tag:blogger.com,1999:blog-118608132009-06-22T08:43:40.349-07:00खाली-पीलीAshish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.comBlogger24125tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1142938222549643602006-03-21T02:50:00.000-08:002006-03-21T02:50:24.393-08:00HOLI HOLI Originally uploaded by खालीपीली. Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1140604040065312522006-02-22T02:27:00.000-08:002006-02-22T02:27:20.070-08:00NWA_08 NWA_08 Originally uploaded by खालीपीली. Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1140603970979863812006-02-22T02:26:00.000-08:002006-02-22T02:26:11.020-08:00NWAIBEX059 NWAIBEX059 Originally uploaded by खालीपीली. Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1139551996380706052006-02-09T22:13:00.000-08:002006-02-09T22:13:16.416-08:00DSC00086 DSC00086 Originally uploaded by खालीपीली. Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1138185918146028142006-01-25T02:45:00.000-08:002006-01-25T02:45:18.173-08:00Republic Day 2006 Republic Day 2006 Originally uploaded by खालीपीली. Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1138113459224407792006-01-24T06:37:00.000-08:002006-01-24T06:37:39.230-08:00PondyandHome 035 PondyandHome 035 Originally uploaded by खालीपीली. Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1126836781748793422005-09-15T18:16:00.000-07:002005-09-15T19:15:01.356-07:00यह अडडा बंद हो गया है !यह अड्डा बंद हो गया है. अब खालीपिली नजर आयेगा अपने खुद के अड्डे पर. मेरी कोशीश रहेगी कि अपने खुद के अड्डे पर नियमीत रूप से लिखुं.चल उड जा रे पन्छी अब ये देश हुवा बेगाना.......Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1126012760679187252005-09-06T06:18:00.000-07:002005-09-06T07:50:46.363-07:00न्यु आरलेन्स और मुम्बईमै अपने आपको मुम्बई और न्यु आरलेन्स से तुलना करने से रोक नही पाया१. कुल बारिशमुम्बई मे (२७ जुलाई) ३७.१ इंच न्यु आरलेन्स - १८ इंच२.जनसंख्या मुम्बई .... १२,६२२,५००न्यु आरलेन्स .... ४८४,६७४३.कुल मौत (४८ घन्टो मे)मुम्बई .....३७न्यु आरलेन्स ..... १००(?)४.सुरक्षित बाहर निकाले गये लोगमुम्बई .....१०,०००न्यु आरलेन्स ..... उफ ?५. हिन्सा और गोलीबारी को घटनायेंमुम्बई ..... ०(शुन्य)न्यु आरलेन्स ..... Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1125689673894015662005-09-02T12:34:00.000-07:002005-09-02T12:40:58.606-07:00कैटरीना का कहर !तुफान गुजर गया है, छोड गया है अपने पिछे जलमग्न शहर, उजडे मकान, पानी मे तैरती लाशे, भुखे प्यासे लोग !तुफान गुजरे हुवे आज पांचवा दिन है. लेकिन आज भी हजारो लोगो के पास रहने के लिये छत नही है, पिने के लिये पानी नही है, खाने के लिये कुछ नही है. एक छत के निचे हजारो लोग रह रहे है, जहा ना मुलभुत सुविधाओ का अभाव है. एक बुढीया व्हील चेयर पर बैठे हुवे ही मर गयी ,किसी को चिन्ता नही है. बस किसी ने उसके उपर Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1125518489843140682005-08-31T12:57:00.000-07:002005-08-31T13:01:29.856-07:00केनेडी क्यों मुस्कराये ?