tag:blogger.com,1999:blog-176152982009-07-06T18:55:03.141+02:00ब्लागिया कहीं कामुझे भी कुछ कहना हैरजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.comBlogger125125tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-89202377590684358842009-07-05T19:57:00.002+02:002009-07-05T21:45:20.274+02:00बिना परिचय किसी पर खुंदक निकालनाइन महानुभाव ने मुझे कितनी प्यारी ईमेल भेजी है। मैं अपने साइट के मेल सर्वर द्वारा उसमें पंजीकृत सदस्यों को कभी कभी पत्र भेजता हूँ। इन साहब ने कभी खुद ही मेरे साईट पर पंजीकरण किया होगा, जिसका मुझे पता भी नहीं, न ही मैं इन्हें जानता हूँ। कुछ दिन पहले मैंने कम से कम डेढ साल बाद सदस्यों को कोई ईमेल भेजी जिसका उत्तर इन साहब ने नीचे दिया है। इनको यह भी नहीं पता चला कि मैंने ईमेल याहू से नहीं बल्कि अपने रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-34963936319184727522009-07-05T19:17:00.001+02:002009-07-05T19:28:23.740+02:00गुरुद्वारों में घटी संगतवियना कांड और उसके बाद भारत में हुए अरबों की संपत्ति के नुक्सान ने एक बार अच्छी तरह साफ़ कर दिया है कि सिख पंथ के ध्वजवाहक किस हद तक गिर चुके हैं। इतने कि इस पंथ में निस्वार्थ विश्वास रखने वालों को अपने पंथ पर शर्म आने लगी है और गुरुद्वारे में जाने से हिचकिचाने लगे हैं। वैसे भी जर्मनी के अधिकतर गुरुद्वारों में लड़ाइयां होना, पुलिस का आाना आम बात है। तो एक आम व्यक्ति को को धर्म क्या लेना है? धर्म रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-37334185362017595512009-05-04T00:36:00.001+02:002009-05-04T00:36:25.879+02:00फ़्रैंकफ़र्ट गुरुद्वारे में घमसान लड़ाईआज फ़्रैंकफ़र्ट गुरुद्वारा में एक तमाशा देख कर आया। वहां ऊपर वाली मंज़िल में पाठ हो रहा था और नीचे काफ़ी लोग जमा होकर कल गुरूद्वारे में हुई एक घटना की बातचीत कर रहे थे। ध्यान से सुनने पर पता चला कि गुरुद्वारा कमेटी के चुनाव के चक्कर में कल वहां प्रत्याशियों में घमसान लड़ाई हुई, पगड़ियां उतर गईं, कृपाणें निकल गईं, भारत से खास आमंत्रित एक सिख संत डर कर भाग गए, पुलिस आ गई, सिख पंथ और गुरुद्वारा रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com5tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-54384344049375765722009-05-01T22:09:00.001+02:002009-05-01T22:09:48.590+02:00सिख पंथ के बारे में बातचीतआज मेरी म्युनिक में कोई तीस साल रह रहे पंजाबी हिंदू से जान पहचान हुई। धर्म के बारे में बातें चल पड़ीं तो उन्होंने कुछ रोचक बातें कहीं जो मेरे लिए नई थीं। मुझे नहीं पता इन बातों में कितनी सच्चाई है, में केवल इस लिए यहां लिख रहा हूँ कि शायद पाठकों से सच्चाई जानने का कोई मौका मिल जाए।उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के समय में पंजाब से कोई बलदेव सिंह उनके पास खालिस्तान की मांग लेकर गए थे। पटेल ने उनसे एक रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com6tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-82879350733944542152009-04-15T12:05:00.001+02:002009-04-15T12:05:34.149+02:00बसेरा से हस्ताक्षर हटा लिया गयाबसेरा पर छपे इस लेख में से मैंने निम्नलिखित हस्ताक्षर हटा दिया है क्योंकि यह एक अनौपचाररिक और व्यक्तिगत बातचीत थी, औपचारिक टिप्पणियां नहीं थीं। इसलिए में इसे व्यक्तिगत ब्लॉग पर डाल रहा हूँ।भारतीय दूतावास के 'टैगोर सांस्कृतिक केन्द्र' ने निर्देशक श्री राकेश रंजन से बातचीत के कुछ अंश।