tag:blogger.com,1999:blog-1791661064823014117.post-46467191669657950072007-10-25T00:06:00.000-07:002007-10-25T00:06:00.000-07:00मित्रोंअच्छा लगा कि आपको ये संस्मरण लगा. दोस्त वैस...मित्रों<BR/><BR/>अच्छा लगा कि आपको ये संस्मरण लगा. दोस्त वैसे तो हम सारे शहरी बाबू हो गए हैं लेकिन गांव जाने पर एक-एक चीज़ लगता है कि बुला कर कुछ कह रही है. शोध-वोध की दुनिया का जीव हूं तो मुझे तो हर चीज़ और प्रतीक जो गांव में दिखती है, शोध के लायक़ माकूल जान पड़ता है. अच्छा लगता है जब आप जैसे मित्र हौसलाअफ़जाई करते हैं तब. और तो और गांव-जवार से निकलने वाले अख़बार भी नहीं लिखते हैं अब इन चीज़ों के बारे में. मुझे अच्छा लगता है ये लिखना. कोशिश करूंगा कि निरंतरता बनी रहे.<BR/><BR/>शुक्रियाराकेशhttp://www.blogger.com/profile/09355343165726493984noreply@blogger.com