tag:blogger.com,1999:blog-130921112007-04-27T07:27:26.404-07:00प्र.ग्रो.स्मृति जनकल्याण मंचDr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comBlogger10125tag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1160285124111992492006-10-07T22:24:00.000-07:002007-01-19T04:49:59.386-08:00श्रीमती स्वराज ग्रोवर* <a href="http://www.swarajgrover.blogspot.com">श्रीमती स्वराज ग्रोवर</a>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1137089294188794992006-01-12T09:49:00.000-08:002006-01-12T10:18:30.760-08:00लोकार्पण समारोह की एक झलक<div align="center"><br /><strong><span style="color:#990000;">लोकार्पण समारोह </span></strong></div><div align="center"><strong><span style="color:#990000;">29- 12-2005</span></strong><br /><br /></div><p align="center"><img style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/g6.jpg" border="0" /><span style="color:#006600;">मुख्य अतिथ </span></p><p align="center"><span style="color:#006600;">श्री हजारीलाल रघुवंशी </span></p><p align="center"><span style="color:#006600;">उपाध्यक्ष विधान सभा म.प्र. </span></p><p align="center"><span style="color:#006600;">का </span><span style="color:#006600;">स्वागत करते हुए श्री पीयूष ग्रोवर</span><span style="color:#006600;"> </span></p><p><span style="color:#006600;"></span> </p><p><span style="color:#006600;"> </p><p><br /></span><a href="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/1600/g11.jpg"><img style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/g11.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /></p><a href="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/1600/g8.jpg"><img style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/g8.jpg" border="0" /></a><br /><a href="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/1600/g4.jpg"><img style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; CURSOR: hand" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/g4.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><a href="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/1600/g3.jpg"><img style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; CURSOR: hand" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/g3.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><a href="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/1600/g2.jpg"><img style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/g2.jpg" border="0" /></a><br /><a href="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/1600/g1.jpg"><img style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/g1.jpg" border="0" /></a>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1135712148647152722005-12-27T11:34:00.000-08:002005-12-28T02:26:26.450-08:00तुम न जाने किस जहाँ में खो गए<div align="justify"><br /><span style="color:#660000;"><strong>-श्रीमती स्वराज ग्रोवर<br /></strong></span>अग्रज श्री स्वदेश कुमार की स्नेहिल छाया में पली बढ़ी इन्द्रा धवन सहित हम दोनों बहने आज कदम-कदम पर स्व. भाई की स्मृति में ऑंखें गीली करने को विवश हैं। माता-पिता सहित परिवार के हम पाँचों सदस्य एक दूसरे पर जान छिड़कते थे। मेरे पिता श्री घनश्याम दत्त जी जो भ्राता जी के नाम से ही लोकप्रिय थे। धर्मसेवी ममतामयी मॉँ कुन्ती देवी के धार्मिक संस्कार एवं पिता जी की कर्मठता भाई स्वदेश कुमार में सहज ही दृष्टिगोचर होती थी। जरूरतमन्दों के लिए तो वे स्वजन जैसे ही सहायक थे। सी. बी. आई. में इन्टेलीजेन्स अफसर होते हुए भी उन्हें पद का किंचित मात्र भी घमण्ड नहीं था यही कारण था कि सम्पूर्ण क्षेत्र इन्हें अपना मानते हुए आदर की दृष्टि से देखता था।<br />अपने कर्तव्य के प्रति सजगता एवं नियमितता उनका विशेषगुण था। यहॉँ तक कि अस्वस्थता में भी बराबर अपने दायित्व के प्रति सजग रहकर जहॉं तक संभव हो अवकाश पर नहीं रहते थे। रविवार को भी उन्हें लागों ने अपने कार्यालय जाते देखा है क्यांेकि उनका कार्य आतंकवादियों की गतिविधियों पर नजर रखना था उन्हें खदेड़ना था जो कि एक बड़ा जोखिम भरा कार्य था। जो डाक पाकिस्तान अथवा अन्य देशों से आती थी उसे सेंसर करना होता था अनेक बार तो ऐसे स्थलों पर पदस्थ रहे जहॉँ आतंकवादियों का वर्चस्व था जो कभी भी अधिकारियों को अपनी गोली का निशाना बना देते थे. इस तरह स्वदेश भैया अपनी जान हथेली पर रखकर देश सेवा के पुनीत कार्य में निष्ठापूर्वक लगे रहते थे।<br />अनेक बार पिताजी ने उनका सिाानांतरण अमृतसर कराने की सोची, किन्तु उनका कथन था कि अगर सभी अपने बेटों को नगर में ले आयेंगे तो गांव की स्थिति कौन सम्हालेगा। उनकी ईमानदारी, लगन एवं देश प्रेम के जज्बे का ही परिणाम था कि भारत शासन ने उन्हें मेडल देकर सम्मानित किया था।<br />भैया स्वदेश का जन्म १० अगस्त १९४३ को पकिस्तान में हुआ था। देश विभाजन के समय भैया मात्र चार वर्ष के थे मेरी उम्र उस समय लगभग एक वर्ष की रही होगी। माता-पिता एवं पूर्वजों का ही सत्कर्म या पुण्य कहिए कि हमारा परिवार अनेक बार साम्प्रदायिक दंगों की चपेट में रहते हुए भी सुरक्षित रहा। पिता जी बताते थे कि एक बार हम चारों अपने घर पर ही थे, उसी समय कट्टरपंथी मुसलमानों ने धावा बोल दिया, दरवाजा भड़भड़ाने लगे पिताजी ने मिट्टी के तेल का पीपा लेकर रख लिया था कि दरवाजा टूटते ही मिट्टी का तेल हम सब अपने ऊपर डालकर जलकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेगें लेकिन ईश्वर ने उस समय भी दरवाजा न खुलने से हमारी रक्षा की इस समय हमारे कई रिश्तेदार उपद्रवियों के शिकार होकर मारे गए। यह भी ईश्वर की ही .