tag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1134650128241964502005-12-15T04:34:00.000-08:002005-12-15T04:35:28.250-08:00मदिरालयआज बदला सा था माहौल मदिरालय का,<br />हवा मे निशान था विचित्र प्रलय का,<br />दर्द था लावारीस, हर पग प्रणव आलय था,<br />आज मेला जीने वालो का था,<br />दिवस पीने वालो का था,<br />लोक आनन्द समाहित हर घूँट, नशा बाकी न था,<br /> आज कर लिया मदिरापान साकी ने थाkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.com