tag:blogger.com,1999:blog-13426959.post-1148433083416625852006-05-24T03:11:00.000+02:002006-05-24T03:11:00.000+02:00मनोज के विचार से सहमति जताते हुये अनुरोध करूंगा कि...मनोज के विचार से सहमति जताते हुये अनुरोध करूंगा कि वीरेंद्र जैन का उपन्यास 'डूब'<BR/>पढ़ें। विस्थापितों का दर्द शायद समझ में आये। जिस महिला में वंचितों के लिये अपनी जिंदगी<BR/>का बड़ा हिस्सा लगा दिया ,उसके कामों के पीछे राजनीति ,जांच की बात कहने के पहले सोचना चाहिये।अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.com