />ये रहा वो भजन,<br /><br /><strong>फागुन का महीना केसरिया रंग घोर,<br />होरी खेलें राधा संग नटवर नन्द किशोर,<br /><br />ओढ़ के आई कान्हा नई रे चुन्दरिया,<br />भर पिचकारी मोहे मारो न सांवरिया,<br />भर पिचकारी मारी कर दीन्हीं सरवोर,<br />होरी खेलें राधा संग नटवर नन्द किशोर,<br /><br />उड़त गुलाल श्याम लाल भये बदरा,<br />राधा की आंखन को बिगडो है कजरा,<br />ननद देय मोय तानो घर सास करे शोर,<br />होरी खेलें राधा संग नटवर नन्द किशोर.</strong><br /><br />इसको मूल गीत की तर्ज पर गा कर देखिये.. <br /><br />पुस्तक में इसके रचयिता का नाम नही है, ये लिखा है की "आभार उन सभी भक्तों का जिनके लिखे गीत इसमें शामिल किए गए हैं." अतः हमारी और से भी आभार.<br /><br />चित्र सौजन्य: <a href=http://www.iskcon.com/ target="_blank">ISKCON</a>अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-10114631505756956472008-04-14T06:33:00.000+05:302008-04-14T06:34:09.117+05:30निंदा के दम पर जिंदा'ये कविराज न जाने अपने आप को क्या समझता है,<br />कविता एक भी नही है, बस लाफ्फज़ी कर लो,<br />ऊट पटांग घिसे पिटे चुटकुले,<br />*&%^^ *&^&* ^%$%^$%^ &^%&^%'<br /><br />'ठीक कहते हैं और ये *&^*&$* राधेश्याम भी उसके जाल में फँस गया है,<br />सुनते हैं की इस होली पर पूरा टूर बना रहे हैं,<br />बस इनके लोग ही जायेंगे.'<br /><br />'इनके लोग सब फ्राड हैं, <br />&^%&^%&(%^,<br />मेरा तो खून खौल उठता है,<br />तुमने देखा कैसे साजिश कर के मुझे नीचा दिखाते हुए बुलाया,<br />बस जो अपनी जी हुज़ूरी करे उसको जमाओ बाकी को उखाड़ दो,<br />मैं देखता हूँ की अब मेरे कार्यक्रमों में ये कैसे आता है,'<br /><br />'वैसे एक और बात बताएं, इन लोगों का जाल इधर बाहर भी फ़ैल रहा है,<br />कम्पूटर पर भी बड़ी मार्केटिंग हो रही है,<br />चोर कहीं के, ख़ुद से एक कविता तो लिखी नहीं जाती और हरकतें,<br />मुर्गा, शराब, और भी न जाने क्या क्या,<br />&^%&^%&(^%^& हवाई जहाज से आते जाते हैं, <br />हुंह *^&*^&)*^&^%.'<br /><br />(कविराज का प्रवेश...)<br /><br />'आइये कविराज आइये,<br />चरणों में प्रणाम स्वीकारिये,<br />अभी अभी आप ही की प्रशंसा ही रही थी,'<br /><br />'वाह भाई ये हुई न बात,<br />इधर मैं भी राधेश्याम जी से आपकी स्तुति कर के आ रहा हूँ.'<br /><br />'आज तो आपको सुनकर बहुत बढ़िया लगा, क्या अंदाज़ है आपका,<br />सुन रहे हैं इधर टूर लग रहा है, <br />भूल मत जाइयेगा अपने इस भक्त को.'<br /><br />'अरे कैसी बात करते हैं, आप तो हमारे भाई हैं,<br />आपको कहाँ भूल कर जायेंगे,<br />वैसे टूर तो राधेश्याम करवा रहे हैं उनसे भी बात कर लीजियेगा.'<br /><br />(...कुछ देर तक सन्नाटा, अब कोई बोले भी तो क्या. तभी राधेश्याम जी मंच से संचालन करते हुए कहते हैं,)<br /><br />'माँ वीणावादिनी के चरणों में प्रणाम करते हुए,<br />अब हम कवि सम्मेलन के दूसरे सत्र का प्रारम्भ करते हैं,<br />माँ शारदा के सभी वरद पुत्रों से अनुरोध है की एक बार पुनः,<br />मंच की शोभा बढ़ाने के लिए यहाँ आ जाएँ.'<br /><br />और मंच की शोभा बढ़ा दी जाती है.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-76794454568071679732008-04-13T08:06:00.002+05:302008-04-13T08:07:55.901+05:30वंदे मातरम कविता - युवा कवि सौरभ सुमनमित्रों इधर एक युवा कवि की कवितायेँ सुनने का अवसर मिला. कवि सौरभ सुमन मेरठ में रहते हैं और वीर रस की रचनायें मंच पर पढ़ते हैं. इधर उनकी कविता 'वंदे मातरम' यू ट्यूब पर सुनने को मिली. उस कविता को आप इस पोस्ट के साथ लगे विडियो में सुन सकते हैं.<br /><br /><object width="425" height="355"><param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/aFvUngBsGTY&hl=en"></param><param name="wmode" value="transparent"></param><embed src="http://www.youtube.com/v/aFvUngBsGTY&hl=en" type="application/x-shockwave-flash" wmode="transparent" width="425" height="355"></embed></object><br /><br /><br />ये रहे कविता के शब्द,<br /><br />मजहबी कागजो पे नया शोध देखिये। <br />वन्दे मातरम का होता विरोध देखिये।<br />देखिये जरा ये नई भाषाओ का व्याकरण।<br />भारती के अपने ही बेटो का ये आचरण।<br />वन्दे-मातरम नाही विषय है विवाद का।<br />मजहबी द्वेष का न ओछे उन्माद का।<br />वन्दे-मातरम पे ये कैसा प्रश्न-चिन्ह है।<br />माँ को मान देने मे औलाद कैसे खिन्न है। <br />मात भारती की वंदना है वन्दे-मातरम।<br />बंकिम का स्वप्न कल्पना है वन्दे-मातरम।<br />वन्दे-मातरम एक जलती मशाल है।<br />सारे देश के ही स्वभीमान का सवाल है।<br />आवाहन मंत्र है ये काल के कराल का।<br />आइना है क्रांतिकारी लहरों के उछाल का।<br />वन्दे-मातरम उठा आजादी के साज से।<br />इसीलिए बडा है ये पूजा से नमाज से।<br />भारत की आन-बान-शान वन्दे-मातरम।<br />शहीदों के रक्त की जुबान वन्दे-मातरम।<br />वन्दे-मातरम शोर्य गाथा है भगत की।<br />मात भारती पे मिटने वाली शपथ की।<br />अल्फ्रेड बाग़ की वो खूनी होली देखिये।<br />शेखर के तन पे चली जो गोली देखिये।<br />चीख-चीख रक्त की वो बूंदे हैं पुकारती।<br />वन्दे-मातरम है मा भारती की आरती।<br />वन्दे-मातरम के जो गाने के विरुद्ध हैं।<br />पैदा होने वाली ऐसी नसले अशुद्ध हैं।<br />आबरू वतन की जो आंकते हैं ख़ाक की।<br />कैसे मान लें के वो हैं पीढ़ी अशफाक की।<br />गीता ओ कुरान से न उनको है वास्ता।<br />सत्ता के शिखर का वो गढ़ते हैं रास्ता।<br />हिन्दू धर्म के ना अनुयायी इस्लाम के।<br />बन सके हितैषी वो रहीम के ना राम के।<br />गैरत हुज़ूर कही जाके सो गई है क्या।<br />सत्ता मा की वंदना से बड़ी हो गई है क्या।<br />देश ताज मजहबो के जो वशीभूत हैं।<br />अपराधी हैं वो लोग ओछे हैं कपूत हैं।<br />माथे पे लगा के मा के चरणों की ख़ाक जी।<br />चढ़ गए हैं फंसियो पे लाखो अशफाक जी।<br />वन्दे-मातरम कुर्बानियो का ज्वार है।<br />वन्दे-मातरम जो ना गए वो गद्दार है।<br /><br />इस आशा के साथ की आने वाले समय में उनसे अनेक सार्थक विषयों पर बढ़िया कवितायेँ सुनने को मिलेंगी सौरभ को अनेक शुभकामनाएं.<br /><br /><br />नोट:<br />१. कवि सौरभ सुमन का ब्लॉग <a href=http://www.kavisaurabhsuman.blogspot.com target="_blank">यहाँ क्लिक कर के</a> देखा जा सकता है.<br />२. मुझसे वीर रस के कवियों में, डा हरि ओम पंवार और डा वागीश दिनकर की कवितायेँ विशेष रूप से अच्छी लगती हैं. कमाल की बात है की दोनों मेरठ के ही आस पास के रहने वाले हैं. ऐसा लगता है की मेरठ की भूमि वीर रस के कवियों के लिए काफ़ी उर्वरक है. मेरा जन्म भी मेरठ में हुआ है अतः लगता है की अब कलम को कुछ वीर रस की उत्साहपूर्ण रचनाओं को लिखने के लिए प्रेरित करना चाहिए.