tag:blogger.com,1999:blog-130921202007-04-27T07:14:43.708-07:00जया नर्गिसDr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comBlogger4125tag:blogger.com,1999:blog-13092120.post-1121614415078998352005-07-17T08:33:00.000-07:002005-12-17T04:07:16.323-08:00परिचय<a title="Photo Sharing" href="http://www.flickr.com/photos/vyomjpg/26556105/"><img style="WIDTH: 99px; HEIGHT: 128px" height="240" alt="jaya nargis" src="http://photos23.flickr.com/26556105_3d62c488c8_m.jpg" width="192" /></a><br /><span style="color:#336666;">जया नर्गिस<br /></span><span style="color:#003333;">जन्म</span>- 03 दिसम्बर 1962, मुम्बई(महाराष्ट्र)<br /><span style="color:#003300;">मातृभाषा-</span> मलयालम<br /><span style="color:#003333;">लेखन की भाषा</span>-हिन्दीं एवं उर्दू<br /><span style="color:#003333;">शिक्षा</span>- बी.ए.,एम.म्यूज़(गायन एवं वॉयलिन)<br /><span style="color:#003333;">प्रकाशित कृतियाँ-<br /></span>रजनी से रवि तक(काव्य संग्रह)<br />पग-पग काँटे डग-डग आग ( लेख संग्रह)<br />नर्गिस (ग़ज़ल-संग्रह)<br />साईं शक्ति भैरवी (भजन-संग्रह)<br />कशिश (ग़ज़ल-संग्रह)<br />नाग (कहानी-संग्रह)<br /><span style="color:#003333;">प्रकाशन</span>- देश भर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रकाओं में रचनाओं का प्रकाशन एवं आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा ग़ज़लों का प्रसारण। अनेक कहानियों और लघु कथाओं का कई भाषाओं में अनुवाद।<br /><span style="color:#003333;">संप्रति</span>- होशंगाबाद में भैरवी संगीत, साहित्य कला मंदिर का संचालन।<br /><span style="color:#990000;">संपर्क-<br /></span>राधावल्लभ मंदिर<br />सुभाष चौक, नर्मदा मार्ग<br />होशंगाबाद(म.प्र.)-461001<br /><span style="color:#339999;">दूरभाष</span>- 9893087788<br />***<br /><br /><div align="center"><br /><span style="color:#990000;"><a href="http://www.anubhuti-hindi.org/kavi/j/jaya_nargis/index.htm">अनुभूति में</a></span></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092120.post-1121614386828397052005-07-17T08:32:00.002-07:002005-07-20T11:45:51.586-07:00ग़ज़लें[1]<br />हैं अँधेरे लाख लेकिन इक जलता तो है<br />तू नहीं है साथ, यादों का तेरी साया तो है<br /><br />कह रहा है मुसकुरा के मुझसे मेरा आईना<br />इस पराए शहर में कोई तेरा अपना तो है<br /><br />आज मायूसी को मेरी कुछ क़रार आ ही गया<br />कोरा काग़ज़ ही सही पर उसने ख़त भेजा तो है<br /><br />पूछता है दूसरों से हाल मेरा बारहा<br />हो उसे इन्कार लेकिन वास्ता रखता तो है<br /><br />वो नहीं मैं, जो सफ़र की मुश्किलों से जाए डर<br />मंज़िलें मेरी नहीं तो क्या, मेरा रस्ता तो है<br /><br />कौन कहता है ज़माने का लहू ठंडा हुआ<br />हादसा 'नर्गिस' यहाँ हर रोज़ इक होता तो है<br />***<br /><br /> [2]<br />एक खिलौनेवाला ये कहता फिरता है गलियों में<br />मोल जो इनका समझे वो बच्चा रहता है गलियों में<br /><br />छोटी बस्ती में रहने के लुत्फ़ ये शहरी क्या जाने<br />राम-राम कर लेता है जो भी मिलता है गलियों में<br /><br />रंगो-बू सब क़ैद हुए महलों