tag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122823732693522992005-07-31T08:27:00.000-07:002005-07-31T10:19:05.826-07:00आज हम बिछडे हैं (ग़ज़ल यहां सुनें) आज हम बिछडे हैं तो कितने रंगीले हो गए, मेरी आंखे सुर्ख, तेरे हाथ पीले हो गए. कब की पत्थर हो चुकी हैं मुन्तज़िर आंखें मगर, छू के जब देखा तो मेरे हाथ गीले हो गए. जाने क्या एहसास साज़ ए हुस्न के तारों में है, जिनको छूते ही मेरे नग़में रसीले हो गए. अब कोई उम्मीद है 'शाहिद' ना कोई आरजू, आसरे छूटे तो जीने के वसीले हो गए. आज हम बिछडे हैं तो कितने रंगीले हो गए, मेरी आंखे सुर्ख, तेरे Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.com