पा थी कि पिताजी के एक मुस्लिम मित्र ने अपनी जान की परवाह न करते हुये हमें कुछ दिन अपने घर पर ही रखा। जिस गाड़ी से हमें पाकिस्तान से हिन्दुस्तान आना था वह लूट ली गई तथा कुछ समयोपरान्त ज्ञात हुआ कि उस गाड़ी के सभी हिन्दुओं का कत्ल कर दिया गया। जब-जब भी प्राणों का संकट आया ईश्वर ने हमारी रक्षा की। पिताजी माता जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन परसेवा, परउपकार एवं ईश्वर उपासना में बिताया यही सब संस्कार अग्रज स्वदेश को भी विरासत में मिले थे।<br />मेरे भैया, माताजी और पिताजी को ईश्वर पर अटूट श्रद्धा और विश्वास था। माता जी तो घंटों ईश्वर का ध्यान भजन करती थीं। अपने प्रवचनों में भी सदा परोपकार, दीन दुखियों, असहायों जरूरतमंदों की सेवा पर बल देते हुए ईश्वर उपासना को जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य मानती थीं और यही संस्कार मेरे भाई में थे। घर के पास ही "पिंगलवाड़ा" नाम का विकलांगों का बसेरा हैं जहॉँ प्राय: वहाँ जाकर वे उनकी तन मन धन से सेवा करते थे। किसी दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति को देखते तो तुरंत अस्पताल लेकर उसकी चिकित्सा व्यवस्था करते थे। यहॉँ तक कि जीव जन्तुओं से भी उन्हें लगाव था कुत्ते बिल्ली, किसी जानवर फिर पक्षी को घायलावस्था में देखते तो तुरंत उसका उपचार करवाते और उसे ठीक करके ही चैन लेते।<br />परिवार के प्रति भी भैया सदैव सहिष्णु और सहायक रहे, प्रेम लुटाते रहे घर के छोटे-मोटे कार्य भी रूचि के साथ किया करते थे। बिजली विषयक कार्य में तो उन्हें विशेष रूचि थी बिना किसी प्रशिक्षण के पंखे टी. वी. फ्रिज आदि सुधारने में तो वे माहिर थे ससुराल में भी इन्हीं गुणों के कारण उन्हें दामाद कम, बेटा अधिक माना जाता था।<br />११ मई १९६९ को विवाह के उपरांत भी भैया के व्यवहार में कोई अन्तर नहीं आया जबकि अधिकांश परिवारों में यह नहीं देखा जाता। सुभाष भाभी भी धार्मिक एवं सेवाभावी परिवार से थी। अत: हमारे परिवार में इस प्रकार घुल-मिल गई जिस प्रकार जल में शक्कर या मिश्री घुल जाते हंै। भतीजी १ध्४भाई की पुत्री१ध्२ अनुराधा भी अपने संस्कारवान पति श्री देवेन्द्र एवं बिटिया शिवानी के साथ सानंद हैं. दामाद श्री देवेन्द्र अपनी निजी कम्पनी में कार्यरत् रहकर मस्त व्यस्त हैं। भतीजा शालीन भी अपनी पत्नी ज्योति सहित अपने दो बेटा-बेटी के साथ घर आंगन को ज्योतित किए हुए हैं. इस प्रकार भैया का परिवार एक आदर्श परिवार की श्रेणी में स्वत: ही आ जाता है। सुख शांति सम्पन्नता, खुशहाली, कुशलता सफलताओं से परिपूर्ण भैया-भाभी का परिवार रहा लेकिन काल के क्रूर हाथों ने पलभर में सबकुछ समाप्त कर दिया।<br />मैंने तो भाई को आग्रह करके यहाँ आमंत्रित किया था ताकि जर्मनी से आये मेरे बेटे पीयूष और बहू अर्चना से मिल जायें। कुछ दिन हम सब इकट्ठे आनंद पूर्वक रहंे। भाई और बहिन को वापिस अमृतसर जाना था और भोपाल से उनका रजिर्वेशन था, सबने मिलकर कार्यक्रम बनाया कि भाई और इन्द्रा बहिन को भोपाल तक छोड़ आते हैं लेकिन पहली बार डम्पर चला रहे ड्राइवर ने कार को ऐसी टक्कर मारी कि.......। बार-बार यही विचार मन में आता है कि काश मैं ही ग्रोवर जी के साथ कार में बैठी होती तो इकट्टे ही इस दुनिया से चले जाते, एक साथ जिये एक साथ ही मरते। मेरे भाई तो मेरे पास मेहमान के रूप में आये थे लेकिन उनके बारे में सोचकर सिहर उठती हूँ। भाभी का उदास, मुरझाया चेहरा आंखों के सामने आते ही विचलित हो उठती हूॅ।<br />ईश्वर से धैर्य और शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करती हूँ और परम पिता परमेश्वर से करबद्ध आग्रह करती हूँ कि मेरे भैया की छोटी सी बगिया सदा हरी-भरी रहे, खुशहाल रहे। इस बगिया के छोटे-छोटे प्यारे-प्यारे फूल सदा चहकते महकते रहें और इनकी महक से घर आँगन सुगंधित होता रहे। मेरे भैया देवतास्वरूप इंसान थे और मेरे गुरू भी थे। जीवन जीने की कला मैंने उन्हीं से सीखी मैं अत्यंत विनम्र भाव से अपने प्रेरणा स्त्रोत अपने अग्रज आत्मीय भाई को शत्-शत् विनम्र आदरांजली समर्पित करती हूँ। अब नियति नियंता से यही प्रार्थना है कि ईश्वर अगर पुन: जन्म दे तो स्वदेश भैया ही मेरे भैया बनें।<br />प्रतिदिन उस सर्वशक्तिमान परम् पिता परमेश्वर के प्रति लख-लख धन्यवाद प्रकट करती थी कि उनकी ही असीम कृपा से मुझे मानव जन्म तो मिला ही और वह भी पूर्ण स्वस्थ-सुखी जीवन मिला और इसलिए भी कि मेरा जन्म ऋषि-मुनियों संतों व राष्ट्र पर मर-मिटने वाले देशभक्तों की भूमि भारत में हुआ। और ऐसे घर में जो समाज के प्रति पूर्णत: समर्पित तथा आध्यात्मिक विचारों वाले रहे माता-पिता श्रीमती कुन्ती देवी एवं श्री घनश्याम दत्त जी के यहाँ। इतना ही नहीं, मेरा सम्बन्ध भी संस्कारवान, परोपकारी, सेवाभावी, ईमानदार एवं मानवतावादी वरेण्य व्यक्ति श्री प्रमोद ग्रोवर जी के साथ हुआ।<br />असीम प्रेम और स्नेह करने वाले मेरे ससुर श्री आत्मदेव जी विद्यालंकार, ममता और त्याग की प्रतिभूर्ति मेरी माँ जैसी सास श्रीमती सुशीला देवी, देवतुल्य-पितातुल्य जेठ श्री विजय कुमार जी, देवी स्वरूपा जेठानी श्रीमती कैलाश ग्रोवर, सगी बहनों जैसी दोनों बड़ी ननदें श्रीमती प्रतिभा पुरी और श्रीमती उषा कुमार, नेह लुटाने वाले नन्दोई श्री सहदेव पुरी और श्री कुलदीप कुमार आत्मीयता से सराबोर छोटे जेठ जिठानी श्री सुभाष और श्री सरोज ग्रोवर से भरा पूरा परिवार मुझे सौभाग्य और सौगात के रूप में मिला। इसी के साथ मेरे जिगर के टुकड़े माता-पिता पर जान छिड़कने वाले दोनों बेटे पुनीत और पीयूष, दोनों बिटिया जैसी लाड़ली बहुएँ रोहिणी और अर्चना, इनकी फुलवारी के महकते-चहकते फूल पोता सत्यार्थ और पोती सान्वी मुझे ईश्वरीय उपहार के रूप में मिले!