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-76666299060312027192008-04-12T05:21:00.001+05:302008-04-12T05:27:11.658+05:30देखिये मज़ेदार चित्रावली और करिये सिएटल की यात्राइधर कुछ दिनों पहले गीत सम्राट श्री राकेश खंडेलवाल हमारे अनुरोध पर सिएटल पधारे थे. उनके सम्मान में <a href="http://ninaaad.blogspot.com/2008/01/blog-post.html" target="_blank">सिएटल में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन</a> किया गया था. उनकी यात्रा को एक चित्रावली के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास नीचे किया है. आप चाहें तो आप भी सिएटल भ्रमण का आनंद इन चित्रों के मध्यम से उठा सकते हैं. <br /><br /><a href="http://picasaweb.google.com/abhinav.test/RakeshjiSeattleTrip/photo?authkey=Rf1G_H2XSds#s5181583762767145218" target="_blank"><strong>चित्रावली देखने हेतु यहाँ क्लिक करें.</strong></a><br /><br />ये बताइयेगा की चित्रों के नीचे लिखे हुए काप्श्न्स कैसे लगे और यदि इनको देखकर सिएटल घूमने का मन बने तो भी सूचित कीजियेगा :)अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-82868834703636541782008-04-11T04:25:00.001+05:302008-04-11T05:07:44.055+05:30कायस्थ है न'हे भगवान्, ये लो गई भैंस पानी में,<br />अब आई आई टी और आई आई एम् में भी आरक्षण होगा.'<br /><br />'हाँ, तो क्या, वहां पहले से ही आरक्षण है,<br />केवल जो पढ़ लिख पाता है उसी को प्रवेश मिलता है,<br />और एस सी, एस टी भी है.'<br /><br />'वो भी ग़लत है, पढ़ाई में कैसा आरक्षण,<br />और अगर देना भी है तो आर्थिक आधार होना चाहिए,<br />जाति के आधार पर आरक्षण, राम राम,<br />एक तरफ़ तो दावा की सब समान हैं और दूसरी ओर ये सब.'<br /><br />'भारत को जानते भी हैं आप,<br />लोहिया को पढिये जाकर, <br />बैठ कर बातें बनाते हैं.'<br /><br />'क्यों लोहिया को पढ़ लूंगा,<br />तो क्या कॉल सेंटर वाले मेरे लड़के को नौकरी दे देंगे,<br />फालतू बात करते हैं,<br />अच्छा ये बताइए की अभी ही कितने आरक्षण वाले पास होकर निकल रहे हैं इनसे,<br />ब्रांड इंडिया की ऐसी तैसी हो जायेगी,<br />ये मुद्दा अबकी चुनाव में उठेगा ज़रूर,<br />तब देखेंगे की आप क्या दलील देते हैं.'<br /><br />'चुनाव में उठायेंगे,<br />हा हा हा हा आपको टिकट कौन पार्टी देने जा रही है,<br />मैडमजी, अटलजी, लालूजी या बहनजी,<br />भाई हमारे देस में जो पिछडे हैं दलित हैं जनजाति वर्ग है,<br />सबको आगे बढ़ने का बराबर हक मिलना चाहिए,<br />ये नही की सब सवर्ण ही कुंडली मार कर बैठ गए.'<br /><br />'ठीक है ठीक है,<br />अब आपसे बहस में थोड़े ही न जीतेंगे,<br />अच्छा छोडिये अपना एक लड़का कल इंटरव्यू दे रहा है,<br />आप ही के कालेज में,<br />ज़रा देख लीजियेगा.'<br /><br />'क्या नाम है,<br />कायस्थ है न.'<br /><br />इस प्रकार एक बार फिर हमारे देश का एक ज्वलंत मुद्दा अपनी परिणति तक,<br />पहुँचता पहुँचता रह गया.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-60919899172218560642008-04-10T09:23:00.000+05:302008-04-10T09:24:23.791+05:30साक्षात्कार - हिंद युग्म के मित्रइधर हमको दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में जाने का अवसर प्राप्त हुआ. वहां हिंद युग्म के मित्रों से मिलने का सुअवसर मिला. हमने 'पहला सुर' खरीदा तथा अपने ऍम पी ३ रिकॉर्डर में उनमें से कुछ महानुभावों के साक्षात्कार भी रेकॉर्ड कर लिए. हम तो औरों के भी करना चाहते थे पर दुकान बंद करने का समय हो चुका था और सुरक्षा विभाग के लोग अपनी सीटी बजाते हुए, डंडा फटकारते हुए 'हिंद युग्म' के स्टाल पर धरना प्रदर्शन करने लगे थे. आवाज़ कुछ बहुत बढ़िया नहीं आई है, कुछ रिकॉर्डर की कमी के कारण और कुछ मेरी अल्पज्ञता के कारण. अतः जो भी जैसा रेकॉर्ड हो सका है उसको आप तक अपने ब्लॉग द्वारा पहुँचने का प्रयास कर रहा हूँ. ये साक्षात्कार तथा कवितायेँ रेडियो सलाम नमस्ते के कवितांजलि कार्यक्रम में प्रसारित हो चुके हैं तथा इनको काफ़ी पसंद भी किया गया है.<br /><br />पहली प्रस्तुति में आप रंजना रंजू जी, निखिल आनंद गिरी जी, सुनीता चोटिया जी, मनीष वंदेमातरम जी तथा शैलेश जी की कवितायेँ सुन सकते हैं.<br /><br /><object width="400" height="20"><param name="movie" value="http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://abhinav.lifelogger.com/media/audio0/695030_prwigargdw_conv.flv&autoStart=false"></param><embed src="http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://abhinav.lifelogger.com/media/audio0/695030_prwigargdw_conv.flv&autoStart=false" type="application/x-shockwave-flash" width="400" height="20"></embed></object><br /><br />और इस दूसरी प्रस्तुति में सुनते हैं की शैलेश भारतवासी जी अपने बारे में क्या क्या रहस्य की बातें बता रहे हैं.<br /><br /><object width="400" height="20"><param name="movie" value="http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://abhinav.lifelogger.com/media/audio0/694223_jqszsbyrof_conv.flv&autoStart=false"></param><embed src="http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://abhinav.lifelogger.com/media/audio0/694223_jqszsbyrof_conv.flv&autoStart=false" type="application/x-shockwave-flash" width="400" height="20"></embed></object><br /><br />पुस्तक मेले में सब लोगों से मिलना एक बड़ा अच्छा अनुभव रहा. बड़ी दूर तक स्मृतियों में अंकित रहेगा.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-25013013057690134942008-04-09T06:06:00.000+05:302008-04-09T06:07:24.293+05:30कमाल हो गया - एक तिब्बतीय संवेदना<a href="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R_sNCqGq7GI/AAAAAAAAAfc/cD5XTl22Qus/s1600-h/tibet.gif"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R_sNCqGq7GI/AAAAAAAAAfc/cD5XTl22Qus/s320/tibet.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5186753735160425570" /></a><br />'ज़रा देखो तो,<br />ये तिब्बत वाले कितना उछल रहे हैं,<br />ज़रा ऊँगली पकडाओ तो पहुँचा पकड़ने के लिए जम्प करने लगते हैं.'<br /><br />'क्यों भाई! तुम्हें पता भी है की चीन नें क्या किया है,<br />या बस यूं ही सुबह सुबह मसाला मुंह में दबाया और चालू हो गए.'