विक्रम विक्रम विक्रम विक्रमबेताल बेताल बेताल बेतालशिर्षक गीत के समाप्त होते ही विक्रम (उर्फ विक्रमादित्य उर्फ विक्की) अपनी तलवार लहराते हुवे, बेताल को कन्धे पर डाल शम्शान की ओर चल दिया. काली घन्घोर रात थी, हाथ को हाथ सुझाइ नही देता था. दिस‍बर की रात की तरह ठंड पड रही थी. ठंड के मारे विक्की के मुंह से एक शब्द बाहर नही आ रहा था. बेताल विक्की की पिठ पर लदे लदे बोर हो गया. बेताल ने बोलना शुरू किया "Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1124766520622626722005-08-22T20:03:00.000-07:002005-08-22T20:08:40.633-07:00क्या आम इंसान जानवरो से भी गया गुजरा हो गया है ?अभी हाल ही मे मैं एंजलिना जोली अभिनीत 'सरहदो से बाहर्'(Beyond Border) चित्रपट देख रहा था, इस बार भी मै इसे पुरा नही देख पाया. ऐसा नही कि मेरे पास समय नही था या कोइ जरूरी काम आ गया. मै हिम्मत नही कर पाता, इसे पुरा देख पाने की. ये चित्रपट मैने इसके पहले भी देखा है. जब पहली बार मैने इस चित्रपट को देखा, तब ही इस चित्रपट ने मुझे अंदर से हिला दिया था. आज भी जब ये चित्रपट प्रसारीत होता है, सोचता हुं कि Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1124465362301154862005-08-19T08:26:00.000-07:002005-08-19T08:29:22.306-07:00ये क्या हो रहा है बी बी सी को ?ये क्या हो रहा है बी बी सी को ? ये शायद नही जानते कि भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी नही अर्जुन सिंह हैं.जब बी बी सी ऐसी गलती करेगा तो बाकी का तो भगवान मालिक है.Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1124244383113544602005-08-16T18:54:00.000-07:002005-08-16T19:10:55.796-07:00हिन्दी सुभाषित सहस्र१.मनुष्य के लिये निराशा के समान दुसरा पाप नही है,मनुष्य को पापरूपिणी निराशा को समुल हटाकर आशावादी बनना चाहिये ।- हितोपदेश२.जीवन एक रहस्य है, जिसे जिया न जा सकता है, जीकर जाना भी जा सकता है लेकिन गणित के सवालो की भांति उसे हल नही किया जा सकता. वह सवाल नही- एक चुनौती है, एक अभियान है। -ओशो ३.शोक मनाने के लिए नैतिक साहस चाहिये और आनंद मनाने के लिये धार्मिक साहस। अनिष्ट की आशंका करना भी साहस का काम Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1123959452566541812005-08-13T11:47:00.000-07:002005-08-13T11:57:32.573-07:00अथः कालेज पुराणे संजय कथाहमारे एक करीबी दोस्त है, जिन्हे हर खबर को सनसनीखेज तरीके से पेश करने मे आनंद आता है. अभी कल ही उनसे बात हो रही थी, बातो का रूख पुरानी यादो की तरफ मुड गया. कालेज की सुनहरी यादे ताजा की गयी,पुराने गडे मुर्दे उखाडे गये. इसी दौरान ये किस्सा याद आया, हमने सोचा एक चटपटा किस्सा है, जिस पर हम एक चिठ्ठा लिख सकते है. बस हमने यह बात अपने दोस्त से कही, वो पुरे हत्थे से उखड गये और हमे धमकी दी कि अगर हमने वो Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1123626762196677362005-08-09T15:31:00.000-07:002005-08-09T15:32:42.200-07:00एक पत्रकार की मौतABC TV के प्रमुख पत्रकार और उदघोषक पिटर जेनिगंस की फेफडो के कर्क रोग से मृत्यु हो गयी. ABC के अलावा सभी चैनलो(CNN/NBC/BBC...) ने इस खबर को प्रमुखता दी.