<br />सुख-सौभाग्य का विस्तार इतना कि ग्रोवर जी के एस. पी. एम. होशंगाबाद में सेवाकाल के दौरान कालोनी में सभी वर्गो के कर्मचारी और अधिकारी भी हमारे परम् हितैषी के रूप में हमें मिले। जो आज तक हमसे अभिन्न रहकर जुड़े हैं। मुझे अपने कार्यक्षेत्र में शिक्षा विभाग और समाज के जिन लोगों ने स्नेह सूत्र में बाँधा वे भी हम दोनों के अनन्य बने रहे! परिचय को सम्बन्ध में परिणत करने की हमारे स्वभाव ने इस क्षेत्र को इतना व्यापक बना दिया कि ग्रोवर सा. की सेवा-निवृत्ति के बाद स्थानीय एवं अन्य क्षेत्रों के जनसाधारण से लेकर गणमान्य नागरिक, अधिकारीगण, साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्र के तमाम लोग हमारे हो गए और पग-पग पर जुड़े रहे, सुख दु:ख में साथ रहे!<br />ईश्वर का मेरे परिवार पर वरद हस्त होने के बाबजूद इस भयंकर हादसे के पश्चात् मुझे ऐसा लगा कि शायद मैं ईश्वर पर उतना विश्वास नहीं कर रही होऊंगी जितना करना अभीष्ट था। मेरी ईश्वर भक्ति में ही कमी रही होगी। ईश्वर तो न्यायकारी है हो सकता है पिछले जन्म का फल हो या ईश्वर का अपने चरणों में और अधिक समर्पण का संकेत हो !<br />हमारे दाम्पत्य जीवन यात्रा के प्रस्थान बिन्दु का स्मरण करते हुए मैं अपनी बात आगे बढ़ा रही हूँ। ग्रोवर जी का परिवार और मेरे पिताजी का परिवार तब से प्रगाढ़ सम्बन्धों में जुड़ा था, जब हम दोनों का जन्म भी नहीं हुआ था। ईश्वरीय संयोग यह रहा कि हम दोनों ने अमृतसर की सबसे प्रतिष्ठित संस्था `रामाश्रम हायर सेकेन्डरी स्कूल` में शिक्षा प्राप्त की। लेकिन ये मुझसे काफी सीनियर थे। तब मैं सोच भी नहीं सकती थी कि ये मेरे जीवन साथी बन जाएँगे। उसी संस्था में मेरे पिताजी प्रधानाध्यापक थे। वे छात्र ग्रोवर जी को उनकी प्रखर प्रतिभा, बुद्धिमत्ता, श्रेष्ठ अभिरूचियों और आत्मसम्मानी तथा अन्य स्वभावगत विशिष्टताओं के कारण एक शिष्य के रूप में पसन्द करते थे। श्री ग्रोवर शिक्षा के साथ-साथ साहित्यिक, सांस्कृतिक, खेलकूद, स्काउटिंग, एन. सी. सी. एवं पाठ्येतर कार्यक्रमों, गतिविधियों में सदैव अग्रणी रहकर पारितोषिक प्राप्त करते थे। इसलिए ये गुरूजनों और विद्यार्थियांे में सर्वप्रिय थे।<br />संयोग यह हुआ कि जैसे ही मेरे ससुर जी और सासू जी ग्रोवर जी के लिए मेरे रिश्ते की बात लेकर आए तो मेरे माता पिता सहर्ष तत्काल मान गए। हालांकि मैं उन दिनों एम. ए. १ध्४पूर्वार्द्ध१ध्२ में थी, ये एस.पी.एम. की नौकरी में थे। फिर क्या था, ११ नवम्बर १९६७ में हम दोनों दाम्पत्य के सूत्र में बँध गए। मैं एक मायके से दूसरे मायके में आ गई। ग्रोवर जी अपने पाँचों भाई बहनों में सबसे छोटे थे। छोटी बहू होने के कारण मुझे खूब लाड़-प्यार उंड़ेला जाता था। सो, सासूजी ने मेरा नाम मोहिनी, ससुर जी ने संगीता, ग्रोवर जी ने सुजाता, नंदोई कुलदीप जी ने शबनम रखा। सब अलग-अलग नाम से पुकारते थे। बाद मेरे कहने पर सभी मुझे `शबनम` पुकारने लगे।<br />विवाह पश्चात् एस.पी.एम. में रहते हुए जब मैंने आगे की पढ़ाई पूरी करने की इच्छा व्यक्त की, तो ग्रोवर जी ने खुशी-खुशी बात मान ली और पूरा सहयोग भी किया। उस समय बड़ा बेटा पुनीत गोद में था। यद्यपि अध्ययन में कठिनाई तो आती थी, लेकिन इनकी प्रेरणा और प्रोत्साहन के कारण मैं अध्ययन जारी रख पाई। उसका सुफल यह मिला कि मैंने नर्मदा महाविद्यालय से एम.ए. १ध्४उत्तरार्द्ध१ध्२ प्रथम श्रेणी मेरिट में उत्तीर्ण किया। परीक्षा परिणाम आते ही मुझे उसी दिन इसी कॉलेज में व्याख्याना पद पर अस्थायी नियुक्ति मिल गई। इस नौकरी के दौरान मुझे ग्रोवर सा. का पूरा सहयोग प्राप्त होता रहा। मैं कॅालेज की गतिविधियों का प्रभार भी शिक्षण कार्य के साथ-साथ सुचारू रूप से निर्वाह करती रही।<br />एस.पी.एम. कालोनी में रहते हुए मैंने देख कि सभी कर्मचारी इन्हें इनकी कर्त्तव्य परायणता, ईमानदारी, विनम्रता, योग्यता और सेवाभाषी स्वभाव के कारण बड़ी कद्र करते थे। अपनी पारिवारिक समस्याओं को लेकर भी वहाँ के निवासी इनके पास आते रहते और ये आध्यात्मिक शैली के चमत्कार से सुलझाते। इन्होंने कालोनी वासी ऐसे बहुत-से लोगों को दुर्व्यसनों से घुटकारा दिला दिया, जो बीड़ी सिगरेट पीते थे, माँस-मदिरा का सेवन करते थे। मुझे याद है कि हमारे पड़ोसी श्री राजकुमार और श्री बिलगोत्रा जी को इन्होंने १०००-१००० रू. इनाम देकर सिगरेट छुड़वाई थी। इसी प्रकार अपने सम्पर्क में आने वालों को इन्होंने दुर्व्यसन से मुक्ति दिलवाई और उन्हें सात्विकता में रंग दिया। कोई कर्मचारी यदि अपनी बेटी के विवाह हेतु, स्कूल की फीस या जरूरत में मदद माँगने आते, तो ये तत्काल उनकी मदद करते और कहते कि मानव जीवन मानव की सेवा के लिए ही मिला है। इतना ही नहीं अपनी होम्योपैथी के ज्ञान को भी इन्होंने बीमारों को स्वस्थ करने में लगा दिया। घर में दवा नहीं होती, तो बाजार से खरीदकर मुफ्त उन्हें देते थे। किसी के अधिक बीमार होने पर ये उसे भोपाल, इन्दौर तक साथ लेकर जाते और स्वस्थ कराकर ही लौटते। वर्क्स मैनेजर श्री आई.जी. बुद्धिराजा, सहायक वर्क्स मैनेजर श्री सी.पी.भाटिया, अधिकारी श्री एस.के.चावला के अत्यधिक बीमार होने पर ये उन्हें भोपाल ले गए और सकुशल स्वस्थ कराकर लाए। ऐसे कई उदाहरण मुझे याद हैं।