tag:blogger.com,1999:blog-111073332007-11-13T15:26:42.960-05:00निठल्ला चिन्तनTarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comBlogger39125tag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1139368961442182332006-02-07T22:16:00.000-05:002007-11-13T15:25:35.045-05:00हमने भी बदला पालाचलो भाग चलें वर्डप्रेस की ओर। कभी कभी दूसरे की ठोकर से भी सीखने को मिलता है, इसलिये ब्लोगसपॉट अभी भी बना रहेगा।
निठल्ला चिंतन यहाँ से किया जा रहा है Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1138939419612534352006-02-02T22:59:00.000-05:002006-02-22T20:30:37.666-05:00आवारा पागल दीवाना यानि परफेक्ट लवरक्या वक्त आ गया है, जिस बारे में आज तक कभी सोचा नही उसके बारे में लिखना पड़ रहा है। संतोषी माता वाले पर्चे कभी आगे नही बड़ाये, चेन-मेल की चेन कभी किसी को फार्वड नही करी लेकिन यह सोच के इसे लिख रहा हूँ चलो इसमें कुछ तो मेहनत है (अलका मेहनत पर ध्यान दिया जाय)।
आवारा पागल दीवाना होना यह प्रेमी कहलाने या बनने से पहले की पूर्व आवश्यकतायें हैं, अगर यह गुण आप में नही तो बेहतर होगा कि कोई और कैरियर Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1138669919523270312006-01-30T20:10:00.000-05:002006-02-01T08:37:35.616-05:00परित्रना - एक नई राजनीतिक पार्टीपहले पांच पांडव, फिर रंग दे बसंती के पांच युवा और अब आई आई टी के ये पांच नवजवान। अच्छे खासे कैरियर को लात मार देश की हालत सुधारने का बीड़ा उठाया, और एक नयी राजनीतिक पार्टी की नींव रखी, जिसका नाम है - परित्रना, जिसका मतलब होता है विभिन्न कारणों से मिली मुश्किलों से मुक्ति।
मैं तो यही चाहूँगा कि बस राजनीति की गंदगी से बच के ये लोग अपने काम में सफल हों। अगर आप विस्तार से ये खबर पढ़ना चाहें तो Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1138487546888592672006-01-28T17:31:00.000-05:002006-04-19T20:29:17.756-04:00रंग दे बसंतीअगर आप सोचते हैं कि रंग दे बसंती एक देश भक्ति की फिल्म है तो आप गलत सोचते हैं, और अगर आप सोचते हैं कि रंग दे बसंती एक देश भक्ति की फिल्म नहीं है तो भी आप गलत सोचते हैं। क्यों खा गये ना गच्चा, यही इस फिल्म की तारीफ है कि फिल्म खत्म हो जाती है और आप यह निर्णय नही ले पाते।
पूरी फिल्म की कहानी तो मैं बताऊंगा नहीं लेकिन कोशिश करता हूँ कि इस पोस्ट के अंत तक इतना जरूर लिख दूँ कि आप थियेटर Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1138159766133272772006-01-24T22:28:00.000-05:002006-01-28T13:27:01.856-05:00इतिहास कहीं परिहास ना हो जायेअगर आप को स्कूल के बच्चों के पाठयक्रम के लिये अमेरिका का इतिहास लिखने के लिये कहा जाय तो आप क्या करेंगे। यही ना कि अमेरिका में उन लोगों से सम्पर्क करेंगे जिन्होने वहाँ के स्कूल के लिये इतिहास का पाठयक्रम लिखा हो या फिर अमेरिका के किसी एक या दो इतिहासविद् से सम्पर्क कर मदद लेंगे। अगर आप हाँ कह रहे हैं तो मैं कहूँगा कि हमारी इसी दकयानूसी सोच के लिये पश्चिम वालें हमें पिछड़े देशों की