<br /><br />'अरे कुछ किया हो चीन नें,<br />हम तो ये जानते हैं की चीन से पंगा लेने का नहीं,<br />वैसे भी कौन सा तिब्बत पर हमारा कब्ज़ा होने जा रहा है,<br />बिना मतलब के बवाल में काहे टांग अटकानी.'<br /><br />'कैसी बात करते हो,<br />ग़लत चीज़ तो ग़लत ही होती है चाहे कोई भी करे.'<br /><br />'हाँ यही तो मैं भी कह रहा हूँ,<br />जैसे तसलीमा को भगाया है,<br />लगता है वैसे ही अब दलाई लामा के जाने का नम्बर आ रहा है,<br />अमाँ ये सब छोडो,<br />ये बताओ पे कमीशन कब लागू करवा रहे हो,<br />पीक बहुत बनती है मसाले में,<br />पुच्च, पुच्च, थू, थू, थू, थू.'<br /><br />और इस प्रकार हमारी पुण्य पावन भारत भूमि का एक और टुकडा लाल हो गया,<br />कमाल हो गया.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-80136466300844235552008-04-08T09:54:00.003+05:302008-04-08T09:59:45.868+05:30महंगाई मार गई<a href="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R_rzgqGq7FI/AAAAAAAAAfU/OsNDXW8gdag/s1600-h/rikshaw.gif"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R_rzgqGq7FI/AAAAAAAAAfU/OsNDXW8gdag/s320/rikshaw.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5186725663254178898" /></a><br />'ऐ रिक्शा!,<br />बड़े बाज़ार चलोगे'<br />'हाँ बाबूजी चलेंगे,<br />क्यों नहीं चलेंगे.'<br />'कितने पैसे.'<br />'दो सवारी के बीस रुपए.'<br />'स्टेशन से बड़े बाज़ार तक के बीस रुपए,<br />लूटोगे क्या भाई,<br />अभी पिछले महीने तक तो पन्द्रह रुपए पड़ते थे,<br />शहर में नया समझा है क्या.'<br />'नया काहे समझेंगे,<br />इधर दाम बढ़ गए हैं,<br />आटा, दाल, चीनी, तेल, सब्जी सबके दाम डबल हो गए हैं,<br />देखिये हर चीज़ में आग लग गई है.'<br />'अरे! तो क्या हमसे निकालोगे सारा पैसा.'<br />'अजी सुनिए, आप क्यों बहस करते हैं,<br />मैं कहती हूँ कि,<br />ऑटो कर लेते हैं,<br />तीस रुपए लेगा लेकिन जल्दी तो पहुँचा देगा.'<br />'अरे ऑटो!<br />इधर आना.'<br />'बैठिये बाबूजी पन्द्रह ही दे दीजियेगा.'<br />'बड़ा ख़राब ज़माना आ गया है.'<br />'मैं कहती थी न, ये लोग ऐसे नही मानते हैं.'<br />'चलो बैठो.'<br />रिक्शा चल पड़ता है,<br />और तभी सड़क पर लगा भोंपू गाना बजाता है,<br />'बाकी कुछ बचा तो, <br />महंगाई मार गई,<br />महंगाई मार गई.'अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-37675995791121915452008-04-07T10:53:00.004+05:302008-04-07T11:10:59.768+05:30शतकीय पोस्ट - एक हास्य कविता - पतलम मंत्रये लीजिये धीरे धीरे कर के हम भी शतकीय क्लब में शामिल हो रहे हैं. आज हमारी सौंवी पोस्ट के रूप में अपनी नई कविता 'पतलम मंत्र' प्रस्तुत कर रहे हैं. <a href=http://www.youtube.com/watch?v=oss7a-Y8znU target="_blank"><strong>मुट्टम मंत्र</strong></a> पढ़ पढ़ कर हमारा वजन नित नई ऊँचाइयाँ तय करने लगा था. उसी को वापस अपनी सीमा में लाने का भाव मन में लिए हुए ये रचना लिखी है.<br /><br /><br /><a href="http://bp2.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R_mv-aGq7EI/AAAAAAAAAfM/-uYdAzjBoEs/s1600-h/fat-thin.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp2.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R_mv-aGq7EI/AAAAAAAAAfM/-uYdAzjBoEs/s320/fat-thin.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5186369932587887682" /></a><br /><br /><br /><strong>पतलम मंत्र</strong><br /><br /><strong>जाएँ जाकर देख लें धर्म ग्रन्थ और वेद,<br />कोई न बतलायेगा मोटापे का भेद,<br />मोटापे का भेद क्या साहब क्या चपरासी,<br />फूली तोंद, मुक्ख पर चर्बी, खूब उबासी,<br />सुधड़ देवियाँ देवों से जब ब्याह रचाएं,<br />दो दिन में मोपेड से ट्रेक्टर बन जाएँ.<br /><br />कद्दू आलू गबदू थुलथुल गैंडे भैंसे,<br />संबोधन सुनने पड़ते हैं कैसे कैसे,<br />कैसे कैसे संबोधन ये मोटा मोटी<br />कहते सूख रही चादर जब धुले लंगोटी,<br />अपमानों को पहचानो अब मेरे दद्दू,<br />मन में ठानो कोई नहीं अब बोले कद्दू.<br /><br />मोटे लोगों का सदा होता है उपहास,<br />दुबले होते ही डबल होता है विश्वास,<br />होता है विश्वास हृदय में अंतर्मन में,<br />आती है वो पैंट जिसे पहना बचपन में,<br />आयु में भी पाँच बरस लगते हैं छोटे,<br />रहते हैं खुश लोग वही जो न हैं मोटे.<br /><br />मोटू लाला ब्याह में गए तो सीना तान,<br />जयमाला को भूल कर ढूंढ रहे पकवान,<br />ढूंढ रहे पकवान वो रबडी भरी कटोरी,<br />नाक कटा कर रख देती है जीभ चटोरी,<br />तभी कैमरा वाले आकर ले गए फोटू,<br />खड़े अकेले खाय रहे हैं लाला मोटू,<br /><br />सोचो ये चर्बी नहीं बल्कि तुम्हारी सास,<br />दूर भगाने हेतु इसको करो प्रयोजन खास,<br />करो प्रयोजन खास लड़ाई की तैयारी,<br />सास बहू में एक ही है सुख की अधिकारी,<br />जीवन गाथा से आलस के पन्ने नोचो,<br />हट जायेगी चर्बी अपने मन में सोचो.<br /><br />जाकर सुबह सवेरे श्री रवि को करो प्रणाम,<br />निस बासर जपते रहो राम देव का नाम,<br />राम देव का नाम बड़े ही प्यारे बाबा,<br />बिना स्वास्थ्य के आख़िर कैसा काशी काबा,<br />प्राणायाम करो हंसकर गाकर मुस्का कर,<br />रोज़ शाम को पति पत्नी संग टेह्लो जाकर.<br /><br />आगे बढ़ती जाएँ ये प्रतिपल बोझ उठाये,<br />इनकी ऐसी स्तिथि अब देखी न जाए,<br />अब देखी न जाए न कुछ भी हमसे मांगें,<br />वजन घटाओ देंगी दुआएं अपनी टाँगें,<br />मान लो यदि कभी जो कुत्ता पीछे भागे,<br />हलके फुल्के रहे तो ये ही होंगी आगे.<br /><br />हम दुबले हो जाएँ तो रिक्शा न घबराए,<br />ऑटो अपनी सीट पे दो की चार बिठाए,<br />दो की चार बिठाए कभी न आफत बोये,<br />सुंदर कन्या चित्र हमारा लेकर सोये,<br />यदि ऐसा हो जाए तो फिर काहे का ग़म,<br />मैराथन भी दौडेंगे चार दिनों में हम.<br /><br />करेंगे अब क्या भला लल्लू लाल सुजान,<br />दुबले हैं हिर्तीक और दुबले शाहरुख़ खान,<br />दुबले शाहरुख़ खान पेट की मसल दिखायें,<br />उसी उमर के चच्चा अपना बदन फुलाएं,<br />वह भी दुबले होकर के रोमांस करेंगे,<br />शर्ट उतारेंगे फिर डिस्को डांस करेंगे.<br /><br />आए फ़ोन से फ़ूड और बैठे बैठे काम,<br />टीवी आगे जीमना क्या होगा अंजाम,<br />क्या होगा अंजाम बात निज लाभ की जानो,<br />देता पतलम मंत्र तुम्हें इसको पहचानो,<br />कह अभिनव कविराय जो इसको मन से गाए,<br />चार दिनों में हेल्थी वेट लिमिट में आए.</strong>अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-22440531142056274962008-03-10T02:26:00.007+05:302008-03-10T02:57:29.641+05:30हास्य कवि सम्मेलन में कविता सुनने कौन जाता है<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R9RRdycDn-I/AAAAAAAAARE/EZvtWDQJKls/s1600-h/mic1.