<br />हमारे कालोनी वाले घर में सावित्री और भगवती १ध्४आपस में ननद-भाभी१ध्२ दो महिलाएँ काम करती थीं। उनके बच्चों को बस्तों, काँपी, किताब, ड्ेस, पेन-पेंसिल आदि लाकर ये इस प्रकार देते थे, जैसे कोई अपने बेटे-बेटी को लाकर देता है। समय निकालकर हम उन दोनों बच्चों को पढ़ा दिया करते थे। इनमें से एक पढ़ लिखकर आज शासकीय सेवा में है, और हमें खूब मानता है। मुसीबत में किसी की मदद करने के लिए ये सदैव तत्पर रहते थे। महाप्रबंधक श्री गुरमीत सिंह के बंगलेे पर एक बाई काम करती थी। कुछ असामाजिक तत्वों ने उसके भोले-भाले बेटे को हत्या के झूठे केस में फँसा दिया। माँ की हालत पागलों जैसी हो गई। वह आत्महत्या करने को उतारू हो गई। ग्रोवर जी उसकी मदद को आगे आए और दिन-रात कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते-काटते अंतत: उसके बेटे को बरी करवाकर चैन की साँस ली। ये दयालु स्वभाव वाले थे। नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद करते थे। चाहे उसमें इन्हें हानि ही क्यों न उठानी पड़े। इनके निधन के तीन-चार माह बाद जब मैं जरूरी कागजातों को व्यवस्थित कर रही थी, भोपाल स्थित मकान की रजिस्ट्री पर कोर्ट की मुहर लगी देखकर चौंक गई। बाद में पता करने पर जाना कि किसी लड़के की जमानत के लिए इन्होंने कोर्ट में रजिस्ट्री पेश की थी। हम उस लड़के को जानते भी नहीं थे। दुर्घटनाग्रस्त लोगों के प्रति भी वे काफी संवेदनशील थे। रास्ते भी कभी कोई दुर्घटना देखते तो घायलों को चिकित्सालय पहुँचाने में जुट जाते। एक दिन हम दोनों स्कूटर से इटारसी जा रहे थे। रास्ते में एक दूध वाले साइकिल सवार को जीप वाले ने टक्कर मार दी। घायल होकर वह लहूलुहान झाड़ियों में पड़ा था। हमने गाड़ी रोकी और सहायता को उतर पड़े। हमने एक ट्रक रूकवाकर घायलों को अस्पताल तक पहुँचाया। हम इटारसी नहीं गए होशंगाबाद अस्पताल पहुँचकर घायल को इलाज के लिए दाखिल कराया।<br />ग्रोवर जी इतने उदारमना और दूसरों के काम आने वालों में से थे कि मृत्यु पूर्व उन्होंने अपनी आँखें, किडनी अंगों को दान करने की बात कई बार मुझसे दोहराई। इस हेतु उन्होंने संकल्प पत्र भी भरे थे। लेकिन दुर्घटना के दिन भाई और पति की मृत्यु ने हमें ऐसा छला कि हम उनकी उस उत्कट इच्छा को पूरा नहीं कर सके, इसका हमें मलाल बना रहेगा।<br />मेरे पति ग्रोवर जी आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। वे संध्या, ध्यान, उपासना में पर्याप्त समय देते थे। ईश्वर पर उन्हें अटूट श्रद्धा और विश्वास था। हमारे निवास पर आध्यात्मिक साहित्य, होम्योपैथी और एक्यूप्रेशर की पुस्तकें रहती हैं। ये अक्सर अध्ययन करते रहते थे। विपश्यना ध्यान पद्धति, सहजयोग, सहजमार्ग ध्यान पद्धति तथा वैदिक ध्यान पद्धति का इन्हें गहरा ज्ञान था। ब्रह्ममुहूर्त में मेरी नींद खुल जाती, तो इन्हें ध्यान मुद्रा में लीन पाती। देखकर प्रसन्नता और संतोष का अनुभव होता कि मैं ईश्वर उपासना में इतना समय नहीं दे पाती, तो कम-से-कम मेरे पति तो पर्याप्त समय देते हैं। आध्यात्मिक विचार और संस्कारों ने उन्हें साधु स्वभाव का बना दिया था। सुखद समाचार पाकर अत्याधिक प्रसन्न न होना और दु:खद क्षणों में अत्याधिक विचलित न होना- ये लक्षण साधु स्वभाव के परिचायक हैं। ये बात उनमें थी। हमारे घर के सामने ही पड़ोस में `कुबेर` कंपनी के प्रबंधक विशाल मलिक रहते थे। सेवानिवृत्ति के बाद ग्रोवर जी को जो धन राशि मिली थी, विशाल के बार बार आग्रह करने पर हमने साढ़े तीन लाख रूपये कंपनी में जमा कर दिए। ये पड़ोसी धर्म का बखूबी निभाते थे। कुछ माह वह कंपनी डूब गई और हमारी जीवन भर की मेहनत व ईमानदारी की कमाई भी डूब गई।<br />मैं तो परेशान हो गई, लेकिन इन पर कोई असर नहीं ! कहने लगे ईश्वर को यही मंजूर होगा पिछले जन्म का कर्ज रहा होगा। चिन्ता नहीं करनी चाहिए। जीवन को सदा सत्कर्म में लगाओ।<br />ऐसे ही एक बार नासिक में बड़े बेटे पुनीत के घर से दो लाख रूपये मूल्य के गहने चोरी हो गए। फोन पर खबर मिलने पर ये शांत भाव से सुनते रहे। मैंने जोर देकर इन्हें नासिक भेजा अगले दिन ये वापस भी आ गए। बड़े निश्चित भाव से कहने लगे पुलिस चोरी का पता लगा रही है। आज ७-८ साल हो गए !<br />मुझे यह कहते हुए फक्र महसूस होता है कि उनके विराट व्यक्तित्व व कृतित्व के बावजूद मुझे कभी बौनापन या उपेक्षा का अनुभव नहीं हुआ। मुझे भी राष्ट्रपति पुरस्कार हेतु तैयारी कराने में उन्होंने बड़ी मेहनत की थी। मुझे सम्मानित होने देख वे बहुत प्रसन्न थे। मुझे बरावरी के दर्जे पर रखते थे। एक जिम्मेदार पति के रूप में उन्होंने हर मोर्चे पर स्वयं सफल सिद्ध कर दिखाया था। मेरा, घर-परिवार सबका बहुत ख्याल रखते थे। अपने दाम्पत्य जीवन में कटुता या अनबन के शायद ही कोई क्षण मुझे याद हों। बड़ा मेल और बड़ी अंतरंगता के साथ हम दोनों का जीवन नर्मदा के शांत प्रवाह के साथ चल रहा था।<br />पारिवारिक परामर्श केन्द्र में ग्रोवर जी कलह और विवाद के कारण अलग-अलग रहे पति-पत्नी को इतनी आत्मीयता और गंभीरता से समझाते थे कि वे इनके वशीभूत हो जाते और साथ-साथ रहने को राजी हो जाते। पुनर्मिलन के बाद पति-पत्नी उनका एहसान मानते और कहते कि सर आपकी बात में क्या जादू है! वे इन्हें पिता तुल्य मानते। आज ऐसे कई पति-पत्नी अपने बसेरों में लौटकर सुखी जीवन जी रहे है। ग्रोवर जी के निधन की घटना सुनकर वे फूट-फूट कर रोये हैं। कहते थे हमारे देवता ही चले गए।<br />मधुर स्मृतियों के अनेक चारू चित्र मेरे मानस पटल के एलबम में आज भी उसी ताजगी के साथ अंकित हैं। वास्तव में मैंने उन्हें एक दिव्य पुरूष के रूप में अनुभव किया है। मेरी समस्त उपलब्धियों व सफलताओं के पीछे उनकी ही प्रेरणाओं का सम्बल है। आज भी मैं उनकी दिव्य उपस्थिति का अहसास कर उनको सदैव अपने आस-पास एक छत्रछाया के रूप में विद्यमान पाती हूँ। वे केवल हमारी ही नहीं, बल्कि अनेक लोगों की धरोहर भी रहे हैं। उनके निधन से कई लोगों का मर्म आहत हुआ है और अनेक लोगों ने उनकी यादों को संजों रखा है। मैं तो ईश्वर से यही प्रार्थना करती हूँ कि वे बार-बार हर जन्म में मेरे जीवन साथी के रूप में मुझे मिलते रहें और मेरे जीवन को धन्यता प्रदान करते रहे। </div><div align="justify"><br /><span style="color:#990000;">-श्रीमती स्वराज ग्रोवर</span></div><div align="justify"></div><div align="justify">******<br /><br /></div><div align="center"><span style="color:#660000;"><a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com">मुखपृष्ठ पर पहृँचें</a></span></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1135712043249637152005-12-27T11:31:00.000-08:002005-12-28T09:20:06.913-08:00पद्यमय नमन<span style="font-size:130%;color:#336666;"><strong>सत्पुस्र्ष: श्री प्रमोद ग्रोवर:<br /></strong></span><span style="color:#cc0000;">-शास्त्री नित्यगोपाल कटारे</span><br /><br />दक्ष: मोद-प्रमोदे च धीमानव्यग्रो वर:।