कतार Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1137974397742884762006-01-22T18:55:00.000-05:002006-01-22T19:01:33.766-05:00अगर तुम ना होतेमैं इस नाम की फिल्म की बात नहीं करने जा रहा बल्िक एक काल्पनिक लेख की बात कर रहा हूँ। धार्मिक भावना वाले व्यक्ति को हो सकता है इसे पढ़ के ठेस पँहुचे (जिसका मेरा कतई इरादा नही है), इसलिये गुजारिश है कि वो इसे या तो ना पढें और या फिर निठल्ला चिंतन समझ पढ़ने के बाद भूल जायें।
ना जाने ये कलयुग का असर था या राक्षस योनि में जन्म लेने का असर, बार-बार पृथ्वीवासियों द्वारा अपने को 'घर का भेदी' कहेTarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1137635429439236092006-01-18T20:47:00.000-05:002006-02-03T07:55:07.120-05:00अंधेर नगरी, सभी हैं राजाएक बार मैं जब 'अमेजिंग रेस' (लाजवाब दौड़) देख रहा था तब किसी प्रतियोगी ने भारत (लखनऊ और उदयपुर शायद) से वापसी का हवाई जहाज पकड़ते वक्त बोला था, "ओ.के, बैक टू सिविलाईजेसन'। उस वक्त सच मानिये तो बहुत चुभी थी ये बात। लेकिन इस बार जब मैं इंडिया होकर वापस आया तब मुझे लगा कि एक ऐसे व्यक्ित के लिये जो ताउम्र अमेरिका से बाहर ना गया हो वो सब कहना स्वाभाविक ही था।
भारत में अपना रैन बसेरा 'मंगल-मंगल' Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1137172022605619592006-01-13T12:02:00.000-05:002006-01-13T12:08:38.970-05:00मेरी भैंस को डंडा क्यों मारायहाँ महमूद का गाया कोई गीत नही सुनाया जा रहा बल्कि ऐसा ही कुछ कहना है मेनका जी का। मेनका कौन? अरे वही जो 'एनीमल वेलफेयर बोर्ड आफॅ इंडिया' (AWBI) की सदस्या हैं, और संयोग से नेता भी। ये सारा हल्ला-बोल हो रहा है आने वाली नई फिल्म 'रंग दे बसंती' में हुए कुछ घोड़ों के इस्तमाल पर।
इनका कहना है, कानून के अनुसार इस संस्था से इजाजत लिये बगैर कोई किसी जानवर को अपनी फिल्म में कोई भी रोल नहीं दे Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1136314027016606802006-01-03T13:45:00.000-05:002006-01-03T14:12:25.026-05:00निठल्ले दोहेमेरा तेरा करता रहता ये सारा संसार,
खाली हाथ सभी को जाना छोड़ के ये घरबार।
उत्तर, दक्षिण, पूरब पश्चिम, चाहे तुम कहीं भी देखो,
वही खुदा है सब जगह, घर देखो या मंदिर देखो।
जब से जोगी जोग लिया, और भोगी ने भोग लिया,
तब से ही इस कर्म गली में, कुछ लोगों ने ढोंग लिया।
पहन के कपड़े उज्जवल देखो, वो चला मंदिर की ओर,
मन के चारों ओर लिपटी है, गंदगी की डोर।
आज घटी एक घटना, कल बन जायेगी इतिहास,
पैर फिसल केTarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1135124428933996062005-12-20T19:17:00.001-05:002005-12-20T19:22:51.273-05:00तलाशगुरू गोविंद दोऊ खड़े, काके लांगू पाँउ, बलिहारी गुरू आपनो, गोविंद दियो बताय। कबीर खुशनसीब थे जो उन्हें ऐसा गुरू मिला कि गुरू और गोविंद का फर्क पता चल गया। अब अपनी समस्या भी कुछ ऐसी ही है, ना गुरू का पता ना गोविंद का। अब लगे हाथ ये भी बताते चलें कि ये सब किस संदर्भ में कहा जा रहा है।
