tag:blogger.com,1999:blog-21658146.post-1149089964002859392006-05-31T21:09:00.000+05:302006-05-31T21:09:00.000+05:30आरक्षण के विरोध ने कम से कम विरोधियों को भी कुछ सो...आरक्षण के विरोध ने कम से कम विरोधियों को भी कुछ सोचने पर मज़बूर ज़रूर किया है कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं. आपने तो आरक्षण से जुड़े सभी समाचारों को एक माला में पिरो दिया. वैचारिक स्तर पर इस तरह की साम्यता पर मैं प्रसन्न हूं. इधर, परिचर्चा में 'हुसैन की पेंटिंग' और 'आमिर खान की फ़ना' पर उठे विवादों पर चर्चा छिड़ी थी. आपकी कमी खली. मैंने अपने विवेक से उठे सवालों के जवाब देने की भरसक कोशिश की.Neerajhttp://www.blogger.com/profile/14728892885258578957noreply@blogger.com