<br />आसीच्छान्तश्च पुण्यात्मा श्रीमत्प्रमोद ग्रोवर:।।<br /><br />विवेक विनयी वीर: विधिवेत्ता च वाक्पटु:।<br />सद् व्यवहारेण विख्यात: मित्रेषु स जनप्रिय:।।<br /><br />संगीतस्य सभायां च अत्र साहित्य गोष्ठिषु।<br />प्रवचनेsध्यात्मिके चास्य भवत्यासीदुपस्थिति:।।<br /><br />सत्पुस्र्षोsयं सदाचारी सत्संग-सत्यप्रिय:।<br />कुर्वन् सामाजिकीं सेवां कीर्तिं भूतिं च लब्धवान्।।<br /><br />सुमन: सुप्रिया वाणी अस्यासीत् सुन्दरं वपु:।<br />सर्वांगीण-विकासस्य एष: आदर्श-मानव:।।<br /><br />एष: बहुकाल पर्यन्तं संस्मरणीय: भविष्यति।<br />जीवित यश: शरीरेण अद्यापि स्वराजपति:।।<br /><span style="color:#990000;">-शास्त्री नित्यगोपाल कटारे</span><br /><span style="color:#990000;"><br /></span>*********<br /><br /><br /><span style="font-size:130%;color:#336666;"><strong>रेवा की लहरें तुम्हें करती हैं अब याद<br /></strong></span><span style="color:#cc0000;">-हुकुमपाल सिंह 'विकल'</span><br /><br />ग्रोवर श्री प्रमोद जी का व्यक्तित्व अनूप।<br />सहज सरल सुन्दर सुखद, ज्यों जाड़े की धूप।।<br /><br />बाहर से जितना सुगढ़, भीतर उतना रम्य।<br />संघर्षों को समर्पित, साहस अजित अदम्य।।<br /><br />भाव भरा अन्तस अलस, भावुक भावातीत।<br />बजता था हर साँस में, जीवन का संगीत।।<br /><br />गायन वादन शास्त्र के पंडित परम प्रमोद।<br />या जिनके अन्तस भरा, सात स्वरों का बोध।।<br /><br />जिनकी वाणी में मधुर, बोल बड़े अनमोल।<br />पड़ते थे जिस कान में देते मिश्री घोल।।<br /><br />सत्य शील सद्भाव की, थे वे सच्ची मूर्ति।<br />देते रहे समाज को सदा नई स्फूर्ति।।<br /><br />मिला स्वराज था नेह का, पा स्वराज का हाथ।<br />ऐसी पावन प्रीति का, छोड़ गए क्यों साथ।।<br /><br />जोड़ी थी कितनी सुघड़, सुन्दर सहज सुबोध।<br />दोनों ओर स्वराज था, दोनों ओर प्रमोद।।<br /><br />मीरामयी स्वराज का, अन्तस बहुत पवित्र।<br />अंकित था जिसमें स्वयं, श्री प्रमोद का चित्र।।<br /><br />दोनों का जीवन रहा सदा समर्पण हेतु।<br />जीवन भर सद्भाव का, रहे बाँधते सेतु।।<br />उन्तिस बारह चार को ऐसा आया काल।<br />छीन ले गया हाथ से ग्रोवर को तत्काल।।<br /><br />गए छोड़ संसार तुम, गए राम के धाम।<br />बंधु तुम्हारे नाम को, बारम्बार प्रणाम।।<br /><br />जिनकी साँसों में बसा, सदा हुशंगाबाद।<br />रेवा की लहरें तुम्हें, करती हैं अब याद।।<br /><br />तुम प्रतीक सद्भाव के मानवता के धाम।<br />इसी तरह हर रूप में तुमको रााखे राम।।<br /><br />स्मृतियों का दीप जो, छोड़ गए हैं आप।<br />उसी ज्योति में ढोयेंगे, हम अपना अभिशाप।।<br /><br />तुम स्वराज घर द्वार पर रखना अपनी प्रीत।<br />हृदय हृदय घुलता रहे, जीवन का संगीत।।<br /><br />हम अपनी श्रृद्धांजलि, आदर सहित अपार।<br />अर्पित करते आपको, स्वीकारें साभार।।<br /><br />युग युग तक बिखरी रहें, तात तुम्हारी गंध।<br />आँगन में उगते रहें, जीवन के रस छन्द।।<br /><br /><span style="color:#660000;">-हुकुमपाल सिंह 'विकल'</span><br /><br /><br />*********<br /><br /><br /><span style="font-size:130%;color:#336666;"><strong></strong></span><span style="font-size:130%;color:#336666;"><strong>गर्वीले हिमालय से<br /></strong></span><span style="color:#660000;">-र्प्रो.डॉ.शरद नारायण खरे</span><br /><br />सरल-सहज पर मिलनसार थे, रौबीले थे ग्रोवरजी,<br />स्वाभिमान की पूरी गठरी, गर्वीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />सदा बहुत कम बोला करते, सारा शहर प्रशंसक था,<br />सुनकर तारीफें, शरमाते, शर्मीले थे ग्रोवरजी।<br /><br />आन की खातिर अड़ जाते थे, कभी कोई परवाह नहीं।<br />नगर-मुहल्ले की इज्जत थे, हठ्ठीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />स्वार्थ, कपट, की बातें हों या, व्यर्थ-निरर्थक झगड़े हों,<br />हर अवगुण में बाधक थे, और इक टीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />हर जवान के अभिभावक थे, कथा-कहानी बच्चों की<br />सब पर खुलकर प्यार लुटाते, अपनीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />तेज थिरकता था चेहरे पर, वाणी में भारीपन था,<br />दिखने में तो थे कठोर, पर अति गीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />परंपराएँ, रीति-रिवाजों, सबके पक्के हामी थे,<br />पाप-अनीति देख बिगड़ते, भड़कीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />इंसां की सेवा में तत्पर, मानवता पथ राही थे,<br />आलोक खिलेगा यही सोच था, सपनीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />संस्कार उनको हितकर थे, भारतीयता उनको प्रिय,<br />ऊपर से मॉडर्न वो दिखते थे, पर पीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />जग सुधरेगा यही लक्ष्य था, पीकर गरल सुधा देते,<br />शिव-शंकर, त्रिपुरारी थे वो, सच नीले थे ग्रोवर जी।<br /><br />दृढ़-निश्चय, संकल्प के धनी, मजबूत इरादों वाले थे,<br />दृढ़ता की दीवार में गड़ा, इक कीले थे ग्रोवर जी।