tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1160127409416328462006-10-06T15:06:00.000+05:302006-10-06T15:06:00.000+05:30बाणभट्ट की आत्मकथा का मूल दर्शन अथवा सार तत्व है :...बाणभट्ट की आत्मकथा का मूल दर्शन अथवा सार तत्व है : जीवन जीने के किए है . प्रेम जिस रूप में भी आये उसका बाहें फ़ैला कर स्वागत होना चाहिए . कितना भी अभावमय और संघर्षमय क्यों न हो, जीवन है तो उसे बेहतर बनाने की संभावनाएं भी हैं.प्रियंकरhttp://anahadnaad.wordpress.comnoreply@blogger.com