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R9RRdycDn-I/AAAAAAAAARE/EZvtWDQJKls/s320/mic1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5175851443953049570" /></a><br />कुछ साल पहले न्यूयार्क में एक बड़ी संस्था द्वारा एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारत से भी कुछ कवि बुलाए गए। हम तब तक नौकरी के सिलसिले में सिएटल पहुँच चुके थे। आयोजक महोदय नें हमको भी फोन किया तथा कार्यक्रम में भागीदारी करने का निवेदन किया, दो दिन में हवाई टिकट भी हमारे पास पहुँच गए। तो कुल हिसाब ये कि हम भी अपनी टूटी फूटी कविताओं की गठरी लेकर, भारतीय परिधान धारण कर, तीन टाईम ज़ोन पार करते हुए, कवि सम्मेलन के सभागार में पहुँच गए। सभागार में ढेर सारे सजे संवरे सुंदर लोग कविताओं का आनंद लेने आ चुके थे। कवि भी तैयार थे। तभी आयोजक महोदय हमारे पास आए और बोले कि, "भाई अभिनवजी, आप बस लोगों को हंसा दीजिएगा, केवल चुटकुले और हंसी की बातें ही कीजिएगा। कृपया कोई गंभीर रचना मत सुनाईएगा, यहाँ कोई समझेगा नहीं।"<br /><br />हमने उनसे कहा कि, "हम हास्य कविताएँ भी पढ़ेंगे तथा सामयिक गंभीर रचनाएँ भी। अभी मुंबई में ब्लास्ट हुए हैं जिसका सहारा लेकर, हमारे कवि परिवार के रत्न श्री श्याम ज्वालामुखी बैकुण्ठ लोक में श्री हरि को कविता सुनाने के लिए चले गए हैं। मेरी काव्य चेतना मुझे इस आतंकवाद पर कविता पढ़ने को कह रही है। तथा इस विषय पर कविता सुनकर लोग हंसेंगे नहीं, अपितु उनकी मुट्ठियाँ अवश्य भिंच जाएँगी।" खैर, राम जाने कि वे हमारी बात समझे या नहीं, परंतु फिर बढ़िया कवि सम्मेलन हुआ और श्रोताओं की अति उत्तम प्रतिक्रिया आई। <br /><br />इस बात की चर्चा जब मैंने अपने एक अग्रज कवि से करी तो वे बोले कि आयोजक महोदय ठीक ही तो कह रहे थे। हास्य कवि सम्मेलन में कविता सुनने कौन जाता है। उनकी झोली में ऐसे अनेक संस्मरण थे जिसमें उन्हें चाह कर भी अपनी मनपसंद कविता न सुनाते हुए चुटकुले सुनाने के लिए कहा गया था। इधर जब सिनसिनाटी से रेनू गुप्ता जी नें हास्य कवि सम्मेलनों पर आलेख लिखने का अनुरोध किया, तब मन में यह उधेड़बुन चलने लगी कि क्या लिखूँ। एक बार को लगा कि हास्य कवि सम्मेलनों में प्रयोग होने वाले ग्लोबल चुटकुलों की एक लिस्ट तैयार कर दी जाए। पर यह काम अशोक चक्रधर जी अपनी पुस्तक मंच मचान में पहले ही कर चुके हैं। फिर लगा कि शुरू से आज तक के सभी हास्य कवियों की जीवनी लिखी जाए, पर उसमें ध्यान कविता के स्थान पर कवि के जीवन में घटने वाली घटनाओं पर भटक जाता। अतः यह दोनों विचार भविष्य हेतु स्थगित करते हुए हास्य कवि सम्मेलनों के विषय में मेरे जो नितांत व्यक्तिगत विचार हैं उन्हें लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।<br /><br />कविता में हास्य की परंपरा बहुत पुरानी है। रामचरितमानस में अनेक ऐसे प्रसंग हैं जिनको पढ़ते पढ़ते स्वतः ही मुख पर मुस्कान छा जाती है तथा कई जगह तो ये मुस्कान हंसी में भी बदल जाती है। लक्ष्मण परशुराम संवाद हो चाहे अंगद रावण संवाद एक स्मित हास्य का बैकग्राउंड म्यूज़िक बजता ही रहता है। तुलसीदास जी के बाद के अनेक कवियों नें हास्य रचनाएँ लिखीं। गिरिधर कविराय की सहज कुण्डलिया सुनकर आप हंसे बिना नहीं रह सकते। भारतेन्दु के हास्य प्रहसन भी बड़े प्रसिद्ध हुए। यदि हम पिछले तीस चालीस वर्षों की बात करें तो इसमें अनेक हास्य कवियों नें अपनी लेखनी से आनंददायी छटा बिखेरी है।<br /><br />मंचों पर प्रयुक्त होने वाली हास्य टिप्पणियों को अशोक चक्रधर नें अपनी पुस्तक मंच मचान में भली प्रकार से समेटा है. यदि कोई यही एक पुस्तक दो चार बार मन से पढ़ ले तो बिना किसी कविता के भी आधा एक घंटा मंच पर खड़ा होकर बोल सकता है तथा तालियों की गूँज सुन सकता है.<br /><br />कवि सम्मेलनों के मंच पर हास्य रस को प्रतिष्ठित करने में काका हाथरसी का विशेष योगदान रहा है. काका की रचनाओं में जो मासूमियत होती थी वो श्रोताओं को खिलखिलाने पर मजबूर कर देती थी.<br /><br />देवी जी कहने लगीं, कर घूँघट की आड़<br />हमको दिखलाए नहीं, तुमने कभी पहाड़<br />तुमने कभी पहाड़, हाय तकदीर हमारी<br />इससे तो अच्छा, मैं नर होती, तुम नारी<br />कहँ ‘काका’ कविराय, जोश तब हमको आया<br />मानचित्र भारत का लाकर उन्हें दिखाया<br /><br />देखो इसमें ध्यान से, हल हो गया सवाल<br />यह शिमला, यह मसूरी, यह है नैनीताल<br />यह है नैनीताल, कहो घर बैठे-बैठे-<br />दिखला दिए पहाड़, बहादुर हैं हम कैसे ?<br />कहँ ‘काका’ कवि, चाय पिओ औ’ बिस्कुट कुतरो<br />पहाड़ क्या हैं, उतरो, चढ़ो, चढ़ो, फिर उतरो<br /><br />हास्य कविता को कवि सम्मेलनों की लोकप्रियता के एक मापक के रूप में स्थापित किया "चार लाइना" सुना सुना कर, गंभीर मुख मुद्रा धरी सुरेन्द्र शर्मा नें. सुरेन्द्र शर्मा की कवितायेँ बिल्कुल सरल आम बोलचाल की भाषा में राजस्थान की महक समेटे हर ओर हास्य का प्रसार करती रहती है. इधर पिछले कुछ समय से सुरेन्द्र शर्मा अपनी गंभीर रचनायें भी मंच से पढने लगे हैं पर श्रोताओं की इच्छा सदा उनसे उनकी हास्य रचनायें सुनने की ही रही है.<br /><br />कविवर ओमप्रकाश आदित्य जब हास्य को छंद में बंद कर मंच से पढ़ते हैं तो एक अलग अनुभूति होती है, जब अल्हड़ बीकानेरी अपनी सुरीली आवाज़ में हास्य रचना पढ़ते हैं तो वो सीधे दिल में उतर जाती है. माणिक वर्मा के व्यंग, प्रदीप चौबे के रंग, शैल चतुर्वेदी की चलती हुयी आँख, कैलाश गौतम जी की गंवई साख, हुल्लड़ के दुमदार दोहे, सुरेश अवस्थी के बच्चों से संवाद, सुरेन्द्र सुकुमार के वाद विवाद, के पी सक्सेना की ज़बरदस्त कविताई तथा सुरेन्द्र दुबे की कक्षा में पढ़ाई किए बिना हास्य कविता का अध्याय समाप्त नही हो सकता है.