<br /><br /><span style="color:#660000;">-प्रो० डॉ॰ शरद नारायण खरे, मण्डला<br /></span><br />********<br /><div align="center"><span style="color:#660000;"><a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com"><br />मुखपृष्ठ पर पहृँचें</a></span></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1135594593620234272005-12-26T02:53:00.000-08:002005-12-26T03:23:58.836-08:00मंच का परिचय<div align="justify">श्री प्रमोद ग्रोवर और श्रीमती स्वराज ग्रोवर ऐसे नाम हैं जो समाज सेवा और जनकल्याण के पर्याय से बन गए हैं। पूरे मनोयोग से समाज के उपेक्षित व निर्धन तथा असहाय लोगों को सम्बल देने व टूटते, बिखरते परिवारों को जोड़ने की अजीब सी धुन में लगे ग्रोवर दम्पती पर नियति ने गत वर्ष ऐसा कहर ढाया कि आज के ही दिन 29 दिसम्बर 2004 को हंसों की इस समाज सेवी जोड़ी में से एक को हमेशा के लिए विधाता ने छीन लिया। श्रीमती ग्रोवर पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा। कार दुर्घटना में उन्होंने अपने पति (श्री प्रमोद ग्रोवर) के साथ-साथ अपने प्रिय भाई (श्री स्वदेश कुमार) को भी खो दिया। अब उनके सामने दो रास्ते थे एक तो घर में बैठकर चुपचाप शोक मनाएँ और दूसरा स्व. प्रमोद ग्रोवर के छोड़े हुए अधूरे कार्यों को दूने उत्साह से पूरे करें। श्रीमती ग्रोवर ने एक वीरांगना की भाँति दूसरा पथ चुना। और वह पथ है समाज सेवा का, जन कल्याण का, लोकहित का।समाज सेवा के इन्हीं सब कार्योँ को मिलजुलकर सुचारु रूप से संचालित करने के लिए ही 'प्रमोद ग्रोवर जन कल्याण मंच' की स्थापना की गई है। इस मंच के उद्देश्य हैं कमजोर व उपेक्षित लोगों की सहायता करना, आपसी कलह से टूटते परिवारों को जोड़ना, नारी प्रगति, निर्धन बच्चों की शिक्षा में सहयोग करना, अन्य समाज के लिए हितकारी कार्य करना। इस मंच से अनेक लब्धप्रतिष्ठ लोग जुड़े हुए हैं।</div><div align="justify"></div><div align="center"><span style="color:#cc0000;">******</span></div><div align="center"><br /><a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com"><span style="color:#990000;">मुखपृष्ठ पर पहुँचें<br /></span></a></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1135580365465402032005-12-25T22:54:00.000-08:002005-12-26T03:46:14.080-08:00मंच के उद्देश्य एवं विधान<div align="center"><br /><span style="font-size:130%;color:#990000;"><strong>प्रमोद ग्रोवर स्मृति जन कल्याण मंच</strong></span><br />होशंगाबाद ( म.प्र. )</div><div align="center">के </div><div align="center"><strong><span style="color:#336666;">उद्देश्य एवं विधान</span></strong></div><div align="center"><strong><span style="color:#336666;"></span></strong></div><div align="center"></div><div align="center">*******</div><div align="center"><br />1- </div><div align="center">सामाजिक जीवन में व्याप्त कुरीतियों, कुप्रभावों, अंधविश्वासों के उन्मूलन हेतु जन जागरूकता विकसित करने हेतु विभिन्न रचनात्मक उपाय तथा सामाजिक नवाचार प्रारंभ करना।</div><div align="center"><br />2-</div><div align="center"> सामूहिक विवाह, विधवा तथा अन्तर्जातीय विवाह के प्रयासों को प्रोत्साहन एवं निष्ठापूर्वक सहयोग देना।</div><div align="center"><br />3-</div><div align="center"> दहेज उन्मूलन अभियान प्रारंभ करना, दहेज प्रताड़ना वाले दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करना एवं सजा दिलवाना ।</div><div align="center"><br />4- </div><div align="center">भ्रूण हत्या के विस्र्द्ध गोष्ठियाँ करवाकर समाज में जागृति लाना।</div><div align="center"><br />5-</div><div align="center"> महिलाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण हेतु संस्थाओं की स्थापना एवं संचालन।</div><div align="center"><br />6-</div><div align="center"> सामाजिक एवं साम्प्रदायिक सद्भाव तथा सौहार्द्रपूर्ण वातावरण के निर्माण हेतु विभिन्न धर्मो, सम्प्रदायों, मतों के प्रति समादर तथा सभी वर्गो एवं धर्मो के उत्सवों में सहभागिता।</div><div align="center"><br />7- </div><div align="center">राष्ट्र प्रेम एवं राष्ट्रीयता की भावना के विकास हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन।</div><div align="center"><br />8- </div><div align="center">सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सामाजिक विकास हेतु विभिन्न कार्यक्रम संचालित करना।</div><div align="center"><br />9-</div><div align="center"> भारतीय भाषाओं के प्रति समादर की भावना के साथ-साथ हिन्दी की विश्वव्यापी प्रतिष्ठा हेतु रचनात्मक गतिविधियाँ।</div><div align="center"><br />10-</div><div align="center"> विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को पुरस्कृत एवं सम्मानित करने हेतु कार्यक्रम आयोजित करना।</div><div align="center"><br />11-</div><div align="center"> नई प्रतिभाओं को अवसर प्रदान कर उनकी प्रतिभा को उजागर करना।</div><div align="center"><br />12-</div><div align="center"> पर्यावरण जागरूकता अभियान संचालित करना।</div><div align="center"><br />13-</div><div align="center"> पॉलिथिन विरोधी अभियान संचालित करना।</div><div align="center"><br />14- </div><div align="center">संस्थाओं में, झुग्गी झोपड़ियों में वृक्षारोपण करना।</div><div align="center"><br />15-</div><div align="center"> प्राकृतिक आपदाओं के समय शासन का सहयोग करना।</div><div align="center"><br />16-</div><div align="center"> महिला एवं बाल विकास की गतिविधियाँ एवं बालश्रम का उन्मूलन तथा बाल विकास एवं कल्याण के कार्य।</div><div align="center"><br />17-</div><div align="center"> वृद्ध आश्रम योजना में सहयोग देना।</div><div align="center"><br />18-</div><div align="center"> अपराधों की रोकथाम में शासन के साथ सहयोग हेतु स्वैच्छिक कार्य।