यह सब कहा जा रहा है इंडीब्लागीस के नामांकन के लिये। गुरू का पता तो आप लोगों कि टिप्णियों से चलेगा लेकिन गोविंद Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1130624492795841612005-10-29T18:19:00.000-04:002005-10-29T18:21:32.823-04:00आतंकवादः दिल्ली में धमाकाएक के बाद एक तीन चार विस्फोट, क्या ये भूकंप पीड़ितों की मदद करने के बदले मिला तोहफा है। राजनीतिक मजबूरियों के चलते अभी तक किसी से यह कहते भी नही बना कि ये वाकई में आतंकवादियों का ही काम है, अभी तक सिर्फ शक ही किया जा रहा है। जहाँ खुशियों का मंजर होना चाहिये था वहाँ अफरातफती और दहशतगर्दी का आलम है। पड़ोसी देश ने सहानुभूति दिखायी, लेकिन क्या ये काफी है - नही बिल्कुल नही। अगर उन्हें सचमुच में Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1130465570605873172005-10-27T22:09:00.000-04:002005-10-28T16:09:20.186-04:00काला सोनासोना चाहे काला हो या पीला जनता के बीच हमेशा लोकप्रिय रहता है चाहे वो जरूरत के चलते हो या फिर पसंद के। फिलहाल यहाँ पर बात हो रही है काले सोने कि यानी पैट्रोल ( अमेरिका में इसे गैस कहते हैं) की। पिछले ३-४ महीनों से पैट्रोल (कच्चे और पक्के) के बड़ते दामों से जनता का बुरा हाल था, पैट्रोल भराने को जाते तो पसीना छुटने लगता। पैट्रोल पंप १ दिन में दो-दो तीन-तीन बार दाम बड़ा रहे थे। कुल मिलाकर कहानी Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1130462634833152502005-10-27T21:21:00.000-04:002005-10-27T21:23:54.843-04:00बात निकलेगी तो.....'बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी'.....जगजीत सिंह की गायी ये गजल किसी को पसंद आये या नही लेकिन इन शब्दों में बहुत दम है। बात शुरू हुई थी 'तेल के बदले खाना' (आयॅल फॉर फूड) के पीछे छुपी कहानी का पता लगाने से और खत्म हुई एक इंटरनेशनल घोटाले में जाकर। जिसमें २२०० कम्पनियों और कुछ नेताओं के शामिल होने का खुलासा हुआ है। ये सब हुआ यूएन की नाक के ठीक नीचे।
विस्तार से यहाँ पढिये।Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1128367971919194052005-10-03T15:31:00.000-04:002005-10-03T15:32:51.926-04:00एक और चौपालअक्षरग्राम की तर्ज पर एक और चौपाल, लेकिन ये चौपाल है अंग्रेजी में और इसे ये लोग कहते हैं - इंटेंटब्लोग। जाहिर है आप सवाल करेंगे कौन हैं ये लोग? सब को तो मैं नही जानता (शायद आप जानते हों), इनमें से कुछ हैं - दीपक चोपड़ा, शेखर कपूर, नंदिता दास, राहुल खन्ना, अनुपम खेर, मिलिंद देवड़ा, मुजफ्फर अली, राहुल बोस ..........बाकी आप खुद ही देख लिजिये।Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1126804973041445172005-09-15T13:22:00.000-04:002005-09-15T13:22:53.066-04:00प्रेम कविताप्रेम कविता लिखने की, एक दिन हमने भी ठानी
लिखने से पहले मन बोला, कहाँ है दिल की रानी।
कहाँ है दिल की रानी, जो प्रेम रस को घोले
अपना भी दिल कभी, कुछ इलु इलु बोले।
आये कोई, हमें भी, जो थोड़ा दर्द दे जाय
कवि ना बन पाये ये दिल तो शायर बन जाय।
तभी अचानक सामने, आयी अति सुंदर बाला
चंदा सा मुखड़ा था, और थी हाथों में माला।
आकर बोली, अब तक तुम, छुपे कहाँ थे नाथ
