tag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122820378362708152005-07-31T07:29:00.000-07:002005-07-31T10:21:29.463-07:00आपके हसीन रुख पे.. (गीत यहां सुनें) आपके हसीन रुख पे आज नया नूर है, मेरा दिल मचल गया तो मेरा क्या कुसूर है. आपकी निगाह ने कहा तो कुछ ज़रूर है, मेरा दिल मचल गया तो मेरा क्या कुसूर है. खुली लटों की छांव में खिला - खिला ये रूप है, घटा पे जैसे छन रही सुबह - सुबह की धूप है. जिधर नज़र मुडी , उधर सुरूर ही सुरूर है. मेरा दिल मचल गया तो मेरा क्या कुसूर है. झुकी - झुकी निगाह में भी हैं बला की शोखियां, दबी - दबी हंसी में Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.com