के सुनहरी गमलों में<br />बाँह पसारे मिलता है जो गुल खिलता है गलियों में<br /><br />इस्कूलों को जानेवाले बच्चे देख के याद आया<br />जीवन का हर सख्त़ सबक़ बचपन पढ़ता है गलियों में<br /><br />मेरे गाँव के सीधे-सच्चे लोग ग़मों से कैसे डरें<br />एक फ़कीर सभी को दुआ देता फिरता है गलियों में<br /><br />ऊँची-ऊँची उनकी इमारत जगमग-सी हो उठती है<br />और सूरज का साया तक न ढल पाता है गलियों में<br /><br />नूरे-तबस्सुम जिसने चुराया उसकी राह में ऐ 'नर्गिस'<br />इक-इक आँसू दीपक बन झिलमिल करता है गलियों में<br />***<br /><br /> [3]<br />आँगन की धूप, नींव का पत्थर चला गया<br />वो क्या गया, के साथ मिरा घर चला गया<br /><br />कितने ग़ज़ब की प्यास लिये फिर रहा था वो<br />जो उसके पीछे-पीछे समंदर चला गया<br /><br />फिर उसके नाम कर दिया सरकार ने नगर<br />दुनिया से बदनसीब जो बेघर चला गया<br /><br />पूछा पता किसी ने तो हमको ख़बर हुई<br />बरसों कोई पड़ौस में रहकर चला गया<br /><br />दिल पारा-पारा होके गया जाने कब बिखर<br />इस तर्हा कोई आँख मिलाकर चला गया<br /><br />सूरत से वास्ता यहाँ फ़ितरत को क्या भला<br />बुत बर्फ़ का था, आग लगाकर चला गया<br /><br />'नर्गिस' न ख़ुद मुझे ही ख़बर हो सकी कभी<br />वो शख्स़ियत को मेरी मिटाकर चला गया<br />***<br /><br /> [4]<br />एक सच बोलने की देरी है<br />फिर ये दुनिया तमाम तेरी है<br /><br />चंद वादे हैं, उनकी यादे हैं<br />हाँ, ये जागीर ही तो मेरी है<br /><br />हौसलों की शम्मा जब रोशन<br />फ़िक्र क्या रात ग़र अँधेरी है॓<br /><br />छँट गया दुशमनी का सब कोहरा<br />दोस्तों ने जो आँख फेरी है<br /><br />इक दीवाने ने रेत पर 'नर्गिस'<br />ज़िंदगी की छवि उकेरी है।<br />***<br /><br /> [5]<br />पतझड़ में बहारों की महक अब भी है बाक़ी<br />बीते हुए लम्हों की कसक अब भी है बाक़ी<br /><br />दर्पन कभी देखा तो ये अहसास भी जागा<br />इक ख्व़ाब की आँखों में झलक अब भी है बाक़ी<br /><br />बस्ती से मेरी जा भी चुके कबके फ़सादी<br />सन्नाटा मगर दूर तलक अब भी है बाक़ी<br /><br />ऐ पंछी बचा रखना तू परवाज़ की ख्व़ाहिश<br />एक तेरी तमन्ना का फ़लक अब भी है बाक़ी<br /><br />कहने को तो दिल राख का इक ढेर बन गया<br />इसमें कहीं शोलों की धधक अब भी है बाक़ी<br /><br />मौसम का फ़ुँसूँ खत्म हुआ शाम से 'नर्गिस'<br />आँखों में तो अश्कों की धनक अब भी है बाकी<br />***<br /><br /> [6]<br />आज हुईं यूँ ख़ुशियाँ घायल<br />दर्द-सा दिल में पाँव में पायल<br /><br />जो कड़वा सच किसकी आहट<br />दिल में मची ये कैसी हलचल<br /><br />टीस उठी, लो फिर दिल धड़का<br />फिर लहराया याद का आँचल<br /><br />बस्तीवाले वहशी क्यूँ हैं<br />पूछ रहे हैं आज ये जंगल<br /><br />'नर्गिस' दिल और ग़म की हालत<br />बीच में नागों के हैं संदल<br />***<br /><br /> [7]<br />उसका चेहरा शरद का चाँद लगे<br />चाँद का अंक उसके बाद लगे<br /><br />ये जो छोटी-सी ज़िंदगी है मेरी<br />तुझसे मिलकर ये बेमियाद लगे<br /><br />जिसकी उम्मीद छोड़ रक्खी थी<br />तू वो पूरी हुई मुराद लगे<br /><br />प्यार संगीत में जो ढल जाए<br />एक-एक साँस ब्रह्म-नाद लगे<br /><br />ऐ ख़ुश अब ज़बाने-इंसा को<br />फिर न इंसा के ख़ूँ का स्वाद लगे<br /><br />ऐसे अशआर सुनाओ 'नर्गिस'<br />ज़िक्रे-नाशादियाँ भी शाद लगे<br />***<br /><br /><div align="center"><span style="color:#660000;">-जया नर्गिस</span></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092120.post-1121614367202519542005-07-17T08:32:00.001-07:002005-07-19T10:52:05.623-07:00कविताएँ<span style="font-size:130%;color:#003333;">तमाशा<br /></span><br />तमाशा जारी है<br />साँप नेवले को<br />डस नहीं पाता<br />नेवला हर-बार छोड़ देता है<br />साँप को जिंदा<br />और फिर<br />मदारी की झोली में<br />बरसते हैं सिक्के।<br />चौराहे, गालियाँ, गाँव, शहर<br />बदलते जाते हैं<br />डमरू बजता रहता है<br />भीड़ जुटती रहती है<br />तमाशा चलता रहता है<br />सब् जानते हैं<br />साँप नहीं डसेगा नेवले को<br />नेवला मार नहीं पाएगा साँप<br />फिर भी<br />तमाशबीनों के हाथ<br />फेंकते रहेंगे सिक्के<br />अपनी ही मर्जी के ख़िलाफ़।<br />***<br /><br /><br /><span style="font-size:130%;color:#003333;">शगल</span><span style="font-size:130%;color:#003333;"><br /></span><span style="font-size:130%;color:#003333;"><br /></span>घिर जाती है लड़की<br />रात के अँधेरे में<br />सुबह होने तक बेसाख्त़ा<br />डराते हैं उसे ख्व़ाबों के खौफनाक चेहरे<br />टपकता है<br />टूटकर तारा कोई<br />और अटक जाता है<br />लड़की के उलझे बालों में<br />जिसे वह घबराकर<br />छुड़ाती है हर दिन<br />सूरज की पहली किरणों की<br />कंघी से।<br /></span>***<br /><br /><br /><span style="font-size:130%;color:#003333;">भाषा स्पर्श की</span><br /><span style="font-size:130%;color:#003333;"><br /></span>आहटों का अर्थ, भाषा स्पर्श की<br />वो हृदय समझेगा जिसमें प्यार है<br />सृष्टि का कण-कण बँधा है स्नेह से<br />स्नेह मत विघटित करो संदेह से<br /></span>ये तो प्रकृति का अमर उपहार है<br />यूँ लगेगा जग अगर ना स्नेह हो<br />रक्त बिन निर्जीव जैसे देह हो<br />प्यार है बस इसलिए संसार है<br />विष घृणा का डस न ले जीवन की बेल<br />स्नेह–रस चख लो हो मन से मन का मेल<br />प्यार करना स्वंय पे उपकार है<br />***<br /><br /><span style="font-size:130%;color:#003333;">गीत मेरे !</span><br /><br />गीत मेरे किसी को उदास मत करना<br />किसी नैन–गागर में नीर मत भरना<br />दुख अपना तू मन के शीशे में जड़कर<br />मुस्काना सीख ले ख़ुशी से बिछड़कर<br />पीड़ा की चाप अधर द्वार मत धरना<br />संगम हृदय का हृदय से कराने<br />द्वेष–आँधियों में प्रेम-दीपक जलाने<br />मरने से भी तू सौ–बार मत डरना<br />कंठ मौन होगा ये स्वर मौन होगें<br />एक दिवस जब मेरे अधर मौन होगें<br />पतझड़ के फूलों सा तू मत बिखरना।<br /> ***<br /><span style="color:#330000;"></span><br /><div align="center"><span style="color:#330000;">-जया नर्गिस</span></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092120.post-1116778511208854872005-05-22T09:13:00.000-07:002005-07-17T08:31:54.316-07:00प्रतिक्रियानर्मदातीरे के लिए <span style="font-family:webdings;font-size:78%;"><a href="http://www.narmadateere.blogspot.com">gg</a></span>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.com