<br /><br />इधर इंडियन लाफ्टर चैलेन्ज नमक प्रतियोगिता में भी हमारे कुछ हास्य कवियों नें अपनी प्रतिभा का लोहा सबसे मनवाया है. एहसान कुरैशी, गौरव शर्मा, प्रताप फौजदार नें अपनी चटपटी बातों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है. अशोक चक्रधर नें भी अपने कार्यक्रम वाह वाह के द्वारा कई हास्य कवियों और श्रोताओं के मध्य कड़ी बनने का काम किया है. टिपिकल हैदराबादी, दीपक गुप्ता, मधुमोहिनी उपाध्याय, प्रभा किरण जैन, नीरज पुरी, ओम व्यास समेत अनेक प्रतिभाओं को इस कार्यक्रम में सुनना एक अच्छा अनुभव रहा. <br /><br />युवा पीढ़ी में अनेक अच्छे हास्य कवि अपनी रचनाओं की खुशबू से मंचों को महका रहे हैं. दिल्ली में रहने वाले प्रवीण शुक्ला जब अपनी बोतल में से जिन्न को निकाल कर उससे भ्रष्टाचार दूर करने को कहते हैं तब हास्य और व्यंग की एक सुंदर रचना हमारे सामने आती है. दिल्ली के ही सुनील जोगी जब गा गा कर अपनी हास्य कवितायेँ पढ़ते हैं तो माहौल खुशनुमा हो जाता है. गजेन्द्र सोलंकी (दिल्ली), राजेश चेतन (दिल्ली), रसिक गुप्ता (दिल्ली), सरदार मंजीत सिंह, अरुण जेमिनी (दिल्ली), महेंद्र अजनबी (दिल्ली), दिनेश बावरा (मुम्बई), हरजीत सिंह तुकतुक (मुम्बई), लखनऊ में रहने वाले सर्वेश अस्थाना, सूर्य कुमार पाण्डेय, जमना प्रसाद उपाध्याय (फैजाबाद), महेश दुबे (मुम्बई), राहुल उपाध्याय (सिएटल), देवेन्द्र शुक्ला (कैलिफोर्निया), बिन्देश्वरी अग्रवाल (न्यूयार्क), राकेश खंडेलवाल (वॉशिंगटन डी सी), अर्चना पांडा (फ्रीमोंट), नीरज त्रिपाठी (हैदराबाद), डा आदित्य शुक्ला (बंगलौर), दीपक गुप्ता (फरीदपुर), मधुप पाण्डेय (नागपुर),सुनीता चोटिया (दिल्ली), निखिल आनंद गिरी (दिल्ली) भी बढ़िया हास्य कवितायेँ लिख रहे हैं तथा मंच पर पूरी ठसक के साथ पढ़ रहे हैं. बात चूंकि कवि सम्मेलनों में हास्य रस की रचनाओं की है अतः कुछ नाम जो स्वतः मन में आए लिख दिए हैं. ऐसे अनेक नाम हैं जो मेरी अल्पज्ञता एवं अज्ञान के कारण इस सूची में नहीं हैं परन्तु जो की बहुत श्रेष्ठ और सच्चे हास्य कवि हैं. <br /><br />यह कवि की ज़िम्मेदारी है कि वह किस प्रकार श्रोताओं के मानस में प्रवेश करे और आनंद सागर में सबको गोते लगवाए. लेख के अंत में उस नए हास्य कवि कि कुछ पंक्तियाँ प्रेषित कर रहा हूँ जिसने ये लेख लिखा है.<br /><br />लेना हो जो बूँद बूँद स्वाद तुम्हें भोजन का,<br />भिंडी तन्तु दांत में भी फँसना ज़रूरी है,<br />इंटरनेट पे ही हुए प्रेमियों के फंदे फिट, <br />प्रेमिका कि गली में क्या बसना ज़रूरी है,<br />नीचे को सरकती हो बार बार पतलून, <br />नाड़ा हो पाजामे में तो कसना ज़रूरी है,<br />अभिनव शुक्ल कहें रक्त के बढ़ाने हेतु, <br />दिल खोल आदमी का हँसना ज़रूरी है,<br />---------------------------------------------<br />कवि सम्मेलन से संबंधित कुछ जालघरों के पते;<br />१. <a href=http://www.hasyakavisammelan.com/ target="_blank">hasyakavisammelan.com</a><br />२. <a href=http://www.kavisammelan.org/ target="_blank">kavisammelan.org</a><br />३. <a href=http://www.kavisangam.com/ target="_blank">kavisangam.com</a><br />४. <a href=http://www.kaviabhinav.com/ target="_blank">kaviabhinav.com</a>अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-58227872649385238782008-03-06T13:13:00.002+05:302008-03-06T13:15:29.133+05:30लातूर महाराष्ट्र में ही है नमुझे याद है,<br />जब लातूर में भूकंप आया था,<br />हम बिहार में रहते थे,<br />माँ नें उस दिन खाना नही बनाया था,<br />पिताजी नें एक महीने की तनख्वाह,<br />राहत कार्यों हेतु प्रदान करी थी,<br />मैंने ख़ुद दोस्तों के साथ,<br />दुकान दुकान जा कर इकठ्ठा किए थे पैसे,<br />मेरे घर में ही कहर टूटा हो जैसे,<br />और आज मैं मुम्बई के प्लेटफार्म पर,<br />पिटा हुआ पड़ा हूँ,<br />किसलिए,<br />ये मत सोचियेगा की एहसान गिना रहा हूँ,<br />मैं तो दुखी हूँ उनसे,<br />जो अपने को शिवाजी का रिश्तेदार बताते हैं,<br />मेरी संस्कृति पर अधिकार जताते हैं,<br />मैं पिट गया,<br />कोई बात नही,<br />घर पर भी जब कभी,<br />छोटे भाई से झगड़ता हूँ,<br />पिताजी पीट ही देते हैं,<br />दो दिन में वो मार भूल भी जाता हूँ,<br />धीरे धीरे शरीर के ज़ख्म भर जायेंगे,<br />ये मार भी भूल जाऊँगा,<br />लेकिन इस बार तो मैंने किसी से कोई झगडा नही किया,<br />फिर भी, <br />आख़िर क्यों? <br />वैसे लातूर महाराष्ट्र में ही है न.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-77793887748458534262008-02-20T08:21:00.002+05:302008-02-20T08:28:44.736+05:30बैंगलूरू काव्य गोष्ठी समाचार<a href="http://bp2.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R7uWUWjkXlI/AAAAAAAAAQI/X73_tlR3h14/s1600-h/NEWS1.JPG"><img style="float:center; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp2.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R7uWUWjkXlI/AAAAAAAAAQI/X73_tlR3h14/s320/NEWS1.JPG" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5168890273734090322" /></a>अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-16027855725706980572008-01-21T07:24:00.000+05:302008-01-21T07:26:43.753+05:30एक और संबोधन गीतराकेश खंडेलवाल जी का <a href="http://geetkalash.blogspot.com/2008/01/blog-post_18.html" target="_blank">"सम्बोधन पर आकर अटकी"</a> गीत पढने के बाद हमने भी एक पत्र लिखने का प्रयास किया और बात संबोधन पर अटक गई.. आप भी सुन लीजिये,<br /><br />कलम उठाई लिखने बैठा पत्र तुम्हे में पूरे मन से,<br />सोच रहा हूँ शुरू करूं इसको आख़िर किस संबोधन से,<br /><br />लिखूं क्षुब्ध अरमानों की अर्थी पर बिखरे फूलों वाली,<br />या अभिमानों को भर कर अपमानित करती भूलों वाली,<br />घन घमंड परिपूर्ण नित्य रहती जो लड़ने को आतुर,<br />सुरसा लिखूं या लिखूं हिडिम्बा खतरनाक शूलों वाली,<br /><br />मैंने निर्मल प्रेम दिया था तुमको पावन गंगा सा,<br />भावों की संचित पूँजी को तौल रही काग़ज़ के धन से,<br />कलम उठाई लिखने बैठा पत्र तुम्हे में पूरे मन से,<br />सोच रहा हूँ शुरू करूं इसको आख़िर किस संबोधन से,<br /><br />कहूं मैं गीतों का विराम या ह्रदय भेदती फाँस कोई,<br />न निगली न उगली जाती कंठ में अटकी साँस कोई,<br />पग पग पर पीड़ा देने का जिसने हो संकल्प लिया,<br />या सम्मुख इस जग के चलता सस्ता सा उपहास कोई,<br /><br />तुमको कह सकता हूँ अपनी धैर्य परीक्षा का साधन,<br />जिसमें बस कांटे उगते हों उपमा दूँ या उस उपवन से,<br />कलम उठाई लिखने बैठा पत्र तुम्हे में पूरे मन से,<br />सोच रहा हूँ शुरू करूं इसको आख़िर किस संबोधन से,अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-75820943395931198522008-01-14T09:41:00.000+05:302008-01-14T09:42:35.695+05:30अथ श्री राले कवि सम्मेलन कथासमाचार <a href=http://hinditoolbar.googlepages.com/garbhanal target="_blank">गर्भनाल के जनवरी २००८ अंक</a> में आए हैं, कुछ ऑडियो आप यहाँ सुन सकते हैं तथा कुछ चित्र भी यहाँ देख सकते हैं.