tag:blogger.com,1999:blog-1791661064823014117.post-89647656142746801812007-10-29T20:20:00.000-07:002007-10-29T20:20:00.000-07:00शुक्रिया मित्रों हौसलाअफ़ज़ाई के लिए. ऐसा लगता है,...शुक्रिया मित्रों हौसलाअफ़ज़ाई के लिए. <BR/>ऐसा लगता है, जब भी गांव जाता हूं गांव की एक-एक चीज़ें बुलाकर कुछ कहती है, शिकायत करती है. देखो मैं किस हाल में पहुंच गयी, क्या-क्या किया तुम्हारे घर, परिवार और समाज वालों ने हमारे साथ ...<BR/><BR/><BR/>मुझे लगता है तेज़ी से बदलती इस दुनिया में एक शहर-गांव का फ़र्क मिट-सा गया है और ग्रामीण संस्कार और सम्पदा नए विकास के लिए जबरन क़ुर्बान किए जा रहे हैं.<BR/><BR/>ख़ैर, यदा-कदा आपको झेलाता रहूंगा :))राकेशhttp://www.blogger.com/profile/09355343165726493984noreply@blogger.com