</div><div align="center"><br />19- </div><div align="center">ग्राम विकास के कार्यक्रम प्रारंभ करना एवं झुग्गी झोपड़ी क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था एवं संचालन।</div><div align="center"><br />20-</div><div align="center"> ग्राम विकास के कार्यक्रम प्रारंभ करना एवं झुग्गी झोपड़ी व गंदी बस्ती सुधार के कार्यक्रम।</div><div align="center"><br />21-</div><div align="center"> खेतिहर मजदूरों एवं मेहनतकश मजदूरों के उत्थान एवं कल्याण हेतु प्रयास।</div><div align="center"><br />22- </div><div align="center">बच्चों के स्वास्थ्य सुधार हेतु आवश्यक प्रयास तथा शासन को सहयोग करना।</div><div align="center"><br />23-</div><div align="center"> जेल में कैदियों के सुधार हेतु प्रयास करना।</div><div align="center"></div><div align="center"></div><div align="center"><span style="color:#ff0000;">********</span></div><div align="center"><br /><span style="color:#990000;"><a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com">मुखपृष्ठ पर पहुँचें</a></span></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1135579559699935592005-12-25T22:43:00.000-08:002006-10-07T22:37:18.210-07:00मंच के पदाधिकारी<div align="center"><br /><span style="font-size:130%;color:#cc0000;"><strong>श्री प्रमोद ग्रोवर स्मृति जन कल्याण मंच</strong></span> </div><div align="center">कार्यालय </div><div align="center">'जिजीविषा' कोठी बाजार</div><div align="center">होशंगाबाद ( म.प्र. ) 461001</div><div align="center">*****</div><div align="center"><span style="color:#ff6666;">जालघर/ website-</span></div><div align="center"><a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com"><span style="color:#3333ff;">www.pramodgrovermanch.blogspot.com</span></a></div><div align="center"></div><div align="center">***<br /><strong><span style="color:#009900;">संस्थापक-<br /></span></strong><a href="http://www.pgmanch.blogspot.com/2006/10/blog-post.html">श्रीमती स्वराज ग्रोवर</a></div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">संरक्षक-</span><br />श्री विजय ग्रोवर<br />डॉ० आर.पी.सीठा<br />पं० गिरि मोहन गुरु</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">परामर्शदाता-<br /></span>डॉ० जगदीश व्योम<br />डॉ० जे. पी. पल्हर्य<br />श्री हंस राय<br />श्रीमती कैलाश ग्रोवर<br />श्री पंकज पटेरिया<br />श्री रामनारायण शर्मा<br />श्री एम. पी. मिश्रा</div><div align="center"><br /><span style="color:#339999;">संचालक-<br /></span>श्री पुनीत ग्रोवर<br />श्री पीयूष ग्रोवर</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">अध्यक्ष-<br /></span>श्री जगदीश मिश्र</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">उपाध्यक्ष-<br /></span>श्रीमती शोभा दुबे<br />श्रीमती निर्मला माथनकर<br />श्रीमती आरती दुबे</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">सचिव-<br /></span>श्री बाबूलाल 'कदम`</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">सं० सचिव/प्रवक्ता-<br /></span>श्री शिवानन्द सोनी</div><div align="center"></div><div align="center"><span style="color:#009900;">कोषाध्यक्ष-<br /></span>श्री जगदीश वाजपेयी<br />सांस्कृतिक प्रकोष्ठ-<br />सुश्री जयश्री तरणे</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">साहित्यिक प्रकोष्ठ-<br /></span>सुश्री जया नर्गिस<br />श्रीमती निशा डाले<br />सुश्री श्वेता गोस्वामी</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">जन जागरण प्रकोष्ठ-<br /></span>श्री विनोद दुबे<br />श्री किशोर करैया<br />श्री रामेश्वर पटेल</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">विकलांग कल्याण-<br /></span>श्रीमती रामबाई राय<br />श्रीमती शकुन्तला सीकरी<br />श्री विनोद मुद्गल</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">नशामुक्ति प्रकोष्ठ-<br /></span>श्रीमती कल्पना सक्सेना<br />श्रीमती साधना सोनी</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">रोजगारोन्मुखी प्रकोष्ठ-<br /></span>श्रीमती रेखा शास्त्री<br />श्री अरविन्द शास्त्री</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">साक्षरता प्रकोष्ठ-<br /></span>श्रीमती शशि ठाकुर<br />श्री बाबूलाल चौहान<br />श्री सी.एल. साहू</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">खेलकूद प्रकोष्ठ-<br /></span>श्रीमती किश्वर खान मिर्जा<br />श्री बृजेश व्यास</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">सामिष निषध-<br /></span>श्रीमती सुशीला दीक्षित</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">पर्यावरण प्रकोष्ठ-<br /></span>श्रीमती कल्पना सरकार</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">स्वास्थ्य प्रकोष्ठ-</span><br />श्री सिद्धार्थ दुबे<br />श्री भूपेन्द्र बढ़कुले</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">आयोजन व्यवस्था-<br /></span>श्री संतोष रासगाया</div><div align="center"><br /><span style="color:#009900;">महाविद्यालयीन-<br /></span>सुश्री तृप्ति बिल्लौरे<br />******<br /></div><div align="center"><br /><span style="color:#990000;"><a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com">मुखपृष्ठ पर पहुँचें</a></span></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1135576639760869862005-12-25T21:54:00.000-08:002005-12-26T02:34:53.073-08:00श्री प्रमोद ग्रोवर<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/1600/pramodgrover.jpg"><img