<br /><br /><table border="0" cellpadding="4" cellspacing="0" style=" background-color: #eee ;border-color: #cccccc; color:#000 ; font-family:Arial, Helvetica, sans-serif; font-size:11px; padding:0px; border-width:1px; border-style:solid"><tr><td align="center"><embed quality="high" pluginspage="http://www.macromedia.com/go/getflashplayer" type="application/x-shockwave-flash" width="100" height="100" src="http://res0.esnips.com/escentral/images/widgets/flash/record.swf" flashvars="theUrl=http://www.esnips.com/doc/bf3da6de-2904-4802-a327-2b6ef57643b6/sudha-dhingra-kavya-path/?widget=flash_record"></embed></td></tr><tr><td style="font-size:11px;" valign="bottom" align="center"><a href="http://www.esnips.com/doc/bf3da6de-2904-4802-a327-2b6ef57643b6/sudha-dhingra-kavya-path/?widget=flash_record">sudha-dhingra-kavy...</a></td></tr></table><br />सुधा जी के काव्य पाठ के कुछ अंश <br /><br /><table border="0" cellpadding="4" cellspacing="0" style=" background-color: #eee ;border-color: #cccccc; color:#000 ; font-family:Arial, Helvetica, sans-serif; font-size:11px; padding:0px; border-width:1px; border-style:solid"><tr><td align="center"><embed quality="high" pluginspage="http://www.macromedia.com/go/getflashplayer" type="application/x-shockwave-flash" width="100" height="100" src="http://res0.esnips.com/escentral/images/widgets/flash/mp3player.swf" flashvars="theUrl=http://www.esnips.com/doc/0c226a41-bf7b-4469-8b9b-bd7d20ce28f4/rakesh-khandelwal-kavya-path/?widget=flash_mp3player"></embed></td></tr><tr><td style="font-size:11px;" valign="bottom" align="center"><a href="http://www.esnips.com/doc/0c226a41-bf7b-4469-8b9b-bd7d20ce28f4/rakesh-khandelwal-kavya-path/?widget=flash_mp3player">rakesh-khandelwal-...</a></td></tr></table><br />राकेश जी के काव्य पाठ के कुछ अंश <br /><br /><table border="0" cellpadding="4" cellspacing="0" style=" background-color: #eee ;border-color: #cccccc; color:#000 ; font-family:Arial, Helvetica, sans-serif; font-size:11px; padding:0px; border-width:1px; border-style:solid"><tr><td align="center"><embed quality="high" pluginspage="http://www.macromedia.com/go/getflashplayer" type="application/x-shockwave-flash" width="100" height="100" src="http://res0.esnips.com/escentral/images/widgets/flash/equalizer.swf" flashvars="theUrl=http://www.esnips.com/doc/fc6dd203-d283-4b49-974a-c51255497000/rajni-bhargava-kavya-path/?widget=flash_equalizer"></embed></td></tr><tr><td style="font-size:11px;" valign="bottom" align="center"><a href="http://www.esnips.com/doc/fc6dd203-d283-4b49-974a-c51255497000/rajni-bhargava-kavya-path/?widget=flash_equalizer">rajni-bhargava-kav...</a></td></tr></table><br />रजनी जी के काव्य पाठ के कुछ अंश <br /><br /><table border="0" cellpadding="4" cellspacing="0" style=" background-color: #eee ;border-color: #cccccc; color:#000 ; font-family:Arial, Helvetica, sans-serif; font-size:11px; padding:0px; border-width:1px; border-style:solid"><tr><td align="center"><embed quality="high" pluginspage="http://www.macromedia.com/go/getflashplayer" type="application/x-shockwave-flash" width="100" height="100" src="http://res0.esnips.com/escentral/images/widgets/flash/singing.swf" flashvars="theUrl=http://www.esnips.com/doc/0486b36f-8ca0-48e0-9c37-2128645a5092/narender-tandon-kavya-path/?widget=flash_singing"></embed></td></tr><tr><td style="font-size:11px;" valign="bottom" align="center"><a href="http://www.esnips.com/doc/0486b36f-8ca0-48e0-9c37-2128645a5092/narender-tandon-kavya-path/?widget=flash_singing">narender-tandon-ka...</a></td></tr></table><br />नरेन्द्र जी के काव्य पाठ के कुछ अंश <br /><br /><table border="0" cellpadding="4" cellspacing="0" style=" background-color: #eee ;border-color: #cccccc; color:#000 ; font-family:Arial, Helvetica, sans-serif; font-size:11px; padding:0px; border-width:1px; border-style:solid"><tr><td align="center"><embed quality="high" pluginspage="http://www.macromedia.com/go/getflashplayer" type="application/x-shockwave-flash" width="100" height="100" src="http://res0.esnips.com/escentral/images/widgets/flash/turning.swf" flashvars="theUrl=http://www.esnips.com/doc/87e081b4-64a5-4a15-9d77-f72f0353a380/anoop-bhargava-kavya-path/?widget=flash_turning"></embed></td></tr><tr><td style="font-size:11px;" valign="bottom" align="center"><a href="http://www.esnips.com/doc/87e081b4-64a5-4a15-9d77-f72f0353a380/anoop-bhargava-kavya-path/?widget=flash_turning">anoop-bhargava-kav...</a></td></tr></table><br />अनूप जी के काव्य पाठ के कुछ अंश <br /><br /><table border="0" cellpadding="4" cellspacing="0" style=" background-color: #eee ;border-color: #cccccc; color:#000 ; font-family:Arial, Helvetica, sans-serif; font-size:11px; padding:0px; border-width:1px; border-style:solid"><tr><td align="center"><embed quality="high" pluginspage="http://www.macromedia.com/go/getflashplayer" type="application/x-shockwave-flash" width="100" height="100" src="http://res0.esnips.com/escentral/images/widgets/flash/radio.swf" flashvars="theUrl=http://www.esnips.com/doc/3a8169bb-7b7c-4a2b-b6c9-c02de63d7cad/Raleigh-Dec-2007-Kavi-Sammelan/?widget=flash_radio"></embed></td></tr><tr><td style="font-size:11px;" valign="bottom" align="center"><a href="http://www.esnips.com/doc/3a8169bb-7b7c-4a2b-b6c9-c02de63d7cad/Raleigh-Dec-2007-Kavi-Sammelan/?widget=flash_radio">Raleigh-Dec-2007 K...</a></td></tr></table><br />अभिनव के काव्य पाठ के कुछ अंश <br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6Z5rX6UI/AAAAAAAAAOA/hGFqDhDXEG8/s1600-h/IMG_0925.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6Z5rX6UI/AAAAAAAAAOA/hGFqDhDXEG8/s320/IMG_0925.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096984040040770" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6aJrX6VI/AAAAAAAAAOI/NHHM3QlR9mk/s1600-h/IMG_0921.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6aJrX6VI/AAAAAAAAAOI/NHHM3QlR9mk/s320/IMG_0921.