tag:blogger.com,1999:blog-12370525.post-1140493075569230242006-02-20T22:30:00.000-05:002006-02-20T22:59:53.333-05:00पायो गुरकिरपापायो गुरकिरपा<br />जीवन से परशान होके मैं ॠषिकेश में गुरुजी के पास पहुँच गया। मैंने कहा, सब शास्त्र कहते हैं कि हम सत्चिदानन्द हैँ। मैं सत् हूँ ये तो साफ है। नहीं तो परिवर्तन को पहचानूँगा कैसे। मैं चित हूँ ये भी साफ है। नहीं तो कौन पूछ रहा है?<br /><br />लेकिन आनन्द कहाँ है? मुझे को सिर्फ परेशानी और दुख ही दिखाई पड़ रहे है। <br /><br />उन महात्मा ने कहा, वो चींटी को देखो। उसे लकड़ी से छेड़ोगे तो क्या होगा? चींटी लकड़ी से दूर भागने की कोशिश करेगी। चींटी पहले से ही आनन्द में थी। उसे छेड़ा तो उसे पीड़ा का आभास हुआ, और वो फिर वापिस आनान्द की खोज में चल दी। <br />"ये सहज है। ये स्वतः है। ये है। ये बिना कारण है। ये मेरे से अलग नहीं है। ये मैं ही हूँ। "<br /><br />बहुत समय लगा मूरख को समझने में।<br /><br />आध्यात्मिक आनन्द कोई चरसी की तरह का अनुभव नहीं है। कि बस पड़े हैं कोने में। जब कोने से उठे तब? क्या ये सहज है? क्या आनन्द इतना स्वार्थी है?<br /><br />"गुरकिरपा से अब मैं सिंह गर्जन कर रहा हूँ। <br />अब मैं आनन्दित हूँ। <br />अब मैं सहर्ष हूँ। <br />अब मैं सहज हँसमुख हूँ। <br />मेरा उत्साह गुरु की भेंट है। <br />अब मैं सहज सुख हूँ। <br />अब मैं दुख से चौकन्ना हूँ। <br />अब मेरी सहन भेड़िया जैसी है। <br />दुख भेड़ है मैं भेड़िया हूँ। <br />अब मेरी आँखों में तेज है। <br />अब मेरे ह्रदय में अट्टाहास है। <br />अब मेरी साँसों में प्रेम की माला है। <br />अब मैं आशीर्वाद हूँ। <br />अब मैं शुभ हूँ। <br />अब मेरा विश्वास असीमित है। <br />अब मैं बुद्धि की जीत करा सकूँ। <br />अब मेरी चाल में ध्यान है। <br />अब मैं धोखे को पहचान गया हूँ। <br />अब मेरा काम शुरु हुआ। <br />अब मेरी नींद खुली। <br />अब मैं प्रेम में खो गया हूँ। <br />अब मैं कहाँ हूँ? मेरा अन्त कहाँ है? <br />मैं कहाँ शुरु हुआ? अब मेरी सीमा कहाँ है? <br />अब मैं हूँ। <br />अब मैं प्रसन्न हूँ। <br />अब मैं खुशी का दीपक हूँ। <br />अब मैं प्राण विभोर हूँ। <br />अब मैं बालक जैसा उत्साह हूँ। <br />अब मैं चैन पा गया हूँ। <br />अब मैं दुखियों का सेवक हूँ। <br />गुरकिरपा से अब मैं आनन्द हूँ। "<br /><br />ये आनन्द की भूमिका है।jai hanumanhttp://www.blogger.com/profile/12333747248023611898noreply@blogger.com