tag:blogger.com,1999:blog-11918955.post-1151570025530334452006-06-29T04:33:00.000-04:002006-06-29T04:33:00.000-04:00गुज़रे चन्द रोशन पलों से मिलाती है यह धूपज़माने की...गुज़रे चन्द रोशन पलों से <BR/>मिलाती है यह धूप<BR/>ज़माने की सर्द हवायों से<BR/>बचाती है यह धूप<BR/>कैसे जाने दूँ इसको<BR/>मुठ्ठीी से फिसल<BR/>मेरी आत्मा न जाएगी <BR/>देह से निकल ?<BR/>इसी से हुया <BR/>जीवन में सवेरा<BR/>इसी से छंटा<BR/>गहन काला अंधेऱा<BR/>न माँगो मुझसे<BR/>मेरी इकलौती भोर<BR/>मेरी मुठ्ठी में <BR/>इसके सिवाय कुछ न और ।।ratnahttp://soniratnablogspot.comnoreply@blogger.com