tag:blogger.com,1999:blog-13256792.post-1118860781625016342005-06-15T11:32:00.000-07:002005-06-24T11:24:09.840-07:00गज़ल़ें<p><span style="font-size:130%;color:#003333;">[5]</span></p><p><span style="font-size:130%;">पाण्डवों की जिंन्दगी संकट में है।<br />कृष्ण आओ द्रोपदी संकट में है ।।<br /><br />किससे दिल की बात कहने जाएँ हम।<br />जो भी मिलता है वही संकट में है।।<br /><br />आगे आगे चल रहे हैं हादसे।<br />घर से निकला यात्री संकट में है।।<br /><br />कौन इस युग में हरेगा दुःख मेरे।<br />खुद ही इस युग का हरी संकट में है।।<br /><br />झूठ के सिर पर मुकुट है विक्रमी।<br />भक्त सच्चा आदमी संकट में है।।<br />***<br /><br /><span style="color:#333300;"><strong></strong></span><br /><span style="color:#660000;"></span></span><span style="font-size:130%;color:#003333;">[6]<br /></span></p><p><span style="font-size:130%;">सौ बहाने हैं मुस्कारने के।<br />लाख अन्दाज़ ग़म छुपाने के।।<br /><br />मेरी बर्बादियों का रंज न कर।<br />दिन हैं जश्न-ए-तरब मनाने के।।<br /><br />बिजलियों की चमक पै शैदा हुए।<br />जो मुहाफ़िज थे आशियाने के।।<br /><br />फिर कोई अहदे मोतबर यारो।<br />हौसले हैं फरेब खाने के।।<br /><br />पहले तुम मेहरबान होके मिले।<br />फिर मसायब मिले ज़माने के।।<br /><br />ये तगाफुल ये खुद फरामोशी।<br />सब जतन हैं तुझे भुलाने के।।<br /><br />आज के लोग भी खिलौने हैं ।<br />चन्द कौड़ी के, चन्द आने के।।<br />***<br /></span></p><p><span style="font-size:130%;"><br /></span></p><p><span style="font-size:130%;"><span style="color:#003333;">[7]<br /></span><br />मैं हूँ पहरेदार खुदा की बस्ती का।<br />यानी फर्ज गुजार खुदा की बस्ती का।।<br /><br />मुझको आकर सारे भेद बताता है।<br />एक-एक चोर चकार खुदा की बस्ती का।।<br /><br />सब कठिनाई हल होती है डंडे से।<br />डंडा है ग़मखार खुदा की बस्ती का।।<br /><br />जिस चिड़िया के बच्चे को देखा, निकला।<br />पक्का रिश्तेदार खुदा की बस्ती का।।<br /><br />खास किसी इंसां में न देखो भक्त मुझे।<br />मैं हूँ एक किरदार खुदा की बस्ती का।।<br />*** </span></p><p><span style="font-size:130%;"><br /></span></p><p><span style="font-size:130%;color:#003333;">[8]</span></p><p><span style="font-size:130%;">पास आकर भी दूर हैं कितने।<br />मिलने से मजबूर हैं कितने।।<br /></strong><br />दारो रसन तक इनकी शोहरत।<br />दीवाने मशहूर हैं कितने।।<br /><br />ये कैसा पथराव हुआ है।<br />आइना खाने चूर हैं कितने।।<br /><br />उन आँखों का फैज करम है।<br />पूछो मत मखमूर हैं कितने।।<br /><br />जीने का दस्तूर नहीं है।<br />मरने के दस्तूर हैं कितने।।<br />***</span></p><p><br /><span style="font-size:130%;color:#003333;">[9]</span></p><p><span style="font-size:130%;">रैन निराशा आए कौन।<br />सोए भाग जगाए कौन।।</span></p><p><br /><span style="font-size:130%;">प्रीति की रीति ही ऐसी है।<br />इस दिल को समझाए कौन।।</span></p><p><br /><span style="font-size:130%;">गहरे सागर की तह से।<br />सच्चे मोती लाए कौन।।</span></p><p><br /><span style="font-size:130%;">अब किस का विश्वास करें।<br />झूठी कसमें खाए कौन।।</span></p><p align="left"><br /><span style="font-size:130%;">आने वाला कोई नहीं।<br />खिड़की द्वार सजाए कौन।।</span></p><p><br /><span style="font-size:130%;">दीपक राग अलापें भक्त।<br />लेकिन मेघा गाए कौन।।</span></p><p><span style="font-size:130%;">***</span></p><p align="center"><span style="font-size:130%;color:#000000;">-ठा॰ गंगाभक्त सिंह भक्त</span></p><p align="center"><span style="font-family:webdings;font-size:78%;color:#c0c0c0;">ggggggggggggggggggggg</span></p><p><span style="font-size:100%;"></span></span></p><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/13256792-111886078162501634?l=kavyakunjgbs.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0