tag:blogger.com,1999:blog-11200420.post-31936002291235079812008-02-21T11:09:00.000-08:002008-02-21T11:09:00.000-08:00दीपा जी आप ने कविता के रुप मे कया कुछ नही कह दिया,...दीपा जी आप ने कविता के रुप मे कया कुछ नही कह दिया,आप की कविता सुन्दर नही अति सुन्दर हे, ओर यह पक्तिया तो मन को बहुत भायी<BR/>*थी चैतन्य जब आस्था<BR/>मन में बसते थे तब राम<BR/>नहीं खोजता था तब कोई<BR/>जा-जाकर चारों धामराज भाटिय़ाhttp://www.blogger.com/profile/10550068457332160511noreply@blogger.com