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096988335008082" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6aJrX6WI/AAAAAAAAAOQ/VvkcGM1MliI/s1600-h/IMG_0912.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6aJrX6WI/AAAAAAAAAOQ/VvkcGM1MliI/s320/IMG_0912.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096988335008098" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6aZrX6XI/AAAAAAAAAOY/_RmMlbRHOKQ/s1600-h/IMG_0911.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6aZrX6XI/AAAAAAAAAOY/_RmMlbRHOKQ/s320/IMG_0911.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096992629975410" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6aZrX6YI/AAAAAAAAAOg/dc7tONkz6rY/s1600-h/IMG_0910.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6aZrX6YI/AAAAAAAAAOg/dc7tONkz6rY/s320/IMG_0910.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096992629975426" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6L5rX6PI/AAAAAAAAANY/iNRuRIUUShM/s1600-h/IMG_0885.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6L5rX6PI/AAAAAAAAANY/iNRuRIUUShM/s320/IMG_0885.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096743521872114" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6L5rX6QI/AAAAAAAAANg/y5AxlycoXJA/s1600-h/IMG_0887.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6L5rX6QI/AAAAAAAAANg/y5AxlycoXJA/s320/IMG_0887.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096743521872130" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6MJrX6RI/AAAAAAAAANo/BDWcm06YrcA/s1600-h/IMG_0888.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6MJrX6RI/AAAAAAAAANo/BDWcm06YrcA/s320/IMG_0888.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096747816839442" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6MZrX6TI/AAAAAAAAAN4/QzM9vd9_Vx4/s1600-h/IMG_0908.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N6MZrX6TI/AAAAAAAAAN4/QzM9vd9_Vx4/s320/IMG_0908.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096752111806770" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57JrX6KI/AAAAAAAAAMw/MdzbPoB2Zy8/s1600-h/IMG_0853.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57JrX6KI/AAAAAAAAAMw/MdzbPoB2Zy8/s320/IMG_0853.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096455759063202" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57JrX6LI/AAAAAAAAAM4/iK9grdYFw20/s1600-h/IMG_0857.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57JrX6LI/AAAAAAAAAM4/iK9grdYFw20/s320/IMG_0857.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096455759063218" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57ZrX6MI/AAAAAAAAANA/wIKnBxMnaM4/s1600-h/IMG_0876.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57ZrX6MI/AAAAAAAAANA/wIKnBxMnaM4/s320/IMG_0876.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096460054030530" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57ZrX6NI/AAAAAAAAANI/sxTSpPWDghU/s1600-h/IMG_0878.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57ZrX6NI/AAAAAAAAANI/sxTSpPWDghU/s320/IMG_0878.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096460054030546" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp2.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57prX6OI/AAAAAAAAANQ/akXhh4v14DM/s1600-h/IMG_0882.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp2.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R4N57prX6OI/AAAAAAAAANQ/akXhh4v14DM/s320/IMG_0882.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5153096464348997858" /></a>अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-49194704179670125882008-01-07T01:34:00.000+05:302008-01-07T01:35:08.548+05:30राकेश खंडेलवाल जी तथा सिएटल काव्य गोष्ठीनमस्कार,<br /><br />सुप्रसिद्ध गीतकार कवि श्री राकेश खंडेलवाल जी नें सिएटल नगरी को अपने सुमधुर गीतों से महकने का हमारा सविनय निवेदन स्वीकार कर लिया है. वे १२ जनवरी के दिन सिएटल में होंगे. इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. आप सादर आमंत्रित हैं.<br /><br />तिथि: १२ जनवरी २००८<br />समय : दोपहर २ बजे से शाम ६ बजे तक (पैसेफिक समयानुसार)<br />स्थान: 1000, 8th Ave, Apt#1-0607, Seattle, WA - 98104 (अभिनव का निवास)<br />दूरभाष: २०६-६९४-३३५३<br /><br />नोट:<br />१. यदि आप इस कार्यक्रम को लाइव सुनना चाहते हैं तो कार्यक्रम के समय गूगल टाक पर लोग इन कर "kaviabhinav@gmail.com" को कॉल कर सकते हैं.<br />२. राकेश जी के कुछ गीत नीचे दिए हुए लिंक्स पर पढे जा सकते हैं.<br /><br />http://www.geetkalash.blogspot.com/<br />http://www.anubhuti-hindi.org/dishantar/r/rakesh_khandelwal/index.htm<br />--------------------------------------------------------------------------------------------------<br /><br />Hi,<br /><br />Famous poet, Shri Rakesh Khandelwal has accepted our humble invitation of mesmerizing Seattle with his poetic gems. He will be in Seattle on 12-Jan-2008. We are organizing a kavya gosthi on this occasion and would like to invite you for the same.<br /><br />Date: 01/12/2008<br />Time: 2:00-6:00 pm (PST)<br />Venue: 1000, 8th Ave, Apt#1-0607, Seattle, WA - 98104 (Abhinav's Place)<br />Phone: 206-694-3353<br /><br />To listen this Program live, please call "kaviabhinav@gmail.com" using google talk.<br /><br />You can read some of his beautiful compositions at the links below,<br />http://www.geetkalash.blogspot.com/<br />http://www.anubhuti-hindi.org/dishantar/r/rakesh_khandelwal/index.htm<br /> <br /><br />_______________________<br />Abhinav Shukla<br />206-694-3353 | www.kaviabhinav.comअभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-77370775083894556912007-12-31T13:03:00.000+05:302007-12-31T13:12:39.554+05:30२००८ - प्लेटफार्म पर आने वाला है<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R3ic0JrX6JI/AAAAAAAAAMo/Iq7dKpFXhuo/s1600-h/NY-2008.jpg"><img style="float:center; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp1.