चाहे कितनी प्रलय आये, रहे Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1126632212227108722005-09-13T13:22:00.000-04:002005-10-27T21:33:38.753-04:00व्यक्तित्वकालेज के वक्त लिखी एक कविता -
आड़ी तिरछी रेखांओ से
बना हुआ
मेरा व्यक्तित्व,
काँटों के बीच फूल सा
खिला हुआ
मेरा व्यक्तित्व।
पत्ता,
सूखा पिला
टहनी,
कुछ सीधी, कुछ तिरछी
पतझड़ के मौसम में
पेड़ों का कैसा व्यक्तित्व,
शायद
ये मेरा व्यक्तित्व।Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1126546217291990632005-09-12T13:29:00.000-04:002005-09-12T13:31:44.976-04:00Indian's Death Toll 585 - EncephalitisSince Hurricane Katrina slammed gulf coast of USA, hundreds of article or post has been written about how USA handled the relief effort even most of the Indian papers and bloggers have written criticism about it, some known so called columnist also expressed their point of view or criticism. The offical death toll is around 400. While in India, 585 the number of deaths (all children) reported so Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1126281888164198022005-09-09T12:04:00.000-04:002005-09-09T12:07:19.070-04:00अभी दिल्ली थोडा दूर हैआज ऐसे ही थोडा खाली वक्त मिला तो वीकीपीडिया पर सर्च किया और पाया नंबर के खेल में हिंदी ७२ वें नंबर पर। इससे थोडा ही ऊपर हैं - मराठी (६८), तेलगू (६७), तमिल (६९), बोस्नियन (५०), ये देश तो शायद ऊतराचंल जितना ही बडा हो। इसलिये भाईयों और बहिनों जितना हो सके, इसमें भी थोडा योगदान की जरूरत है। अब तक टोटल भाषा - २०४ सारी लिस्ट आप भी देखिये....Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1125762580842341932005-09-03T11:44:00.000-04:002005-09-03T14:16:13.830-04:00हिन्दी सुभाषित सहस्र: १२वीं अनुगूँजगागर में सागर भरने की कोशिश में अपनी तरफ से कुछ बुंदें - देर से ही सही पर बरसी तो।
सफलता
1. हार का स्वाद मालूम हो तो जीत हमेशा मीठी लगती है - माल्कम फोर्बस
2. हम सफल होने को पैदा हुए हैं, फेल होने के लिये नही - हेनरी डेविड
3. पहाड़ की चोटी पर पंहुचने के कई रास्ते होते हैं लेकिन व्यू सब जगह से एक सा दिखता है - चाइनीज कहावत
4. यहाँ दो तरह के लोग होते हैं - एक वो जो काम करते हैं और दूसरे वोTarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1125612305971001922005-09-01T18:04:00.000-04:002005-09-01T18:05:05.983-04:00फैशन और स्कूलऔर अब कुछ स्कूल के बच्चों के फैशन के मामले में। न्यूज में ही दिखा रहे थे नये नये फैशन वाले कपड़े स्कूल पहन के जाने के लिये, और न्यूज टॉपिक को नाम दिया गया - "बैक टू स्कूल फैशन"। अब कोई इन्हें कैसे समझाये कि बच्चे अगर अपना ध्यान फैशन में लगायेंगे तो पढ़ेंगे कब और कैसे। स्कूल शिक्षा का माध्यम है बेहतर है कि उसे इसी के लिये जाना जाय।Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1125611590056635752005-09-01T17:50:00.000-04:002005-09-01T19:04:30.876-04:00गैस कार कीयहाँ अमेरिका में गैस के दामों में दिन दूनी रात चौगनी प्रगति हो रही है। कल ही न्यूज में देखा, अटलांटा के पास कहीं रेगुलर (अनलेड्ड) गैस के दाम हैं $5.87। दुकानमालिक का नाम कुछ कुछ ऐसा है - माइक वसाया। नाम पर मत जाना बन्दा शक्ल सुरत और बातों से खालिस अपने यहाँ का है। अपने यहाँ से मेरा मतलब अपनी ट्राई स्टेट यानि भारत, पाक, बांग्लादेश। पूछा गया, भैय्या ऐसा काहे करे हो? जवाब मिला जिससे लोग Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1124741493464947222005-08-22T16:11:00.000-04:002005-08-22T16:11:33.483-04:00एक औरत की मौतलोकल लोगों (जानवरों) के पुरूष फायर फाइटरस को एंट्री देने से इन्कार करने पर एक मुसलमान औरत की मौत। एक शर्मनाक खबर मानव जाति के लिये। सरकार को जरूरत है इन मामलों में सख्ती से निपटने के लिये। जब तक देश में ऐसे हादसे होते रहेंगे (समस्या रहेंगी), चाहे हम पावरफुल देशों की कतार में नबंर एक ही क्यों न हो, मेरी और दूसरे देशों की नजर में, कमजोर, जाहिल, अनपढ़ और गवांर ही रहेंगे।
पूरी खबर पढ़ने के Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1124412890239619712005-08-18T20:49:00.000-04:002005-08-18T20:55:43.043-04:00सीविलाइजेशनः कंक्वेशट आफॅ द मंथ - इंडियाभारत हमेशा से ही आक्रमणकारियों के लिये स्वर्ग रहा है, ना जाने कितने ही पर्शियन, ग्रीक, चाइनीज नोमेड, अरब, पुर्तगाली, और अंग्रेज आये और फिर उन्हे वापस लौटना भी पड़ा, और लोकल हिन्दू राज्य इन सबके बावजूद अपने संस्कारों की जड़ें मजबूत करता रहा।
खेल शुरू होता है पहले से ही तय किये गये ७ खुन के प्यासे विरोधी राज्यों (सभ्यताओं) के साथ, और इस खेल में भी गांधी और उसका भारत ना सिर्फ अंत तक बचा रहाTarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1124035298681282132005-08-14T11:55:00.000-04:002005-08-14T12:02:59.073-04:00द राइजिंगः Ballad of Mangal Pandeyद राइज़िंग एक गंभीर सिनेमाई प्रयास है। यह राइजिंग सिर्फ एक सिपाही मंगल पांडे के बारे में नही बल्िक पूरे आवाम की जागृति के बारे में है। एक बहुत ही अच्छा सामुहिक प्रयास है, सभी क्षेत्रों में अच्छा काम किया गया है चाहे हो एक्टिंग हो, या हिमान धमिजा कि सिनेमेटोग्राफी, और या रहमान संगीत या जावेद अख्तर के गीत या फिर केतन मेहता का डायरेक्शन। मंगल मंगल के बोलों से शुरू होती इस फिल्म का यह टाईटिल Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-11107333.post-1120102442768055162005-06-29T23:28:00.000-04:002005-06-29T23:35:37.730-04:00माजरा क्या हैपहले पढ़ सुन कर तो लगा इस बार बड़ा कॉमन सा विषय मिला है अनुगुँज के लिए, कॉमन इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि ये ३ शब्द अक्सर लोगों के मुहँ से एक दूसरे को कहते हुए सुने जा सकते हैं। मसलन, "अरे मिंयाँ आज बड़े चहक रहे हो 'माजरा क्या है' और या फिर कभी आफिस में कोई सूट-बूट पहन के आ जाये तो सब उसे ऐसे देखते हैं जैसे पूछ रहे हों, भई 'माजरा क्या है'। अब वैसे तो कुछ भी लिखने में ऐसी कोई बंदिश नही लकिन Tarunhttp://www.blogger.com/profile/00455857004125328718noreply@blogger.com