tag:blogger.com,1999:blog-10933538.post-1117571220432233632005-06-01T01:35:00.000+05:302005-06-30T16:31:09.303+05:30एक ब्लाग या पाती ।एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />चिट्ठी की हुई विदाई,<br />चिट्ठा से हुई सगाई,<br />भावों के ससुराल चली,<br />ले भानुमती की पिटारी,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />मुक्त आकाश के तले,<br />अदृश्य तंतुओं से जुङे,<br />सहस्र आँखे फिर यहाँ,<br />अपनापन लिए पढती हैं,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />लेखनी के प्रवाह से,<br />कुंजीपटल पर स्पंदित,<br />अनवरत इन पन्नों में,<br />स्वतंत्रता की अभिलाषी,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />समाज का दर्पण यह,<br />वैचारिक चपल चौपाल,<br />बिना किसी लाग-लपेट,<br />लिखते हैं स्वजन,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />मिलकर बातें करें हम,<br />अंतिम अनावरण से पहले,<br />बिना आवरण के जब लिखे,<br />शाश्वत हो जाती है फिर,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />ह्रदय के वाद्ययंत्र को<br />यहाँ कलम के कलाकार,<br />क्या खूब बजाते हैं, फिर<br />मिलकर एक नाम देते हैं,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />अनजानों से डरकर भी,<br />विश्वास की ही आशा में,<br />स्थापित करते हम संवाद,<br />मिला अनोखा माध्यम है,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />लेखनी की स्याह होती<br />आँसू की अनवरत धारा,<br />आप हमारे संग होते है,<br />लिखते है सांत्वना की,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<br /><br />विचारों की कुछ ऐसी लहरें,<br />क्षण या जीवन भर के लिए,<br />एक बंधन में बाँधते, जैसे<br />अनजान नाविकों का यात्रा,<br /><br />एक ब्लाग या पाती ।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/10933538-111757122043223363?l=prempiyushhindi.blogspot.com'/></div>Prem Piyushnoreply@blogger.com0