tag:blogger.com,1999:blog-13053295.post-8332532276706927052007-03-01T07:52:00.000-08:002007-03-01T07:52:00.000-08:00अरे पुनीत और सुनीत कहीं और क्यों जायें - चिट्ठा जग...अरे पुनीत और सुनीत कहीं और क्यों जायें - चिट्ठा जगत भी कहाँ कम है? कभी तो कोई अनूप हो जाता है और कभी फुरसतिया? अब हम क्या बुलायें उन्हें समझ ही नहीं आता! कोई बात नहीं - हमें तो उनके दोनों ही नामों में आनन्द है।<BR/><BR/>क्यों भाई अनूप जी (ओफ्फो.. वही फुरसतिया जी)!<BR/><BR/>अतुल जी, आपसे पूछे गये प्रश्नों की प्रतीक्षा है। संदर्भ लें <A HREF="antarim.blogspot.com/2007/02/quiz-blogs-movies-books-wish.html" REL="nofollow">प्रश्नव्यूह - चिट्ठे, फिल्में, पुस्तकें और वरदान</A>। कष्ट (यदि हो तो) के लिये क्षमा।राजीवhttp://www.blogger.com/profile/04166822013817540220noreply@blogger.com