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R3ic0JrX6JI/AAAAAAAAAMo/Iq7dKpFXhuo/s320/NY-2008.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5150038593663133842" /></a><br /><br /><br /><br />जाने वाला वर्ष सुनहरी स्मृतियाँ स्पर्श करे,<br />सबके मन में नई चेतना आने वाला वर्ष भरे,<br /><br />वर्ष नया क्या सिर्फ कलैण्डर की तारीख नई सी है,<br />या जीवन के प्लेटफार्म से कोई रेल गई सी है,<br />कितने मित्र राह में चलते हुए नित्य बन जाते हैं,<br />उनमें से कितने ही तो सुख दुख में साथ निभाते हैं,<br />किंतु मित्रता की परिभाषा में परिवर्तन देखा है,<br />दूरी को कम ज़्यादा करती कोई नियति रेखा है,<br />मेरी अभिलाषा है जितने लोग दूर जा बैठे हैं,<br />मैं उन सबके पास कहीं जाऊँ जाकर के मुस्काऊँ,<br />और कहूँ नववर्ष तुम्हारे जीवन का उत्कर्ष करे,<br />सबके मन में नई चेतना आने वाला वर्ष भरे,<br /><br />सात के साथ ज़रा देखो तो कितने साथी छूट गए,<br />कितने रिश्ते नए बने और कितने रिश्ते टूट गए,<br />माता सरस्वती नें अपने प्रिय पुत्र को मांग लिया,<br />श्री बृजेन्द्र अवस्थी के संग एक युग नें प्रस्थान किया,<br />जिनकी वाणी से पाए थे भजनों नें आयाम नए,<br />श्री हरि ओम शरण भी अंतर्ध्यान राम के धाम गए,<br />आदर्शों की कथा में अनुपम पृष्ठ जोड़ कर चले गए,<br />कमलेश्वर, त्रिलोचन, निर्मल कलम तोड़ कर चले गए,<br />जगमग जगमग गए हैं सूरज कई धरा के आंगन से,<br />आठ में गहरे अंधकार से जग मिलकर संघर्ष करे,<br />सबके मन में नई चेतना आने वाला वर्ष भरे,<br /><br />गली गली में सजती दिखती अपराधों की झाँकी है,<br />आतंकी आंधी की जड़ में कितनी ताकत बाकी है,<br />नफरत के, कटुता के हामी कितने ऊँचे पर पर हैं,<br />कितने अणुबम लगे हुए न जाने किस सरहद पर हैं,<br />दिल रोता है जब नगरों में रोज़ धमाके होते हैं,<br />और धमाकों पर घर में ही खूब ठहाके होते हैं,<br />बिके हुए टीवी चैनल ख़बरों के दाम लगाते हैं,<br />और इलाके के गुण्डे सत्ता के जाम लगाते हैं,<br />ऐसे में जब कद के मापक बस विलास हो बैठे हैं,<br />जिन पथराई आंखों के सपने उदास हो बैठे हैं,<br />उन आंखों में भी सच्चाई का थोड़ा सा हर्ष भरे,<br />सबके मन में नई चेतना आने वाला वर्ष भरे।अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-82106555714482811412007-12-29T06:55:00.000+05:302007-12-29T09:08:16.857+05:30एक और बम ब्लास्ट<a href="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R3Wi7ZrX6II/AAAAAAAAAMg/FzO0wzs4gY4/s1600-h/test-p.jpg"><img style="float:right; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R3Wi7ZrX6II/AAAAAAAAAMg/FzO0wzs4gY4/s320/test-p.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5149200890356820098" /></a><br /><br />नज़ीर का अर्थ होता है बराबर,<br />बेनज़ीर का मतलब हुआ जिसकी कोई बराबरी न कर सके,<br />जब उसके जाने की ख़बर सुनी तो दुःख हुआ,<br />ऐसा नही था की उसके होने या न होने से मुझे कोई फर्क पड़ता है,<br />फर्क तो पाकिस्तान को भी नही पड़ता है,<br />थोडी देर हाय हाय के नारे लगा कर थक जायेंगे, <br />दो चार दिन उछल कूद कर सब बैठ जायेंगे,<br />और तलाश करने लगेंगे किसी दूसरी बेनज़ीर में,<br />किसी शिया को, किसी सिन्धी को, या किसी मुहाजिर को,<br />क्या अचरज की कभी पाकिस्तान हमारे भारत का हिस्सा था,<br />इंसान में जाति धर्म क्षेत्र ढूँढने में कोई हमारी बराबरी कर सकता है क्या,<br />खैर, प्रतियोगिता परीक्षा हेतु एक नया प्रश्न तैयार हो गया है,<br />वाद विवाद को एक और विषय,<br />फिर,<br />एक और बम ब्लास्ट.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-53251935990852777342007-12-07T22:49:00.000+05:302007-12-08T00:48:25.616+05:30पारले-जी का पैकेटजब मैं छोटा था,<br />तो घर पर पारले-जी का पैकेट आता था,<br />उसमें बारह बिस्कुट होते थे,<br />माँ, मुझे और मेरे छोटे भाई को,<br />चार चार बिस्कुट देती थी,<br />फिर जब हम जिद करते तो बाकी के दो दो भी मिल जाते थे,<br />उनको चाय में डुबो डुबो कर खाने में स्वर्ग का आनंद आता था,<br />अब में बड़ा हो गया हूँ,<br />मैं अपने माता पिता के साथ नही रहता हूँ,<br />अब मेरा भाई और मैं अलग अलग रहते हैं,<br />मेरी पत्नी को पारले जी पसंद नही हैं,<br />अब में सिएटल के इंडिया स्टोर से एक सौ बिस्कुट वाला पारले जी का पैकेट लाता हूँ,<br />पर वो स्वाद नही पा पता हूँ,<br />मैं उनमें स्वाद ढूँढने की कोशिश करता हूँ,<br />पर हार जाता हूँ,<br />शायद स्वर्ग बिस्कुट में नहीं,<br />किसी और चीज़ में ही होता था.<br /><br />जब में छोटा था,<br />तब मेरे माता पिता,<br />दो कमरों के छोटे से घर में रहते थे,<br />आपस में बातें करते थे,<br />"देखो, तिवारीजी का लड़का,<br />इंजिनीयर बन कर अमेरिका चला गया है,<br />राजाजीपुरम मैं क्या बढ़िया घर बनवा रहे हैं,<br />हमारा शेर क्या कुछ कमाल दिखा पायेगा,<br />क्या अमेरिका जा पायेगा,<br />हमारे लिए स्वर्ग ला पायेगा."<br />आज वो सात कमरों के अपने घर में अकेले हैं,<br />फ़ोन के उस पार से आने वाली आवाजों में ही उनके मेले हैं,<br />बच्चे पहले रोज़ फ़ोन करते थे,<br />फिर दो तीन दिन में एक बार करने लगे,<br />अब सप्ताह में एक बार करते हैं,<br />कल महीने में एक बार करेंगे,<br />माँ जब परले जी का पैकेट देखती होगी,<br />तो सोचती होगी,<br />शायद स्वर्ग किसी और चीज़ में ही होता था.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-91237264804566954162007-12-06T15:03:00.000+05:302007-12-06T15:10:12.049+05:30६ दिसंबर - बाबर को नहीं देखा है मैंने<a href="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R1fClJ3GbTI/AAAAAAAAAMY/jRYqvBp5U8c/s1600-h/rammandir.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp3.blogger.com/_L9XARY0Hqns/R1fClJ3GbTI/AAAAAAAAAMY/jRYqvBp5U8c/s320/rammandir.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5140791443224685874" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><strong><br />उलझा हुआ हूँ वक्त के बोझिल सवाल में,<br />पत्थर निकल रहे हैं बहुत आज दाल में,<br /><br />गिद्धों को उसने टीम का सरदार कर दिया,<br />लो फंस गई भोली सी चिरइया भी जाल में,<br /><br />बाबर को नहीं देखा है मैंने कभी मगर,<br />मस्जिद ज़रूर देखी है इक ख़स्ता हाल में,<br /><br />मुद्दत से कह रहे हैं जो मंदिर बनाएँगे,<br />उनसे सड़क न एक बनी पाँच साल में।</strong>