tag:blogger.com,1999:blog-1759328551597368568.post-57070307990808593232008-02-16T16:34:00.000+05:302008-02-16T16:34:00.000+05:30वाह सागर भाई । ये वो दौर था जब लता जी शुरूआत कर रह...वाह सागर भाई । ये वो दौर था जब लता जी शुरूआत कर रही थीं । इस आवाज़ पर मलिका ए तरन्‍नुम नूरजहां का असर साफ नजर आ रहा है । 1948 कई मायनों में अहम था । सहगल का जाना । रफी साहब का आना । यही दौर किशोर की शुरूआत का भी था । <BR/>सुंदर प्रस्‍तुतिyunushttp://www.blogger.com/profile/12193351231431541587noreply@blogger.com