tag:blogger.com,1999:blog-12370525.post-1143078298777588712006-03-22T20:44:00.000-05:002006-03-22T20:44:00.000-05:00आपका भरपूर स्वागत है छाती ठोक के हमारी निन्दा कीजि...आपका भरपूर स्वागत है छाती ठोक के हमारी निन्दा कीजिए। हम वैसे भी नाज़ुक मिजाज़ नहीं हैं। जहाँ तक आपका सवाल पृथवीराज के बारे में, तो मेरा विचार है कि हाँ, उन्होंने बहुत बड़ी गलती की। वो बहुत महँगी पड़ी भारत को। हाँ ताकत आदमी को जल्दी भ्रष्ट कर देती है। लेकिन मैं उसमें सतर्क रुचि लेने की बात कर रहा था, फँसने की नहीं। हमें मालूम रहे क्या निर्णय लिये जा रहे हैं। अफसर ईमानदारी से काम कर रहे हैं। आरथिक साधनों साधनों का सही इस्तेमाल हो रहा है। <BR/>जैसे बूढे शेर को युवा शेर गद्दी से हटा देतें हैं, ये कुदरती है। इसमें कोई बुराई नहीं है। वृद्ध जनों की उमर है नाती पोतियों के साथ समय गुजारने की। अब जवानों को मौका दें? बदलाव कुदरत का नियम है। पुराना थक गया है तो अब नया खून उत्साह लाएगा। पुराना फेल हो चुका है। और कुछ हो न हो, पुराने को तो हटाना ही पड़ेगा। नया अच्छा भी हो सकता है बुरा भी। लेकिन उम्मीद तो है। इन बूढे तोतों से कोई उम्मीद नहीं।<BR/><BR/>हाँ ये बात सही है कि अतीत इतना बुरा भी नहीं है। हमें सचेत रहने की आदत डालनी है। जो सही वो हमें साफ सही दिखे। जो बकवास है वो हम साफ देख सकें। यानी की हमारी बुद्धी भावुकता के तूफान में न खो जाए। हम अपने भावों के प्रति सचेत रह सकें। भावुकता बुद्धि का नाश कर देती है।jai hanumanhttp://www.blogger.com/profile/04394719654760375506noreply@blogger.com