tag:blogger.com,1999:blog-16767459.post-20168504645477228752007-03-18T12:40:00.000+05:302007-03-18T12:40:00.000+05:30भाई अभय तिवारी, आपका लेख अभी पढ़ा। यह लेख गम्भीर और...भाई अभय तिवारी, आपका लेख अभी पढ़ा। यह लेख गम्भीर और चर्चा हल्की-फुल्की है। इससे आपके बुरा लगा इसका हमें अफसोस है। लेकिन हमको आशीष की हल्का-फुल्का अन्दाज अच्छा लगा इसलिये तारीफ़ की। आपने जैसा समझा वैसा लिख दिया यह अच्छी बात है। हम कोई बहाना नहीं बना रहे कि आप इसे मजाक में लें या आप बुरा न माने। लेकिन आप इस बार पर फिर से विचार करियेगा कि जिस खिचड़ा भाषा के लिये नाराजगी जाहिर की उससे और आगे के शब्द इस्तेमाल किये जो कि गैरजरूरी थे। उनके बिना आपका आक्रोश बेहतर तरीके से जाहिर हो रहा था। बहरहाल, आपको जो कष्ट हुआ इस चर्चा की खिचड़ी भाषा से, जो कि हमें पसंद आई, इसके लिये अफसोस है। यह हमारे लिये उपलब्धि है कि चिट्ठाचर्चा में अब मुंहदेखी तारीफ़ें ही नहीं बल्कि कमियों की तरफ़ भी इशारा होने लगा है भले ही भावुकता में हो और भाषा की शुद्धता की बातें करते-करते भाषा में खिचड़ी भाषा के आगे के, निपटाने वाले शब्द, शामिल हो गये।अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.com