tag:blogger.com,1999:blog-18436534.post-14379552524072916322007-03-15T19:50:00.000+05:302007-03-15T19:50:00.000+05:30यही तो मेरा असली रूप है.जिसे आप रीयल जिन्दगी कहते ...<B>यही तो मेरा असली रूप है.</B><BR/>जिसे आप रीयल जिन्दगी कहते हैं, उसमे मुझे न चाहते हुये भी लोगों को अच्छा अच्छा बोलना पड़ता है. सोचना होता है कि लोग क्या कहेंगे. एक मुस्कुराहट का मुखौटा ओढ़ना पड़ता है. वो मेरा असली रूप नहीं है. <BR/>लेकिन धुरविरोधी बिना मेरे नाम का मुखौटा ओड़े हुये मेरा असली रूप है. यह मेरा वह रूप है, जैसा मैं हूं. मेरे असली नाम के मुखौटे को उतार कर मैं एकदम आज़ाद हो जाता हूं, बिल्कुल मसिजीवी की तरह.<BR/>इस दौरान हमारी आपस में असहमतियां या सहमतियां हो सकती हैं. संजयजी, मेरे प्रलाप में तर्क भी हैं और हिम्मत भी. क्या हम असहमति एवं सहमति दोनों के बीच में नहीं जी सकते?<BR/>मुझे तो अब नकली और पाखंड दूर यह दुनियां ही पसंद है.<BR/>धुरविरोधीdhurvirodhihttp://www.blogger.com/profile/14333651535802973230noreply@blogger.com