tag:blogger.com,1999:blog-10204034.post-1116705278520192182005-05-21T12:46:00.000-07:002005-05-21T12:54:38.523-07:00गोबर से बिजलीक्या आपने कभी सोचा है कि गोबर से बिजली बन सकती है? गोबर गैस प्लांट की मदद से कई सारे काम करने के बारे में तो मालूम है लेकिन सीधे गोबर से बिजली बनाना कुछ नया है।<br /><br />बीबीसी हिंदी में प्रकाशित एक <a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/story/2005/04/050419_power_cowdung.shtml">लेख</a> के अनुसार बाराबंकी जिले के एक गांव पूरेझाम, जो सुल्तान पुर रोड पर हैदरगढ़ कस्बे से पांच किमी की दूरी पर है, के निवासी ब्रजेश त्रिपाठी ने एक प्रयोग शुरू किया जिसमें कि उनहोंने कुल्हड़ों में गोबर भरकर बल्ब जलाने में सफलता प्राप्त की।<br /><br />इस तरह बिजली बनाने के लिए वह झालर वाले सस्ते चीनी बल्व और बेकार हुए तीन बैट्री सेल लेते हैं। बैट्री सेल का कवर उतार कर उसमें पाजिटिव निगेटिव तार जोड़ देते हैं और फिर इन्हें अलग-अलग तीन कुल्हड़ में भरे गोबर के घोल में डाल देते हैं। इस घोल में थोड़ा सा नमक, कपड़ा धोने का साबुन या पाउडर मिला देते हैं।<br /><br /><img src="http://www.bbc.co.uk/worldservice/images/2005/04/20050419130700gobar_powerplant203.jpg" /><br /><br />इस तरह घर बैठे रोशनी पैदा करने का प्रयोग सफल देख पूरेझाम में घर-घर लोग बिजली बनाने लगे। आसपास के सैकड़ों गाँवों में भी लोग इस तरह लाइट जला रहे हैं। बिजली बनाने का यह फार्मूला गाँव के छोटे-छोटे बच्चों को भी समझ में आ गया है. बच्चों का कहना है कि इस लाइट से पढ़ाई में बहुत मदद मिलती है। इसकी रोशनी लालटेन जैसी है। इस तरह सस्ती और आसान बिजली मिलने से गाँव वाले प्रसन्न और आश्चर्यचकित हैं, हालांकि उनको यह नहीं मालूम कि कुल्हड़ भर गोबर और पुराने बैट्री सेल में ऐसी कौन सी रासायनिक क्रिया होती है, जिससे बिजली बनती है। गाँव वालों को उम्मीद है कि जब तकनीकी जानकार लोग इस प्रयोग में हाथ लगाएंगे तो एक बेहतर टेक्नॉलॉजी बनकर तैयार होगी।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15373573505567241038noreply@blogger.com