tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-199126507884909372007-07-24T05:08:00.000+05:302007-07-24T05:08:00.000+05:30राजीव जी;एहि प्रोजेक्ट मे बढ़ियां बात ई जे प्रत्येक...राजीव जी;<BR/><BR/>एहि प्रोजेक्ट मे बढ़ियां बात ई जे प्रत्येक लेखक के अपन मानसिक स्थिति’क अनुसार कहानी के मोड़्बाक छुट होइत छैक. वर्षा अमोल के अपन प्रेम पाश मे बान्हत की नहि ओ अपने लोकनि (लेखक गण) पर निर्भर करैत छैक. अहां लोकनि बन्हबाईयो सकैत छी आ नहियों. मुदा पाठक कें हरदम सस्पेन्स बनल रहतैक... किएक ते जतेक लेखक अछि ओहेन तरह के मानसिकता आ ओहेन तरह के कहानी मे टर्न. उठा-पटक. ई प्रोजेक्ट हमर बुझु ते सपना थीक, आ अहां बिन ई कहियो नहि पूरा भौ सकैत अछि. <BR/>हमर आग्रह जे कहियो टाईम निकालि के (वीक्-एण्ड्स) मे एक पेज लिख दियौक. आ ओकर बादक जिम्मेदारी हमरा उपर. <BR/><BR/>कहानी मे पहिल उठा-पटक करबाक लेल अल्पना केँ धन्यवाद.डा. पद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.com