मै सोच रहा था कि हमारे देश मे एक पत्रकार या किसी लेखक की मौत की खबर पता नही किस कोने मे चली जाती है ! आश्चर्य़ तो इस बात पर होता है कि हमारे प्रसार माध्यम जिसके बलबुते से चलते है वही उन पत्रकारो लेखको को भुल जाते है. हां यदि प्रकाशक या मालिक की मौतAshish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1123209774874435802005-08-04T19:41:00.000-07:002005-08-04T19:44:52.793-07:00प्रपंच ?मेरे पिछले चिठ्ठे "क्या ऐसा कोई काम है जो आप नही कर सकते ?" के जवाब मे "इ-स्वामीजी" ने लिखाअमरीकी समाज ने जो हासिल किया है वे उसका मूल्य समझते हैं और अपनी सत्ता,संपन्नता को किसी भी कीमत पर खोना नही चाहते. हाँ उनके पास खोने के लिए बहुत कुछ है , खोने का भय ही उन्हे आगे बढाता रहता है. मेरे दृष्टीकोण मे इसीलिए यह एक बौद्धिकतावादी प्रपंचवादी समाज है,प्रपंच एक अच्छे मतलब मे नकारात्मक मतलब मे नही! Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1123123278092787982005-08-03T19:35:00.000-07:002005-08-03T19:41:18.096-07:00क्या ऐसा कोई काम है जो आप नही कर सकते ?आज मै "The Core" हालीवुड का एक चलचित्र देख रहा था. उसमे एक सवांद है जो मुझे काफी अच्छा लगा. नौकरी के लिए साक्षात्कार के लीये ये संवाद उपयोगी हो सकता है.नायक : "Is there anything that you can not do ?" (क्या एसा कोई काम है जो आप नही कर सकते ?)नायीका :"Not I am aware of !"(एसा कोई काम मेरी जानकारी मे तो नही है)ये चलचित्र देखते समय मन अचानक भटक गया और अचानक सोचने की दिशा कहीं और मुड गयी. कहानी कुछ Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1122938049508203082005-08-01T16:09:00.000-07:002005-08-01T16:15:56.010-07:00श्रद्धाजंली :प्रेमचन्द जी की जयंतीआज प्रेमचन्द जी की जयंती है. मैने कुछ दिनो पहले गुगल पर प्रेमचन्द पर खोज की थी, परिणाम मे मुझे सिर्फ २ पृष्ठ मिले थे. आज जब खोज की तो पूरे ४ पृष्ठ मिले. हिन्दी चिठ्ठाकारो ने तो उन्हे याद किया ही, साथ मे बी बी सी ने एक विशेष पृष्ठ ही उन्हे समर्पित कर दिया.मैने प्रेमचन्द को कबसे पढ्ना शुरू किया ठीक से याद नही, लेकिन जब से भी शुरू किया उनकी हर रचना ने मेरे दिल को छुवा. मैने उनमे एक ऐसा लेखक मह्सुस Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1122933376201912492005-08-01T14:55:00.000-07:002005-08-01T15:05:21.223-07:00शादी की वजह : एक श्रद्धाजंली मुंशी प्रेमचंद जी के लिएजब मैने अपना पिछला चिठ्ठा लिखा था "एक कुंवारे की व्यथा" ,मुझे याद आ रहा था कि मैने पहले कभी शादी करने की वजहो की एक सुची कहीं पढी है. लेकीन कहाँ और लेखक का नाम याद नही आ रहा था. मै सोच रहा था हो ना हो इस सुची के जनक शरद जोशी जी या परसाई जी होंगे. यदी ये महानुभाव इस सुची के लेखक नही है, तो रवीन्द्रनाथ त्यागी जी होंगे.मैने सोचा चलो कुछ सोध की जाए. घर (भारत फोन किया), छोटे भाई को अपनी आलमारी खोल कर Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1122174916500394692005-07-23T20:07:00.000-07:002005-07-23T20:15:16.523-07:00जिन्दगीजिन्दगीएक शामबैठा था एकान्त मेंगुनगुना रहा थावही पुराना एक तरानामै और मेरी जिन्दगी .