tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-47991559675139374332007-07-23T09:58:00.000+05:302007-07-23T09:58:00.000+05:30अल्पना जी,पहिने दु टा कारण से अहाँके धन्यवाद:पहिल ...अल्पना जी,<BR/>पहिने दु टा कारण से अहाँके धन्यवाद:<BR/>पहिल जे अहाँ ई ब्लोग जगत में अपन उपस्थिति दर्ज केलियेक आ दोसर जे अहाँ एकरा लेल www.vidyapati.org के अपन मंच बनौलियेक।<BR/><BR/>जाहि हिसाब से ई कहानी आगाँ बढ़ल अछि से हम अधैर्य भ’ गेल छी। कोना की हेतैक रंजीत के, हुनक मर्यादा के। अमोल की वर्षा के प्रेमपाश में अपना के फंसय देता। आ सब से बेसी रोचक, जे वर्षा के मोन में अखन की चलि रहल छैक। सते ओ अमोल के चाहय लागली आ की कनेक देर के लेल हुनका कोनो चीज अप्रतिम लागय लागलैन? आ ई बाल-बच्चा के चाहने आ की नहि चाहने तीनु गोटाक माँ-बाबूजी पर की बीततैन? <BR/><BR/>अहाँ बढ़ रोचक धर्मसंकट बला स्थिति बना देने छियेक। आब तऽ इंतजार रहतैक अगला कड़ी के जे कहानी कोना किम्हर टघरै छैक।<BR/><BR/>अहाँ सन आउर कियौ जे एहि कहानी के आगाँ बढ़ाबै छथि तऽ एहि धारावाहिक के महारूप देखबा में आबि सकैत छैक। आशा जे किछु गोटा आगाँ औता एकरा गति देबाक लेल। तखन धरि एहि में कोनो शक नहि जे अहाँ के उदाहरण बहुतो पाठक वर्ग के उत्साहित करत मैथिली लिखबाक लेल।<BR/><BR/>सादर,<BR/>राजीव रंजन लालRajeev Ranjan Lallhttp://www.blogger.com/profile/18354335177402486449noreply@blogger.com