tag:blogger.com,1999:blog-10058766.post-1105464566293315122005-01-11T09:28:00.000-08:002006-11-11T20:05:05.452-08:00हनुमान चालीसा श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार |
<br />बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि |
<br />बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौ पवन कुमार |
<br />बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार ||
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<br />जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर |
<br />रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा ||
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<br />महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी |
<br />कंचन बरन बिराज सुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचित केसा ||
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<br />हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे कान्धे मूंज जनेऊ साजे |
<br />शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन ||
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<br />विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर |
<br />प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया ||
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<br />सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा |
<br />भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज सवारे ||
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<br />लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये |
<br />रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई ||
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<br />सहस बदन तुम्हरो जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें |
<br />सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा ||
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<br />जम कुबेर दिगपाल कहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते |
<br />तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा ||
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<br />तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना लंकेश्वर भये सब जग जाना |
<br />जुग सहस्र जोजन पर भानु लील्यो ताहि मधुर फल जानु ||
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<br />प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं |
<br />दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||
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<br />राम दुवारे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे |
<br />सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहें को डरना ||
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<br />आपन तेज सम्हारो आपे तीनों लोक हाँक ते काँपे |
<br />भूत पिशाच निकट नहीं आवें महाबीर जब नाम सुनावें ||
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<br />नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा |
<br />संकट ते हनुमान छुड़ावें मन क्रम बचन ध्यान जो लावें ||
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<br />सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा |
<br />और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे ||
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<br />चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा |
<br />राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा ||
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<br />तुम्हरे भजन राम को पावें जनम जनम के दुख बिसरावें |
<br />अन्त काल रघुबर पुर जाई जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ||
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<br />और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई |
<br />संकट कटे मिटे सब पीरा जपत निरन्तर हनुमत बलबीरा ||
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<br />जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करो गुरुदेव की नाईं |
<br />जो सत बार पाठ कर कोई छूटई बन्दि महासुख होई ||
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<br />जो यह पाठ पढे हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा |
<br />तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ||
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<br />पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप |
<br />राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ||Anuraghttp://www.blogger.com/profile/11984538289882278685noreply@blogger.com