tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-91563047865568794552008-01-01T14:28:00.000+05:302008-01-01T14:28:00.000+05:30शैलेंन्द्रजी,धन्यवाद. ई अहाँक महानता आ मैथिली प्रे...शैलेंन्द्रजी,<BR/>धन्यवाद. ई अहाँक महानता आ मैथिली प्रेम अछि जे अहाँ हमरा प्रखर कवि कहि के सम्बोधित कयलहूँ. मुदा सच ई छैक जे कविता वा कहानी लेखन हमर वश के रोग नहि अछि. हमर विशेष रुचि आलोचना एवँ समालोचना अछि.<BR/><BR/>चलु आब एहि रचना पर किछु प्रकाश दैत छी. वस्तुतः ई रचना हम अपन कॉलेजक एकटा सहपाठी के ध्यान मे राखि के लिखने छलहुँ. ज़ेना हम पहिने स्पष्ट कय चुकल छी जे ई मूलतः हिन्दी मे लिखल गेल छल. कोनो रचनाकार जेखन कोनो रचना के जन्म दैत छैक तेखन ओकरा मोन मे जे आबैत जायत छैक ओ लिखि दैत अछि आओर हमर विचार अछि जे रचनाकार के एहि बात के पूर्ण रूपेण स्वतंत्रता होयबाक चाहि जे ओ अपन सामाजिक मर्यादा मे रहैत अपन सोचक सीमाविहीन आकाश मे घुमि सकय.<BR/>मुदा ईहो एकटा अकाट्य सत्य छैक जे कोनो रचना अपन पूर्णता पर तेखन पहुँचैत अछि जेखन ओकर पाठक वर्ग ओकर रचना के अपना रुप मे प्रस्तुत करैत छैक. आओर ओहि के लेल यदि पाठक लोकनि के कनि दिमागी कसरत करS पडय ओहि स पैघ सौभाग्य कोनो रचनाकार के लेल नहि भs सकैत छैक.<BR/><BR/>अहाँक जवाबक प्रतीक्षा रहत.<BR/><BR/>धन्यवाद-<BR/>कुन्दन कुमार मल्लिककुन्दन कुमार मल्लिक, जय मिथिला, जय मैथिली!http://www.blogger.com/profile/03699865603391260097noreply@blogger.com