style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 123px; CURSOR: hand; HEIGHT: 176px" height="287" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/pramodgrover.jpg" width="171" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />परिचय<br /><br />स्व० प्रमोद कुमार ग्रोवर<br /><span style="color:#336666;">जन्म-</span> 29-12-1939<br /><span style="color:#336666;">जन्म स्थान-</span> अमृतसर (पंजाब)<br /><span style="color:#336666;">पिता-</span> स्व० श्री आत्मदेव ग्रोवर (विद्यालंकार)<br /><span style="color:#336666;">माता-</span> स्व० श्रीमती सुशीला देवी ग्रोवर<br /><span style="color:#336666;">मामा-मामी-</span> श्री विजय ग्रोवर - श्रीमती कैलाश ग्रोवर<br /> श्री सुभाष ग्रोवर - श्रीमती सरोज ग्रोवर<br /><span style="color:#336666;">बहन-बहनोई-</span> श्रीमती प्रतिमा पुरी - स्व.श्री सहदेव पुरी<br /> श्रीमती उषा कुमार - श्री कुलदीप कुमार<br /><span style="color:#336666;">जीवन संगिनी-</span> श्रीमती स्वराज ग्रोवर<br /><span style="color:#336666;">पुत्र- पुत्रवधू-</span> श्री पुनीत ग्रोवर - श्रीमती रोहिणी ग्रोवर<br /> श्री पीयूष ग्रोवर - श्रीमती अर्चना ग्रोवर<br /><span style="color:#336666;">पौत्र-</span> चि० सत्यार्थ ग्रोवर<br /><span style="color:#336666;">पौत्री-</span> सुश्री सान्ती ग्रोवर<br /><br /><span style="color:#336666;">शिक्षा-</span> मेकेनिकल इंजीनियरिंग<br /><span style="color:#336666;">व्यवसाय-</span> प्रतिभूति कागज़ कारखाना होशंगाबाद (म.प्र.)से तकनीकी अधिकारी के रूप में <span style="color:#336666;">सेवानिवृत्त-</span> (31 दिसम्बर 1997)<br /><span style="color:#336666;">जीवन कर्म-</span> <br />*दीन दुखियों, बेसहारों, जरूरतमंदों की तन मन तथा धन से हर संभव सहायता करते रहे।<br />*विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों के पदाधिकारी रहे एवं मानव कल्याण तथा समाज उत्थान हेतु सृजनात्मक कार्य निष्ठापूवर्क समर्पित भावना से जीवन पर्यन्त करते रहे।<br />* परिवार परामर्श केन्द्र में अहम् भूमिका निभाकर अनेक टूटे आशियानों में खुशियाँ लौटाई।<br /><br /><span style="color:#336666;">सम्बद्धताएँ-</span> स्टॉफ एसोसिएशन एस.पी.एम होशंगाबाद अध्यक्ष, सीनियर स्टॉक क्लव -सचिव, अखिल भारतीय खत्री समाज के अध्यक्ष, पंजाबी समाज एस.पी.एम के अध्यक्ष वेलफेयर सेंटर के परामर्शदाता, अखिल भारतीय नारी प्रगति मंच जिला शाखा के जिला संरक्षक, पारिवारिक परामर्श केन्द्र के कार्यकारिणी सदस्य, सहजयोग केन्द्र के संस्थापक, न्यू शिवम व्यावसायिक युवती मंडल के संरक्षक, वागीश्वरी संगीत संस्था के परामर्शदाता, आर्य गुरुकुल होशंगाबाद के सदस्य, एनीबिसेन्ट मानसिक विकलांग संस्था के परामर्शदाता, सहज मार्ग साधक, विपश्यना के केन्द्र के संचालक<br /><br /><span style="color:#336666;">उपलब्धि-</span> अनेक सम्मान एवं उपाधियाँ<br /><span style="color:#336666;">अवसान-</span> 29 दिसम्बर 2004 (कार दुर्घटना में दुखद निधन)<br /> *****<br /><br /><div align="center"><br /><a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com">मुखपृष्ठ पर पहुँचें</a></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1135575375982503392005-12-25T21:25:00.000-08:002005-12-25T22:36:56.963-08:00श्री स्वदेश कुमार<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/1600/swadesh%20kumar.jpg"><img style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 134px; CURSOR: hand; HEIGHT: 184px" height="235" alt="" src="http://photos1.blogger.com/blogger/5497/1090/320/swadesh%20kumar.jpg" width="133" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><span style="color:#990000;">परिचय</span><br /><span style="color:#990000;"></span><br /><span style="color:#336666;">जन्म-</span> 10 अगस्त 1943<br /><span style="color:#336666;">निधन</span>- 29 दिसम्बर 2004 (कार दुर्घटना में)<br /><span style="color:#336666;">जन्म स्थान-</span> डेरा गाज़ीख़ान (पाकिस्तान)<br /><span style="color:#336666;">पिता-</span> श्री घनश्याम दत्त (समाजसेवी)<br /><span style="color:#336666;">माता-</span> श्रीमती कुन्तीदेवी (धर्मसेवी)<br /><span style="color:#336666;">जीवनसंगिनी-</span> श्रीमती सुभाष<br /><span style="color:#336666;">बहन-</span> श्रीमती स्वराज ग्रोवर, श्रीमती इन्द्रा धवन<br /><span style="color:#336666;">पुत्र-</span> श्री शासीन कुमार<br /><span style="color:#336666;">पुत्रवधू-</span> श्रीमती ज्योति<br /><span style="color:#336666;">पुत्री-</span> श्रीमती अनुराधा<br /><span style="color:#336666;">दामाद-</span> श्री देवेन्द्रकुमार गोस्वामी (अमृतसर)<br /><span style="color:#336666;">पौत्र-पौत्री-</span> राजू, गुड़िया, शिवानी<br /><span style="color:#336666;">व्यवसाय-</span> सी.बी.आई. अधिकारी (सेवानिवृत्त अगस्त 2003)<br /><span style="color:#336666;">विशेष-</span> भारत सरकार द्वारा निष्ठापूर्वक शासकीय सेवा के लिए मैडल से साम्मानित।<br /><br /><br /><br /><div align="center">******</div><div align="center"><br /><span style="color:#cc0000;"><a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com">मुखपृष्ठ पर पहुँचें</a></span></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13092111.post-1131386063073960232005-11-07T09:52:00.000-08:002005-11-07T09:54:23.073-08:00प्रतिक्रिया<a href="http://www.pramodgrovermanch.blogspot.com">मुखपृष्ठ पर पहुँचें</a>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.com