बसेराः भारतीय दूतावास परिसर में एक पूर्ण तौर पर जर्मन भाषा में संचालित किए गए कार्यक्रम के दौरान, एक जर्मन नागरिक कोरजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-23687225709588902882009-04-09T10:09:00.005+02:002009-04-09T10:38:02.786+02:00इंडोलोजी के पीछे मंशा क्या?Lothar Lutze नामक एक जर्मन इंडोलोजिस्ट को 2004 में भारत सरकार द्वारा भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' को दिया गया। वे बर्लिन में रहते हैं। अस्सी से ऊपर की आयु है। उन्होने कबीर के दोहों और अनेक अन्य कृतियों का जर्मन भाषा में अनुवाद किया। डॉयचे वेल्ले में काम कर चुकीं बर्लिन निवासी सुशीला शर्मा कहती हैं कि उनका अनुवाद इतना अच्छा नहीं पर फिर भी कुछ तो है। उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com5tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-59205142250970649942009-02-27T13:28:00.002+01:002009-04-26T07:52:42.249+02:00कीमती और अर्ध कीमती पत्थरयह शब्दावली कहीं और स्थानंत्रित करने के लिए यहां से हटा ली गई है। नई जगह का निर्णय होने पर यहीं लिंक दे दिया जाएगा।रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-84679631731224128022009-02-27T00:24:00.001+01:002009-02-27T00:24:50.416+01:00क्या गालियों को legalise कर देना चाहिए?वैसे अब तो हिंदी फिल्मों में भी गालियां सुनने को मिल जाती हैं। गालियां अब बहुत आक्रमक नहीं लगने लगी हैं, गुस्से की स्वभाविक अभिव्यक्ति ही लगती हैं। जब गाली सार्वजनिक तौर पर न उपयोग होती हो तो कभी कभार उसे सुनकर बहुत चोट पहुँचती है, लड़कियों, महिलाओं या बड़ों के आगे गालियों का उपयोग आक्रमक लगता है। लेकिन अगर उन्हें थोड़ा थोड़ा करके प्रचलन में लाया जाए तो उनका असर भी कम होने लगेगा। जैसे अंग्रेज़ी रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-53675556325264870212009-02-27T00:06:00.002+01:002009-02-27T00:31:01.974+01:00मोटर इंडिया हिंदी मेंपिछले वर्ष एक तकनीकी व्यापार मेले में तमिलनाडु से motorindia नामक पत्रिका के प्रकाशक मिले थे। वे कह रहे थे कि उन्होंने ये पत्रिका हिंदी में भी आरंभ की है जो बहुत सफ़ल हो रही है। मुझे हर्ष भी बहुत हुआ और अचरज भी कि विश्व की गाड़ियों पर आधारित हिंदी की एकमात्र पत्रिका तमिलनाडु से निकलती है, जो हिंदी विरोधी राज्य माना जाता है। क्या आप इसके बारे में जानते हैं। क्या आपने यह पत्रिका देखी है? कल ही फ़ोनरजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-90417036356863438882009-02-26T23:52:00.001+01:002009-02-26T23:53:23.829+01:00दिल्ली हवाईअड्डे में टेलीफ़ोन बूथ में भ्रष्टाचारपता नहीं इसे भ्रष्टाचार कहना कितना उचित है। कोई बड़ी बात भी नहीं है, लेकिन फिर भी चुभी जब मैं पिछली बार दिल्ली से जर्मनी आ रहा था। दिल्ली हवाईअड्डे में सभी गेट के पास कई Airtel के टेलीफ़ोन बूथ लगे हैं जिनके साथ कोई ऊँघ रहा लड़का बैठा होता है। बात करने के बाद वह लड़का पर्ची फ़ाड़कर बाहर निकालता है। पर्ची की प्रिंटिंग बहुत धुँधली होती है और वह लड़का उससे ज़्यादा पैसे मांगता है। मेरा बिल 13 रुपए का रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-31055213392017282952009-01-27T09:28:00.001+01:002009-01-30T15:13:08.450+01:00चुटकुलेएक किशोरी ने 999 पर फ़ोन करते हुए पूछाः 'हेलो, क्या यह 999 यानि फ़ायर ब्रिगेड है?'जवाब मिलाः 'नहीं... यह 998 है।'किशोरीः 'कृपया अपने बराबर वाले से कह दें कि मेरे घर में आग लग गई है।'----हिरोइन शूटिंग के लिए पानी के जहाज़ से यात्रा कर रही थी। यात्रा के दौरान उसने डायरी लिखी।पहले दिन डायरी में लिखा था- 'अब जहाज़ चल पड़ा है। बड़ा मज़ा आ रहा है। जी करता है, इस यात्रा का अंत न हो।'दूसरे दिन डायरी में रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-42849712927871193832009-01-22T15:40:00.001+01:002009-01-23T07:31:45.355+01:00पुराने चुटकुलेपति ने अपने बेटे की अक्लमंदी की तारीफ़ करते हुए पत्नि से कहा 'इसने सारी अक्ल मुझसे ली है।''हो सकता है। मेरी अक्ल तो मेरे पास सही सलामत है।'