अचानक मन मे उठाएक सवालउससे जुङे फ़िर अनेकों सवालक्या इन्ही सवालो कानाम है जिन्दगी ?या इन सवालो का जवाबहै जिन्दगी ?मैने देखा हैअपने खूबसूरत कल का एक सपनाक्या यही है जिन्दगी ?या अपने ख्वाबो को पा लेनाहै जिन्दगी ?अपनी मंजिल की ओर हर कदमहै मेरी जिन्दगीकोई पडाव नहींएक सफर है मेरी जिन्दगी.Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1120615470187304632005-07-05T18:34:00.000-07:002005-07-05T19:04:30.193-07:00एक कुंवारे की व्यथा !४ जुलाई का लंबा सप्ताहांत आया. सारी देशी बिरादरी का सप्ताहांत का कार्यक्रम बन गया. हम हमेशा की तरह परेशान क्या करे ? पूरे तिन दिनो के सप्ताहांत पर निन्द्रालोक की यात्रा भी आसान नही, वो भी गर्मियों मे(वैसे तो सर्दियो मे पूरे ४ दिन सोने का हमारा विश्व किर्तिमान है, जिसमे से हमने भोजन और अन्य आवश्यक दैनिक क्रियाओं का समय ह्टा दिया है). जगजीत को सुने ,किशोर को सुने, पर पुरे तिन दिन ? हमारी इस समस्या Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1120013254433900992005-06-28T19:38:00.000-07:002005-06-29T19:17:43.080-07:00माजरा क्या है ?भई, हम तो समझ ही नही पा रहे हैं माजरा क्या है ? ये क्या हो रहा है हमारे इडिया दैट इज भारत मे ? युँ ही चलता रहा तो हम तो बाल नोंच नोंच के गन्जत्व को प्राप्त हो जायेगें! कोइ हमे समझाए माजरा क्या है ?अभी कल ही कपिलदेव जी बतीया रहे थे, क्या कहा कौन कपिलदेव ? अरे वही कपिल पाजी जो दूरदर्शन पर बिना ग्लीसरीन के रो रहे थे. याद आया कुछ ? हाँ तो कपिलदेव जी बतीया रहे थ कि सचिन को क्रिकेट से सम्मानजनक विदाई Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1119720768770665812005-06-25T10:31:00.000-07:002005-06-25T11:47:12.543-07:00कहां से शुरु करुं ?(कहां से शुरु करुं ?तो भैया हमने अपने चीठ्ठे का श्रीगणेश कर दिया. लेकीन विधीवत शुरुवात अभी शेष है .जिन्दगी के २८ वसन्त गुजार दीये हैं. यादो के झरोखे से देखो तो पता चलता है कि यदी लिख्नना शुरु कर दिया तो शायद एक पुरा ग्रन्थ बन जाएगा,शायद महाभारत से भी बडा.लीखना तो सब कुछ् है. लेकीन कहां से शुरु करुं ?जब कुछ होश सभांला था, तब खुद को प्राथमिक पाठ्शाला मे पाया था. बचपन की उन खट्टी मिठि यादो की काफी Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com7tag:blogger.com,1999:blog-11860813.post-1119303969372150672005-06-20T14:44:00.000-07:002005-06-20T20:52:07.123-07:00कहाँ से शुरु करुँ ?युं तो मै इद्रंजाल पर हिंदी की लगभग सभी पत्रीकाओ का नियमीत पाठक था, समाचार भी बी बी सी या अमर उजाला पर ही पढता था । ब्‍लागर का नाम तो सुन रखा था, लेकिन ये होता क्‍या है इससे पुरी तरह अजांन था । अभिव्‍यक्‍ति पर चलो चिठ्‍ठा लिखें पढा । अब हमारे ज्ञानचक्षु खुले और हम चिठ्‍ठा की महिमा से अवगत हुवे। उसके बाद हमने आरभं किया , इद्रंजाल को खंगालना । पता चला हम इस तीव्र सुचना तकनीक के युग मे रहते हुवे( Ashish Shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/02400609284791502799noreply@blogger.com1