tag:blogger.com,1999:blog-12370525.post-1154054647340711672006-07-27T22:38:00.000-04:002006-07-27T22:47:15.073-04:00बारूदी सुरंग ढ़ूँढ़ने वाले चूहेकल ये <a href="http://news.nationalgeographic.com/news/kids/2005/07/rats.html">खबर </a>पढ़ी कि अफ्रीका में एक बड़ा सा चूहा होता है, जिसकी सूँघने की शक्ति कुत्ते जितनी तेज होती है। उन चूहों को बारूदी सुरंगों ढ़ूँढ़ना सिखा दिया गया है। चूहे कुत्ते से सस्ते पड़ते हैं, जो यूरोप से खरीदने पड़ते हैं, और अफ्रीका की गरमी ज्यादा नहीं जी पाते। <br /><br />हर सुरंग ढ़ूँढ़ने पर चूहे को ईनाम मिलता है, एक मूँगफली का दाना।<br /><br />इन सुरंगों की वजह से हजारों जीवन बरबाद हो रहे हैं। ये सरकारों के लीचड़पने का सबूत हैं। <br /><br />इसका योग से क्या लेना? योग आशा का संदेश है। जो दुख अभी झेले नहीं हैं, उनसे बचा जा सकता है। अगर पूरी तरह से नहीं, तो उन्हें कम तो किया ही जा सकता है। इसमें सबसे बड़ी मदद हमारी बुद्धि है। इस साधन से जहाँ बड़ी समस्या थीं अब हल मिल सकता है। इसके लिए बुद्धि को तेज करना और भावुकता से दूर रहना जरूरी है। बुद्धि को सही रास्ते पर जगाना, आत्मचेतना से जीना योग है। <br /><br />तब ये बुद्धि इस दुनिया में दुख कम करने में कुछ कामयाब हो सकती है। कुबुद्धि बारूदी सुरंग लगा रही है। बुद्धिमान जन को आशा और आत्मविश्वास की जरूरत है। तब जाके इस हजारों साल पुरानी कुबुद्धि की आदतों से लड़ा जा सकता है। इसके लिए सही नेतृत्व की जरूरत है। जो सही विचारों को बढ़ावा दे और गलत विचारों को बाहर करे। तब जवानों में आत्मविश्वास और तेज की लहरें दौड़ेंगी। <br /><br />चबूत्रे पर चढ़ के अस्सी साल के नेता, अंग्रेजों के टट्टू संचार साधन ये तेज नहीं फैला सकते।jai hanumanhttp://www.blogger.com/profile/12333747248023611898noreply@blogger.com1