----एक प्रेमिका की आंखें भैंगी थीं। एक दिन उसने अपने प्रेमी से पूछा 'क्या मेरी आंखें पूनम से मिलती हैं?''खाक मिलती हैं।' प्रेमी ने झल्लाकर कहा, 'आपस में तो मिलती नहीं।'----'क्या तुम मेरे लिए सिगरेट भी नहीं छोड़ सकते?''तुम्हारे लिए मैं पीता कब हूँ।'----एक पत्नीरजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com6tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-72128246665221594872009-01-13T17:23:00.001+01:002009-01-13T17:23:46.608+01:00महत्वपूर्ण सबकपिछले महीने (यानि दिसंबर) मुंबई धमाकों के बारे में कुछ पाकिस्तानी लोगों से बात कर रहा था। उनके सीधे सीधे, हिम्मत भरे उत्तर सुनकर एक बार तो झटका खा गया। एक से मैंने पूछा कि मुस्लिम लोग इस्लाम को इतना फैलाना क्यों चाहते हैं? तो उसने कहा कि 'यह तो स्वभाविक है। हर कोई चाहेगा कि उसका धर्म खूब फ़ैले। हिन्दू चाहेंगे कि सभी हिन्दू बन जाएं, मुस्लिम चाहेंगे कि सभी मुस्लिम बन जाएं, ईसाई चाहेंगे कि सभी ईसाईरजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-12586198557262922102009-01-13T16:48:00.000+01:002009-01-13T16:50:03.837+01:00ढाई साल बाद भारत जाना हुआअभी परसों ही केवल एक सप्ताह के लिए भारत जाकर वापस आया। बहुत अच्छा लगा भाई बहन, माता पिता और कुछ पुराने जानकारों को मिलकर। अब भारत में लोगों में काफ़ी उत्साह दिख रहा है। कम से कम लोगों के मुख से 'विकास' की बातें निकल रहीं हैं। कितने ही हाईवे, फ़्लाईओवर बन रहे हैं, मोबाईल फ़ोन से बात करना बहुत सस्ता हो गया है, लैपटॉप सुलभ हो गए हैं, लोगों में विदेश जाने की लालसा 'शायद' कम हो गई है। हिन्दी के रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-53716294689649057922008-10-07T23:27:00.002+02:002008-10-10T00:32:24.219+02:00म्युनिक में लगा सेक्स मेलाविवाद होने के कारण मुझे यह पोस्ट बसेरा के साईट से हटानी पड़ी, इसलिए निजि ब्लॉग पर डाल रहा हूँ। दोबारा पेश किए जाने के लिए खेद है।26 सितंबर - 5 अक्तूबर, म्युनिक। ओलंपिया पार्क में ऑस्ट्रिया की एक कंपनी Eros & Amore द्वारा एक सेक्स मेला आयोजित किया गया जिसमें युरोप के कई मशहूर सेक्स कलाकारों ने अपने शो प्रस्तुत किए। इनके अलावा बहुत सारी कंपनियों ने सेक्स संबंधी अपने उत्पाद पेश किए जैसे मर्दों और रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-29835223392090214262008-08-23T11:35:00.001+02:002008-08-24T22:19:52.053+02:00विक्सित भाषा के बिना विक्सित राष्ट्र? हा हा हामेरे निम्नलिखित विचार अभी थोड़े बेतरतीब हैं। इसलिये बुरा न मानें। समय मिलने पर ये लेख सुधार दूँगा।15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर म्युनिक दूतावास में सुबह सुबह खराब मौसम के बावजूद सैंकड़ों म्युनिक में रहने वाले भारतीय लोग एकत्रित हुए। तिरंगा फहराने के बाद नये महाराजदूत श्री अनूप मुदगल ने राष्ट्रपति का संदेश पढ़ना था। सामान्यतः यह संदेश भारत से हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषओं में उपलब्ध रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com5tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-20068331658799742942008-08-17T23:17:00.002+02:002008-08-17T23:21:07.614+02:00Wiedererkennungswertकल एक जर्मन महिला से बसेरा पत्रिका के बारे में बातचीत हो रही थी जो एक भारतीय दुकान चलाती है (उसका पति भारतीय है)। मैं उसे समझा रहा था कि हम जर्मन शब्दों या नामों को रोमन लिपि में ही लिख रहे हैं ताकि पढ़ते समय एकदम से पहचान लिए जाएं, उन्हें पूरी पढ़ना न पड़े। तो उसने बताया कि इसे Wiedererkennungswert कहते हैं। यानि Wieder + erkennungs +wert, यानि दोबारा + पहचाने जाने की + शक्ति। यानि चीज़ों की वो रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-57943858519119979822008-06-19T04:47:00.011+02:002009-04-26T07:52:05.429+02:00रसायन उद्योग संबंधी तकनीकी शब्दावलीयह शब्दावली कहीं और स्थानंत्रित करने के लिए यहां से हटा ली गई है। नई जगह का निर्णय होने पर यहीं लिंक दे दिया जाएगा।रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-53166789824645170942008-06-17T08:06:00.004+02:002009-04-26T07:51:30.360+02:00तकनीकी शब्दावलीयह शब्दावली कहीं और स्थानंत्रित करने के लिए यहां से हटा ली गई है। नई जगह का निर्णय होने पर यहीं लिंक दे दिया जाएगा।रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-59824898922556071632008-06-15T11:22:00.003+02:002008-06-15T11:24:54.907+02:00दो मिनट में नाम-पत्रक बनायेंदो तीन दिन पहले ही एक व्यापारिक मेले (trade fair) में जाने के लिये अपने नाम-पत्रक (visiting cards) बनाने की आवश्यक्ता पड़ी तो कंपनी Sigel का ऑनलाईन अनुप्रयोग और बाज़ार में मिल रहा 'LP790' नंबर कागज़ काम आया। बहुत आसानी से कुछ ही मिनटों में घर पर ही बढ़िया नाम-पत्रक बन गये। इससे हम पीडीएफ़ फ़ाईल भी डाउनलोड कर सकते हैं। कागज़ अच्छी गुणवत्ता का है। एक A4 आकार के कागज़ में दस नाम-पत्रक होते हैं और पहले रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-91724744754109522482008-06-07T00:09:00.002+02:002008-06-07T00:11:18.967+02:00बच्चों के लिये खेलतीन चार साल के बच्चे के लिये एक से दस तक गिनती सीखने, सभी अंकों के आकार सीखने और याद रखने, अंकों का क्रम याद रखने, उल्टे और सीधे अंक में अंतर सीखने, किसी चीज़ की गिनती करने आदि के लिये ये खेल उत्तम है। ये लकड़ी के कोई 5-6 मिलीमीटर मोटे ब्लॉक्स हैं। इसमें मध्य वाले टुकड़े पर एक अंक लिखा है। इसके दोनों ओर ब्लॉक जोड़ने होते हैं जिनपर अंक के अनुसार कुछ चित्र बने हैं। बच्चे को पहले बीच वाले ब्लॉक रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-26130913943164401332008-05-03T18:48:00.000+02:002008-05-03T18:49:09.372+02:00वाह! वाह!कभी ये आँखें हया से उठा तक नहीं करतीं थींआज तुझे ढूँढने की फ़ितरत में हर किसी पर जा टिकती हैं।रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-57893407320784108892008-04-29T22:43:00.013+02:002008-05-04T00:17:31.214+02:00ब्लॉगिंग- एक अच्छा स्कूलब्लॉगिंग एक अच्छा स्कूल है जहाँ व्यक्ति तकनीकी रूप से बहुत कुछ सीखता है, खासकर जब एक समुदाय के ब्लॉगर, एग्रीगेटरों आदि द्वारा एक दूसरे के ब्लॉगों पर नज़र रख सकें। मैं भी ब्लॉग जगत का बहुत आभारी हूँ जिसने मुझे इतना कुछ सिखाया। इसका अहसास अब मुझे व्यवसायिक प्रिंट पत्रिका बसेरा पर काम करते हुये हो रहा है जिसकी वजह से युनिकोड का जलवा आम लोगों तक पहुँचा है। लेकिन एक व्यवसायिक पत्रिका केवल तकनीकी ज्ञान रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-3678228735801246322008-03-27T23:03:00.000+01:002008-03-27T23:04:07.655+01:00ब्लॉगरों की शोलेसरदारः हम्म्म्म....कितने ब्लॉगर थे मीट में?कालियाः सर जी, काफ़ी सारे थे जी। कुछ ब्लॉगरनियां भी थीं।सरदारः वाह! अब आएगा मज़ा ब्लॉगिंग का। हम्म्म्म... तो इतने सारे ब्लॉगर, और तुम तीन। फिर भी वापस आ गए, खाली हाथ, बिना एक भी मेम्बर बनाए। क्या सोच कर आए थे.....कि एडमिनिस्ट्रेटर खुस होगा? बहुत सारी टिप्पणी करेगा क्यों? अरे ओ सांभा! कित्ती फ़ीड है हमरे एग्रीगेटर में?सांभाः सर जी पूरी 1503!सरदारः सुना! रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com7tag:blogger.com,1999:blog-17615298.post-11509990052619810492008-03-12T16:43:00.013+01:002009-04-10T00:01:50.457+02:00शब्दावलीsportstransportationmedical / healthfashionधर्म, उत्सव, परंपराएंgeneralpedagogypoliticsतकनीकी शब्दावलीरसायन उद्योगकीमती और अर्ध कीमती पत्थररजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com0