tag:blogger.com,1999:blog-12715035.post-1115553559555360532005-05-08T04:57:00.000-07:002005-09-20T09:58:01.976-07:00कविता<div align="left"><strong><span style="font-size:130%;">अराजकता<br /></span></strong><br /><span style="color:#000000;">मैंने सुना है<br />मंदिर की चौखट पर<br />श्रद्धा ने आत्महत्या कर ली<br />मक्ति को डस लिया<br />चंदन में लिपटे विषधर ने<br />भावना का खून हो गया<br />संसद के फ्लोर पर<br />रोशनी कैद है<br />कुबेरों के घर<br />ईमान की भ्रूण हत्या हो गई<br />शांति बाजार में गुम हो गई<br />आशा अंतरिक्ष में जा बसी है<br />करुणा दफन हो गई श्मशान में<br />लज्जा रो–रो कर चट्टान बन गई है<br />ज्ञान बन गया व्यापार<br />बिक रहा है गलियों में<br />अनुभव अंतिम साँसें गिन रहा है–<br />वृद्ध आश्रमों में<br />बुद्धि अभी खिलौने खेल रही है<br />अहंकार ऊँचा सिर किये खड़ा है<br />आस्था को गुण्डों ने अगुआ किया है<br />ईर्ष्या श्रंगार कर अपनी बेटी<br />निन्दा के घर जूस पी रही है<br />पानी की टंकी में घुला है भ्रष्टाचार<br />रिश्वत दफ्तर में पूजा कर रही है<br />राजनीति ने घर्म को घर दबोचा है<br />आश्वासन ओठों का श्रंगार बना है<br />सत्य‚ अहिंसा‚ त्याग‚ पुस्तक के विषय है<br />सहिष्णुता की नाक पर मिर्ची मसल गई है<br />ईश्वर को खरीदने किसने कितना दान किया<br />किसने कितना चंदा दिया<br />कहते हैं कि ऊपर वाला माप रहा है<br />आतंक झोपड़ों में आग लगा<br />बैठा ताप रहा है<br />कलेजा ठंडा कर रहा है<br /></span> ***<br /><span style="color:#660000;"></span></div><div align="center"><span style="color:#660000;">- नर्मदा प्रसाद मालवीय </span></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/12715035-111555355955536053?l=narmadateerenm.blogspot.com'/></div>Dr.vyomhttp://www.blogger.com/profile/07520058687349196109noreply@blogger.com0