tag:blogger.com,1999:blog-1791661064823014117.post-58826638097404042212007-10-02T12:01:00.000-07:002007-10-02T12:01:00.000-07:00मैंला आंचल और अपना अंचल आपमें गहरे तक धंसा है।... ...मैंला आंचल और अपना अंचल आपमें गहरे तक धंसा है।... लाइव खबरें जहां चूक जाती है संवेदना पैदा करने में वो काम आपकी ये कविता कर -जाती है। मिजाज बदलने के लिए शुक्रिया।विनीत कुमारhttp://www.blogger.com/profile/09398848720758429099noreply@blogger.com