tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-11095975000908508882008-01-03T09:55:00.000+05:302008-01-03T09:55:00.000+05:30राजीव जी;जल्दी सँ एकटा टिप्पणी द' रहल छी. अहाँक पू...राजीव जी;<BR/>जल्दी सँ एकटा टिप्पणी द' रहल छी. अहाँक पूरा रचना एक तरफ आ एकर शीर्षक एक तरफ. तैयो शीर्षके भारी बुझना जाइत अछि. हमरा याद आबि रहल अछि मोमिन खाँ मोमिनक एकटा शेर... कहने छलथि जे "तुम याद आते हो गोया जब दूसरा कोई नही होता". एहेन किँवदन्ति अछि जे गालिब हुनका कहने छलथि जे मोमिन तुम मेरे सारे शेर और गजल ले लो लेकिन यह शेर मेरे नाम कर दो. <BR/><BR/>बेगरता... जेना हम कहने छलहुँ देशज श्ब्द मे बहुत ताकत होइत छैक अहाँक शीर्षक एहि यूक्ति केँ बहुत बढियाँ तरीका सँ उद्धृत कयने अछि. <BR/><BR/>फुर्सत भेला पर आलोचक'क भाँति फेर सँ टिप्पणी करब.पद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.com