tag:blogger.com,1999:blog-1791661064823014117.post-54902470304980197642007-10-02T20:29:00.000-07:002007-10-02T20:29:00.000-07:00अबकी अगहन में हजारी सोलह की हो जाती...हजारी की व्य...अबकी अगहन में हजारी सोलह की हो जाती...<BR/>हजारी की व्यथा-कथा बड़ी कारुणिक है। लेकिन वाकई मेरी समझ में नहीं आता कि हम में से कुछ नौजवान ऐसी जघन्यता पर कैसे उतर आते हैं। हर कोई तो दहेज को गरियाता रहता है। फिर जिंदगी में इसे उतारता क्यों नहीं? जीवन की असुरक्षा ने क्या उसे इतना निर्दयी बना दिया है?अनिल रघुराजhttp://www.blogger.com/profile/07237219200717715047noreply@blogger.com